लेख

राजस्थान,मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन या कुछ और ....! (लेखक-भरत मिश्र प्राची / ईएमएस)

30/11/2018

छत्तीसगढ़ विधानसभा के 70 सीटों के लिये मतदान दो चरणों में सम्पन्न हो चुके जहां औसतन सर्वाधिक मतदान वर्श 2013 से ज्यादा होने का अनुमान है। वर्श 2013 में छत्तीसगढ राज्य की भाजपा सरकार मात्र 0.75 प्रतिशत आकड़े के अन्तर से बनी थी। इस बार छत्तीसगढ़ में पूर्व से ज्यादा मतदान हुआ है जो सत्ता परिवर्तन की ओर इंगित करता है। यहां भी वर्तमान भाजपा सरकार के प्रति जनाक्राश तो है पर कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ रहे अजीत जोगी के बदले सुर से छत्तीसगढ़ में में फिर से एकबार भाजपा की सरकार बनती दिखाई दे रही है। वैसे छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी के दल से चुनाव में हुये गठबंधन वाले दल बसपा के सुप्रीमो मायवती के तेवर अजीत जोगी के बदले सुर के साथ मेल तो नहीं खा रहे है पर राजनीतिक क्षेत्र में सबकुछ संभव है। भाजपा हर हालत में इस अवसर का लाभ लेना चाहेगी। वैसे राजस्थान, तेलगाना में जहां 7 दिसम्बर को एवं मध्यप्रदेश, मिजोरम में जहां 28 नवम्बर को चुनाव होने वाले है, सत्ता के प्रति उभरते जनाक्राश को नकारा नहीं जा सकता। राजस्थान में तो मध्यप्रदश से कुछ ज्यादा ही सत्ता के प्रति उभरता जनाक्राश नजर आ रहा है। जिसके कारण सत्ता परिवर्तन राजस्थान एवं मध्यप्रदश इन दोनों राज्यों में साफ - साफ नजर आ रहा है। चुनाव में बागी तेवर भी है, पर ये बागी कांग्रेस एवं भाजपा दोनों के है, जिससे राज्य में अन्य दलों को फायदा हो सकता है। इस तरह के हालात भी राजनीतिक परिदृष्य को बदल सकते है।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एवं भाजपा दोनों में टिकट नहीं मिलने से बागी हुये प्रत्याशियों ने विरोध का तेज बिगुल बजा दिया है। जिसे षांत करना दोनों के लिये अब टेढ़ी खीर बन चुका है। राजस्थान में सबसे ज्यादा विरोध उन प्रत्याशियों का हो रहा है जो टिकट नहीं मिलने से कांग्रेस छोड़ भाजपा एवं भाजपा छोड़ कांग्रेस में षामिल होकर प्रत्याशी बने हुये है। इस तरह से उभरे परिवश से कई बागी निर्दलीय बनकर तो कई राजस्थान में गठित नई राजनीतिक पार्टी राश्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का दामन थामकर चुनावी मैदान में विरोध जता रहे है। इस तरह के हालात इस बार राजस्थान की नई राजनीतिक पृश्ठिभूमि उभार सकते है जहां दोनों राश्ट्रीय दल कांग्रेस एवं भाजपा सुप्रीमों की प्रतिश्ठा भी दांव पर है। मध्यप्रदश में भी इस बार सत्ता परिवर्तन के लक्षण नजर आ रहे है।
इस चुनाव में भी पूर्व की भाति दागी एवं धन्नासेठ प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। टिकट बटवारे को लेकर भाजपा एवं कांग्रेस दोनों दलों में काफी विरोध है। जहां आरोप है कि पैसे के बल पर कार्यकताओं की उपेक्षा की गई है। इस तरह की पृश्ठिभूमि से जुड़े प्रत्याशी राजनीतिक समीकरण को बदल सकते है। दश का युवा वर्ग रोजगार के लिये भटक रहा है। भाजपा के षासनकाल में रोजगार के लिये बेरोजगारों को काशल योजना के तहत धन तो दिये गये पर रोजगार देने वाले एक भी नये संसाधन उद्योग नहीं लगाये गये और न कोई नई भर्तिया की गई जिससे प्रदश में बेरोजगारी बढ़ती गई। पेट्रोलए डीजलए रसोईगैस के बढ़े दाम तथा दवाई एवं जांच जैसी जीवनरक्षक पैमाने पर जीएसटी लगाने से भी आमजन में सरकार के प्रति उभरा जनाक्राश सत्ता परिवर्तन का कारण बनता दिखाई दे रहा हे। वैसे भाजपा सरकार अपने कार्यकाल में उज्जवल योजना के तहत हर गरीब तक गैस चुल्हा मुळैया करने की बात तो कर रही है पर महंगी गैस से गरीबों के बंद पड़े चूल्हें जनाकाश के कारण बनते जा रहे है। खाली ख्याली पुलाव आमजनमानस में जनाक्राश ही उभार सकता है।जहां इस बार जनता का सरकार से मोहभंग होता दिखाई दे रहा है।
लोकसभा चुनाव से पूर्व हो रहे इस बार के विधानसभा चुनाव सत्ता की दृश्टि से काफी महत्वपूर्ण बन चुके है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में विशेश रूप से तीन हिन्दी प्रदश राजस्थान, मध्यप्रदश एवं छत्तीसगढ जहां सर्वाधिक मतदाता है, आगामी लोकसभा चुनाव को प्रभावित कर सकते है। जिसके कारण केन्द्र की भाजपा सरकार वर्श 2019 में फिर से सत्ता में वापसी के क्रम में इन राज्यों में अपने अस्तित्व को बरकरार रखने के प्रयास में हर जोड़ कोशिश में लगी हुई है। राजस्थान में सत्ता का विरोध है , इस बात को भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व अच्छी तरह जानता है पर उसे अब भी उम्मीद है कि आम जन के पास फिलहाल मोदी का कोई विकल्प नहीं है जिसका लाभ चुनाव में उसे मिल जाय। पर ऐसा सोचना उसकी बड़ी भूल होगी। जनता यदि सरकार के कार्यो से संतुश्ट नहीं है तो चुनाव में प्रतिकार करना उसका स्वाभाविक पक्ष बना जाता है, जो सत्ता परिवर्तन का कारण बनता है। वैसे देखा जाय तो फिलहाल नरेन्द्र मोदी के प्रति आमजन में पहले जैसा विष्वास भी नहीं रह गया जिसका लाभ भाजपा इस चुनाव में पूर्व की भॉति उठा सके। यह सत्य है कि विपक्ष फिलहाल एकजूट नहीं दिखाई दे रहा जिसका आंशिक लाभ भाजपा को मिल जाय पर अपने सत्ताकाल में उभरे जनाक्राश के कारण सत्ता में उसकी वापसी फिलहाल नजर नहीं आ रही है। इस तरह इसबार चुनावों में सत्ता परिवर्तन के लक्षण नजर आ रहे है।
30नवंबर/ईएमएस