लेख

अब चूके तो इतिहास माफ नहीं करेगा (लेखक-डा.शशि तिवारी /ईएमएस)

13/03/2019

भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा क्षत्रिय पुरूष के लिए युद्व एक अवसर होता है और रण क्षेत्र में वीरगति को प्राप्त होना ही उसकी सर्वश्रेष्ठता को प्रदर्शित करने का न केवल अवसर होता है बल्कि श्रेष्ठ लोक को भी गमन करता है, और उसकी कीर्ति भी युगो-युगो तक रहती है।
हमारे सैनिको का भी यही सपना होता है कि वह देश रक्षा के लिए न केवल युद्व करे बल्कि रक्षा करते-करते मातृ भूमि के लिए शहीद हो यही उनकी इच्छा भी होती है, उनका यही जज़्बा आम नागरिकों से उनको अलग करता है।
कश्मीर निःसंदेह जो हमारा अभिन्न अंग है लेकिन इसे विडम्बना ही कहेंगे, उनका विधान और मिशन अलग है। हमारे टेक्स का एक बड़ा हिस्सा उन पर विशेष दर्जे के तहत् खर्च किया जा रहा है। ज्यों-ज्यों उनकी सहायता राशि बढ़ाई गई त्यों-त्यों मज बढ़ता ही गया। विगत 30 वर्षों में घाटी में पाक परस्त लोगों की संख्या ही बढ़ी है वहां से हिन्दू पलायन कर गए फिर वापस नहीं अपने घर लौटे। बढ़ती पाक परस्ता में पाक का हाथ तो है ही है। लेकिन हमारी राजनीति भी कम दोषी नहंी है। घाटी से हिन्दुओं के पलायन को किसी राजनीतिक पार्टी ने गंभीरता से नहीं लिया। जिसके परिणाम स्वरूप एक खास वर्ग अपने को भारत से स्वतंत्र मानने का सपना देखने लगा, और फिर शुरू हुआ आतंक और आतंकवादियों की बढ़ती गतिविधियां। इन आतंकवादियों को पूरा संरक्षण वहां की स्थानीय जनता ने दिया। पहले तो लोग जनता को मासूम समझते रहे लेकिन, उसी जनता ने उसकी रक्षा में लगे हमारे वीर सैनिकों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया, और वहां के युवाओं के द्वारा सैनिकों पर पत्थरबाजी उनकी एक आदत सी बन गई है। भारत की सरकारों ने अलग-अलग समय पर शांतिवार्ता, बातचीत के माध्यम से पाक से कई प्रयास किए गए लेकिन नतीजे में मिला तो सिर्फ धोखा फिर बात चाहे कारगिल की हो या पठानकोट। न तो आतंक रूका न ही आतंकवादी विगत 30 वर्षों में हमारे 40 हजार से ज्यादा सैनिक शहीद हुए, लेकिन हमारे नेता राजनीति करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते और समय-समय पर अपनी ही पीठ थपथपाते भी रहते हैं। पहले आतंकवादी पाक में प्रशिक्षण प्राप्त कर चोरी छुपे घुसते थे। लेकिन अब उनने भी अपनी रणनीति बदलते हुए आई.एस.आई. एवं आतंकी संगठनों की घाटी में ही यहां के युवाओं को प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया ताकि दुनिया की नजरों से बचा जा सके। रहा सवाल सेना पर इनके हमलों का तो यह कोई नई बात नहीं है, विगत तीन वर्षों में ही पठानकोट, पंपोर, उरी, संजवान इसके ज्वलंत उदाहरण है।
अब वक्त आ गया है कश्मीर को ले हमें अर्थात भारत को अब कड़ा कदम अर्थात् धारा 370 एवं 35-ए को हटाने की पहल करना ही चाहिए। इसके लिए चाहे संसद की जरूरत पड़े, चाहे महामहिम राष्ट्रपति की पहले हम अपने घर में बढ़ती उदण्डता को भी ठीक करना होगा। तब हम आतंकियों को धोंस दे! हम सभी जानते है बिना स्थानीय नागरिकों की सहायता के आतंकी नहीं फल-फूल सकते हैं अब वक्त आ गया है जो भी अलगांववादी नेता है उन्हें पहले सबक सिखाएं। केन्द्र सरकार केवल विशेष दर्जा ही हटा ले बाकी का काम तो अन्य राज्यों की जनता ही कर लेगी।
निःसंदेह कश्मीर के नेताओं के बोल परोक्ष रूप से पाक परस्त ही है, वास्तव में इन पर देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए।
ये भी हैरत की ही बात है जो लोग बात-बात पर मानवाधिकार की दुहाई देते नहीं थकते एवं पत्थरबाजों के हिमायती है। पहले इन पर सर्जिकल स्ट्राइक होना चाहिए, फिर चाहे वह कोई भी नेता हो। भारत की एकता अखण्डता को तोड़ने की बात करने वाला ही वास्तव में देशद्रोही है। भाजपा केन्द्र में बहुमत में है भारत की जनता अभी देश भक्ति में डूबी हुई है सरकार जो भी कदम उठाए भारतीय जनता उनके पीछे है। यह एक सुनहरा मौका है अब चूके तो इतिहास भी कभी माफ नहीं करेगा। इसलिए मत चूकों चैहान।
13मार्च/ईएमएस