लेख

क्या प्रतिमाओं की ऊँचाईयाँ तय कर सकती हैं महापुरुषों के कद? (लेखक-अजित वर्मा/ईएमएस) (06एलके06एचओ)

06/12/2018

दलीय स्वार्थों और अपनी-अपनी खब्तों के शिकार नेता अब राष्ट्रीय नेताओं ही नहीं, ‘भगवान’ के रूप में पूजे जाने वाले आराध्यों की ऊँची-ऊँची प्रतिमाओं की स्थापना की अप्रिय, अवांछित और सर्वथा अनुचित होड़ में जुट गए हैं। राष्ट्रीय मुद्दों को नेपथ्य में ढकेल कर भावनाओं के उभार में जुटे रहना नेताओं का शगल हो गया है। इससे क्षेत्रीय टकराव की स्थितियां भी उत्पन्न हो रही हैं।
वैसे, एक ऊँची प्रतिमा की घोषणा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी की है और ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की विराट प्रतिमा एक मिथ्या और झूठे के आधार पर बनवाना चाहते हैं। इसी तरह उत्तरप्रदेश के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पसंदीदा मुख्यमंत्री आदित्यनाथ सिंह योगी ने उत्तरप्रदेश के विवादों का केन्द्र बना दिये गये शहर अयोध्या में श्रीराम की एक विराट प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा कर रखी है। जाहिर है कि भाजपा के नेता ही हमारी मूर्ति -बड़ी-हमारी मूर्ति बड़ी की होड़ में जुटे हैं। इस होड़ का हश्र क्या होगा किसी को नहीं पता।
गुजरात में सरदार पटेल की विराट प्रतिमा की स्थापना पर मची छींटाकशी के बाद अब महाराष्ट्र में शिवाजी की प्रतिमा को लेकर बवाल मचा है। शिवसेना कह रही है कि सरदार बल्लभभाई पटेल की प्रतिमा ऊंची साबित करने के लिए शिवाजी की प्रतिमा की ऊंचाई को कम करना ‘संकुचित, विकृत मानसिकता’ की निशानी है। शिवसेना ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस से मांग की है वे यह घोषणा करें कि मुंबई तट पर निर्माण के लिए प्रस्तावित मराठा छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा दुनिया में सबसे ऊंची होगी और वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से वे नहीं डरेंगे।
शिवसेना के अनुसार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महाराष्ट्र प्रमुख जयंत पाटिल ने दावा किया है कि पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनी रहे इसलिए मुंबई में समुद्र में बननेवाली छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा की ऊंचाई कम कर दी गई है।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में लिखा है कि मुख्यमंत्री ने जिस हिम्मत से मराठा आरक्षण की घोषणा की, उसी साहस से शिवाजी की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के निर्माण की घोषणा करनी चाहिए। शिवसेना ने फड़णवीस को याद दिलाया कि कैसे मुम्बई को महाराष्ट्र का ही हिस्सा बनाने के लिए तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री चिंतामणराव देशमुख ने (तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल) नेहरू को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।
पार्टी ने कहा है कि सरकारी तिजोरी के दरवाजे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के लिए हमेशा खुले रखे गए लेकिन महाराष्ट्र में शिवाजी के भव्य स्मारक की नींव भी नहीं रखी गई है। शिवसेना ने सवाल किया है कि कहीं ऐसी कोई अंदरूनी योजना तो नहीं थी। सरदार की सर्वाधिक ऊंचाई वाली प्रतिमा पहले बने और उनके सामने शिवाजी जैसा युगपुरुष बौना साबित हो? और क्या उसी के अनुसार शिवाजी के स्मारक को लटकाए रखा गया है? लेख में यह भी लिखा गया है कि शिवाजी की प्रतिमा सबसे बड़ी और ऊंची ही होनी चाहिए। इसके लिए फड़णवीस सरकार और महाराष्ट्र के सभी दल के नेताओं को एक होना चाहिए। सवाल यह है कि क्या अब मूर्तियों की ऊँचाई महापुरुषों के ऐतिहासिक कद का निर्धारण करेगी?
ईएमएस/प्रवीण/06/12/2018