लेख

सत्ता दल के सांसद क्या कर रहे हैं...! (लेखक-नईम कुरेशी / ईएमएस)

07/12/2018


उज्जैन के महाकाल मंदिर में प्रवेश के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रो. मालवीय द्वारा पुलिस से की गई गाली गलौंच से जहाँ भारतीय जनता पार्टी व संघ परिवार की अनुशासन पर प्रश्नचिन्ह लग गया वहीं देश के अपराधी सांसदों व विधायकों की भी याद आ गई। देश भर में 40 फीसद तक सांसदों के आचरण प्रा. मालवीय जैसे ही बताये जा रहे हैं। ये सब कुछ सांसद व विधायकगण भारत में आमतौर पर करते रहते हैं। हवाई अड्डों से लेकर पुलिस थानों में भी ये सब करते आ रहे हैं।
उज्जैन की इस घटना का महत्व तो इससे भी ज्यादा इस लिये भी है कि अभी 11 दिसम्बर तक चुनावों के चलते आचार संहिता लागू है जिसके चलते सभी जनप्रतिनिधियों पर कानून का पालन करना तो और भी ज्यादा जरूरी है। भारतीय जनता पार्टी के ज्यादातर विधायकगण व सांसद उत्तर प्रदेश व बिहार ही राह पर चलते देखे जा रहे हैं। वो लोग सांसद की गरिमा का ध्यान न रखकर एक अपराधी जैसा बर्ताव करना शर्मसार करती है भा.ज.पा. को व संघ परिवार को।
कड़वे बोल
कड़वे व साम्प्रदायिक बोल के मामलों में वैसे तो कई दलवाले हैं पर भा.ज.पा. वाले सबसे आगे देखे जा रहे हैं। उन्हें तो देश की सत्ता व प्रदेश की सत्ता ने मदमस्त कर दिया है। वो महिलाओं से दुर्व्यवहार करते हैं, उनकी लाज लूटते हैं फिर उस पर सत्ता के मद के चलते हतों नाटक करते हैं। जैसा सेंगर नामक विधायक उत्तर प्रदेश में कर चुके हैं। ऐसी घटनायें हर माह हर हते में बीमारू राज्यों में की जा रही है।
बड़े बोल बोलकर देश की आबो हवा खराब कर साम्प्रदायिकता का जहर तो संघ परिवार के लोग फैला ही रही हैं पर इससे भी ज्यादा वो आर्थिक व सामाजिक अपराध करने में भी आगे देखे जा रहे हैं। उधर सरकार में बैठे संघ के लोग जजो की नियुक्ति में दखल देने की 2 सालों से लगातार कोशिशें कर रहे हैं। कॉलेजियम सिस्टम का लगातार विरोध कर रहे हैं। चुनाव आयोग की अहम शिकायतें केन्द्र ने रद्दी में डाल रखी हैं।
विपक्ष के आरोपों में दम लग रहा है कि लोकतंत्र को कायम रखने की संस्थानों को केन्द्र सरकार लगातार कमजोर करती आ रही है। न्यायाधीश लोया के मामले में जाँच तक करने नहीं दे रही है। आखिर केन्द्र देश के लोकतन्त्र को बंदी क्यों बनाना चाहता है। उच्च न्यायालयों से लेकर सर्वोच्च न्यायालयों तक में 40 फीसद तक न्यायाधीशों के पद अभी भी खाली पड़े हैं। इस तरफ से ध्यान बाँटने के लिये ही कॉलेजियम सिस्टम को केन्द्र बदलना चाह रहा है। उधर किसानों को फसल के दाम नहीं मिल पा रहे हैं व करोड़ों नौजवान बेरोजगार भी हैं। इस तरफ सत्ता दलों का ध्यान ही नहीं है। जानवरों की रक्षा के नाम पर हत्यायें कराई जा रही हैं। उधर सत्ता दल कुर्सी के लिये कानून व्यवस्था को स्वयं बिगाड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में खासतौर से।
07दिसम्बर/ईएमएस