राष्ट्रीय

उत्तराखंड की 450 बसों के दिल्ली में प्रवेश पर लग सकता है प्रतिबंध

08/07/2019

देहरादून (ईएमएस)। दिल्ली सरकार उत्तराखंड समेत सभी पड़ोसी राज्यों की बसों की एंट्री पर बैन लगाने का विचार कर रही है। केजरीवाल सरकार के इस फैसले से उत्तराखंड और दिल्ली आने जाने वाली करीब 450 बसों के 30 हजार से ज्यादा यात्रियों के लिए परेशानी पैदा हो सकती है। दरअसल, उत्तराखंड रोडवेज का उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश पंजाब और चंडीगढ़ से परिवहन का करार हो चुका है, लेकिन अब तक दिल्ली और हरियाणा से करार नहीं हो पाया है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली परिवहन विभाग ने पहले चरण में रोडवेज बसों को और दूसरे चरण में ट्रकों पर भी प्रतिबंध की चेतावनी दी है। मामले को लेकर अब उत्तराखंड रोडवेज के अधिकारी, सरकार से बातचीत की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि कानूनन अंतरराज्यीय बस सेवा जारी रखने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होना जरूरी है। उन्होंने कहा दिल्ली सरकार सिर्फ नियम का पालन कर रही है। हमने पहले से ही उन पड़ोसी राज्यों को पत्र जारी कर दिए हैं, जो बिना एमओयू के बसें चला रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं के लिए भी एमओयू का होना जरूरी है।
मंत्री ने कहा अगर जल्द से जल्द एमओयू साइन नहीं हुए तो दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल पर उत्तराखंड की बसों पर रोक लगा दी जाएगी। दिल्ली सरकार का यह फैसला हजारों यात्रियों और रोडवेज कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। उत्तरांचल रोडवेज वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष अशोक चौधरी कहते हैं अगर सेवा प्रतिबंधित की गई तो न सिर्फ यात्रियों की परेशानी बढ़ेगी, बल्कि हमारे बिजनेस को भी नुकसान होगा। उत्तराखंड सरकार को इसे टालने के लिए एमओयू साइन कर देने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि रोजाना करीब 25-30 हजार लोग उत्तराखंड की रोडवेज बसों से दिल्ली आते-जाते हैं। अनुमान के अनुसार, करीब 450 बसें रोज दिल्ली से उत्तराखंड आती-जाती हैं। 50 बसें ऐसी हैं, जो दिल्ली से होकर गुजरती हैं। गढ़वाल मंडल की 250 और कुमाऊं मंडल की 150 बसें दिल्ली आती-जाती हैं। हालांकि उत्तराखंड रोडवेज के अधिकरी अब भी दिल्ली परिवहन विभाग का चेतावनी पत्र प्राप्त नहीं होने की बात कह रहे हैं। लेकिन उन्हें ऐसी सूचना मिली है। उत्तराखंड परिवहन विभाग का कहना है कि उन्होंने पिछले साल एमओयू प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन दिल्ली सरकार ने कोई रुचि नहीं दिखाई। उत्तराखंड परिवहन निगम के जनरल मैनेजर दीपक जैन ने कहा हालांकि हमें अब तक दिल्ली सरकार से कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन हम यह भी मानते हैं कि अंतरराज्यीय बस सेवाओं के लिए एक एमओयू आवश्यक है। हम उनसे औपचारिक संदेश प्राप्त करने के बाद फिर से प्रक्रिया शुरू करेंगे।
अनिरुद्ध, ईएमएस, 08 जुलाई 2019