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कर्ज लेकर घी पीना पाकिस्तान के लिए बना बड़ा मर्ज (लेखक-अजित वर्मा/ईएमएस)

07/12/2018


जहाँ से भी मिले कर्ज लेकर नेताओं, अफसरों और सेना को मौज कराते-कराते पाकिस्तान कर्ज संकट में फँसने की ओर अग्रसर हो रहा है। कर्ज पाकिस्तान के लिए बड़ा मर्ज बन गया है और भीषण आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से कर्ज मांगा है। लेकिन इस पर अमेरिका सतर्क हो गया है। अमेरिका को शक है कि पाकिस्तान आईएमएफ से यह सहायता चीन का कर्ज उतारने के लिए मांग रहा है। लेकिन इसीलिए अमेरिका ने पाकिस्तान से चीन के कर्ज पर पारदर्शिता लाने की मांग की है।
अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप-वित्त मंत्री डेविड मालपास से कांग्रेस की एक कमेटी के समक्ष सुनवाई के दौरान सांसद जेफ मर्कली ने पूछा था कि क्या आईएमएफ के कोष का इस्तेमाल चीन का कर्ज उतारने के लिए किया जा रहा है, इस पर मालपास ने बताया कि आईएमएफ की टीम अभी पाकिस्तान से लौटी है। हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कर्ज में पूरी पारदर्शिता हो। मर्कली का कहना है कि एक चुनौती यह है कि पाकिस्तान ने ज्यादातर मामलों में अपनी कर्ज की शर्तों का खुलासा नहीं किया है, जिसमें ब्याज दर और उसकी अवधि शामिल है।
यह बात ध्यान दिये जाने योग्य है कि हाल ही अमेरिका पाकिस्तान की दी जाने वाली करोड़ों डालर की सहायता पर रोक लगा चुका है। पिछले महीने भी अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नॉर्ट ने भी कहा था कि पाक को कर्ज देने से पहले इसकी भी समीक्षा की जाएगी कि उसकी आर्थिक हालत क्या है और उस पर कितना कर्ज है, पाक ने दूसरे देशों से कितना और किन शर्तों पर उधार ले रखा है, हम इसकी भी जांच करेंगे।
पाक पर चीन का भी करीब 62 अरब डॉलर का कर्ज है। हाल ही में पाकिस्तान ने अपने आर्थिक संकट को दूर करने के लिए आईएमएफ से 12 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता (बेलआउट पैकेज) मांगा है। इससे पहले आईएमएफ ने साल 2013 में पाक को 6.7 अरब डॉलर की सहायता दी थी। इसी साल पाक सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात के तीन बैंकों से 20 करोड़ डॉलर के कर्ज की भी मांग की थी। पिछले महिनों में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सउदी अरब और चीन से 6-6 बिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता पाने में सफल रहे थे। खबरें आती रही हैं कि चीन कर्ज के मामले में पाकिस्तान से कठोर सौदेबाजी कर रहा है और कड़ी शर्तें आरोपित कर रहा है। खबरें यह भी आ रही हैं कि आतंकवाद के मुद्दे पर अब चीन भी पाकिस्तान से नाराज हो रहा है। आर्थिक संकट की वजह से पाक ने अपनी कई अहम योजनाओं को बंद कर दिया है। इनमें कराची से पेशावर के बीच 8.2 अरब डॉलर की रेल परियोजना भी शामिल है। इसके अलावा कई अन्य परियोजनाएं भी इसलिए रोक दी गई हैं, ताकि देश पर कर्ज का बोझ कुछ कम हो सके। पाकिस्तान के सामने कर्ज संकट के जाल में र्फँसने का खतरा बढ़ रहा है। हम मानते हैं कि अस्थिर पाकिस्तान अंतत: भारत के लिए भी कष्टप्रद हो सकता है।
07दिसम्बर/ईएमएस