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राफेल पर सर्वोच्च न्यायालय ने बढ़ाई भा.ज.पा. की परेशानी (लेखक-नईम कुरैशी / ईएमएस)

14/04/2019

चुनाव आयोग के अब तक के इतिहास में ये पहला मौका है कि वो नरेन्द्र मोदी के सामने भा.ज.पा. के सामने बौना साबित हो रहा है। आयोग ने मुख्यमंत्री योगी के फैज पर दिये नारे ये तो मोदी की फैज है, इतने बड़े मामलों पर भी उन पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की जिसके दो दिन बाद मोदी ने फिर से पाकिस्तान पर की गई हवाई कार्यवाही का ढोल पीट पीटकर फिर से उसका चुनावों में फायदा लेना चाहा जो चुनावी कानूनों के खिलाफ माना जा रहा है।
चुनाव आयोग तमाशबीन
उधर देश के नामचीन बड़े सेवानिवृत्त आला अफसरों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर भी चुनाव आयोग के सत्ता पक्ष के दबाव में काम करने का मामला उड़ाया है। उधर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी बजरंग बली व अलि के नामों पर फिर से जातपात भड़का कर वोटरों को प्रभावित करने पर जुटे हैं। उधर पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, राजस्थान के राज्यपाल द्वारा भा.ज.पा. को वोट देने और मोदी को पुन: प्रधानमंत्री बनाने के मामले में भी देखा गया है कि चुनाव आयोग सिर्फ पत्र भर लिख रहा है और तमाशबीन बनकर खड़ है।
फिल्मकारों का विरोध
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन से भा.ज.पा. की पहले से ही नींद उड़ी है। उत्तर प्रदेश में चुनावों पर खोज खबर कर रहे बी.बी.सी. लंदन के भारत में 30 साल तक रहे पत्रकार मार्कटली ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने मुजफ्फरनगर सीट पर देखा कि संघ परिवार ने यहां हिन्दू मुसलमानों को बांटने का अभियान भी अब प्रभावहीन सा लगने लगा है। 2013 में यहां दंगे कराकर ही बी.जे.पी. 2014 में उत्तर प्रदेश में 73 लोकसभा सीट जीत पायी थी। अब ये माहौल नहीं है। जहां एक तरफ राफेल का मामला है वहीं सी.बी.आई. और ई.डी. इन्कम टैक्स छापों से भा.ज.पा. विरोधी नेताओं को डराया जा रहा है। सी.बी.आई. का दुरुपयोग तो 10-20 सालों से हो रहा है पर अब ये काफी निम्न स्तर पर किया जा रहा है। भा.ज.पा. उत्तर प्रदेश में 30-40 सीटें, बिहार में 20-25 सीटें व मध्य प्रदेश में 20 के करीब सीटें व महाराष्ट्र में 25 सीटें व छत्तीसगढ़ में 10 सीटें खोने जा रही है की खबरें आ रही हैं। जो करीब 100-120 के लगभग हो जाती हैं। इसकी भरपाई आखिर बंगाल या उड़ीसा से कितनी होगी। सियासी पंडित यहां से सिर्फ 8-10 सीटें ही मान कर चलते हैं। उधर फिल्मकारों ने भी आम जनता से मोदी को वोट न देने की अपील की है। उनका मानना है कि गाय के नाम पर दलित और मुसलमानों पर संघ परिवार हिंसा फैला रहा है। सर्वोच्च न्यायालय की दखल पर राजस्थान व उत्तर प्रदेश की सरकारों को कुछ कार्यवाही हत्यारों पर करनी पड़ी थी। संघ परिवार के मुखिया तक ने गोवंश के मामले में हत्यारों की वकालत तक की थी उत्तर प्रदेश। में चीनी मिलों के बकाया 60 हजार करोड़ को किसालों को दिलाने में भी उत्तर प्रदेश सरकार 2 साल की कोशिशों पर भी नाकाम रही है। किसानों को महज 14 हजार करोड़ रुपये बमुश्किल दिलाये जा सके हैं। भा.ज.पा. को इन चुनावों में काफी निराशा भी देखी जा रही है। मध्य प्रदेश में तो उसे 10 सीटों पर प्रत्याशी ही नहीं मिल पा रहे हैं। उधर भोपाल में दिग्विजय सिंह के खिलाफ 15 दिन में भी कोई प्रत्याशी नहीं उतार पायी है। भा.ज.पा. के एक केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को ग्वालियर से मोदी लहर में भी मुश्किल से 26 हजार वोटों से जीत पाये थे। ऊपर से उन्होंने ग्वालियर चम्बल संभाग में नरेन्द्र तोमर ने अपने ही भा.ज.पा. वालों को प्रशासन की मदद से पीछे धकेल कर चुनावों में भी परेशान करवा कर हरवा दिया था। अपने पुत्र मोह में भी नरेन्द्र काफी बदनाम रहे हैं। उनके बेटे ने उनके ही बंगले में समान्तर सरकार चलाते हुये देखे गये।
मुश्किल से तोमर जीते थे
मध्य प्रदेश में भी नरेन्द्र तोमर को इस बार चुनकर दिल्ली जाने में लाले पड़ते दिखाई दे रहे हैं क्योंकि वो इस बार ग्वालियर से मुरैना चले गये हैं। वहां भी विरोध हो जाने से वो घबराकर अब खुद कहने लगे हैं कि मुझे खुद पता नहीं है कि मैं कहां से लड़ने वाला हूँ। उधर शिवराज सिंह ने अपने बयान में कहा है कि ग्वालियर चम्बल में करारी हार से मैं पुन: मुख्यमंत्री नहीं बन पाया हूँ। उधर नरेन्द्र तोमर के बंगले पर जहां हजारों की भीड़ रहती थी अब वहां सैकड़ों भी कार्यकर्त्ता नहीं बचे हैं। उधर राफेल पर सरकारी झूठ के चलते सर्वोच्च न्यायालय ने पुन: मामले में सुनवाई स्वीकार कर भा.ज.पा. इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के नाम के दुरुपयोग के गुब्बारे को सरेआम फोड़ दिया है व सरकारी दस्तावेजों के सामने प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। लगता है राफेल के मामले में भा.ज.पा. व नरेन्द्र मोदी की मुश्किलें फिर से बढ़ती दिखाई दे रही हैं। उधर बेरोजगारी के मुद्दे पर भी नरेन्द्र मोदी कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं। चौकीदार चौक का नारा अपनी लोकप्रियता पर परवान चढ़ता दिख रहा है।
14अप्रैल/ईएमएस