क्षेत्रीय

कोयले की खुली खदान में मत्स्यपालन का सीईओ जिला पंचायत ने किया निरीक्षण

07/01/2019

अनूपपुर (ईएमएस)। आजीविका में सुधार के लिए शासन द्वारा विविध प्रयास किये गए हैं। इन्हीं में से एक है मत्स्यपालन द्वारा आजीविका संवर्धन। अनूपपुर के मत्स्यपालन विभाग द्वारा इस प्रयास में एक अभिनव पहल की गयी है इसके अंतर्गत ग्राम डोला में कोयले की बंद हो चुकी खुली खदान के जलाशय का उपयोग मत्स्यपालन के लिए किया गया है। यह देश का अपने तरह का प्रथम प्रयास है। इस प्रयास में ज्योति स्वसहायता समूह डोला की १८ महिलाएँ अपनी आजीविका प्राप्त करेंगी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ सलोनी सिडाना ने डोला जलाशय का निरीक्षण किया एवं समूह की महिलाओं से जानकारी प्राप्त की। समूह की महिलाओं ने बताया ६ महीने पहले मत्स्यपालन विभाग द्वारा केज स्थापित कर पंगेशियस मछली के बीज समूह उपलब्ध कराए गए एवं केज के माध्यम से मत्स्यपालन के प्रशिक्षण हेतु रायपुर भेजा गया था। साथ ही समय समय पर मत्स्यपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन भी प्राप्त होता रहा है। महिलाओं ने बताया लगभग ९० हजार बीज मत्स्यसंवर्धन हेतु डाले गए थे जो अब ४०० ग्राम के हो गए हैं। मई माह तक ये मछलियाँ विक्रय के लिए तैयार हो जाएँगी तब इनका वजन लगभग १ किलोग्राम होगा। डॉ सिडाना ने समूह की महिलाओं के ज्ञान एवं लगन हेतु मत्स्य विभाग के अधिकारियों की सराहना की एवं कहा योजनाओं से लक्षित उद्देश्य की प्राप्ति में सतत मार्गदर्शन करते रहे। इसके बाद आप ग्राम छौहरी में केज कल्चर की व्यवस्था का निरीक्षण किया। ग्राम छौहरी में यह २४ आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित किया जाएगा। इस दौरान सहायक संचालक मत्स्यपालन शिवेंद्रसिंह परिहार समेत मत्स्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
ईएमएस/प्रवीण/07/01/2019