लेख

क्या दोबारा भाजपा आने पर बंद हो जाएगी पेंशन ? (लेखक- जग मोहन ठाकन / ईएमएस)

14/04/2019

किसान कर्जा माफ़ी का नारा देकर वर्ष 2018 में तीन राज्यों --राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में जब से कांग्रेस ने जीत हासिल की है, सभी राजनैतिक पार्टियाँ किसान के कल्याण की घोषणायें करने में एक दूसरी से आगे आने की होड़ में लग गयी हैं।
भाजपा ने अपने इस पारी के अंतिम बजट में घोषणा की कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत पांच एकड़ तक के सभी छोटे और सीमान्त किसानों को प्रतिवर्ष छह हज़ार रूपए दिए जायेंगे।
बाद में राहुल गाँधी के पांच करोड़ गरीब परिवारों को न्यूनतम आय योजना के तहत प्रति परिवार प्रतिवर्ष 72000/ रूपए देने की घोषणा ने बीजेपी के गरीब परिवारों के वोट बैंक में सेंध लगाने के प्रयास को विफल कर दिया और भाजपा द्वारा गरीबों के वोट खींचने की आस पर पानी फेर दिया।
कांग्रेस के इस तीर को काटने के लिए भाजपा ने अपने ताज़ा जारी संकल्प पत्र में एक और तीर चलाया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत बिना भू सीमा के सभी किसानों को 6 हजार रुपये का लाभ मिलेगा।
केवल छोटे किसानों को ही मदद देने से छोटे किसान तो भाजपा से जुड़ेंगें या ना जुड़ेंगें यह तो वक्त बताएगा, परन्तु सभी किसानों को इस योजना के दायरे में न लेने से बड़े किसान अवश्य भाजपा से नाराज हो गए थे।
अब संकल्प पत्र में सभी किसानों को जोड़ने की घोषणा से भाजपा ने अपने विश्वसनीय वोट बैंक रहे बड़े किसानों को पुनः अपने से बांधे रखने का प्रयास किया है। परन्तु क्या तर्क ले रही है भाजपा अपने इस अचानक तब्दीली बारे ?
केंद्र में रेलवे एवं कोयला मंत्री, पियूष गोयल, जिन्होंने भाजपा की इस पारी का अंतिम बजट भी पेश किया था, ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में, जो 10 अप्रैल 2019 के अंक में प्रकाशित हुआ है, तर्क दिया है कि – “हमारे संज्ञान में एक जेन्युइन मामला आया कि देश के कई क्षेत्रों में बड़े किसान भी अतिवर्षा, सुखा या बाढ़ की मार से पीड़ित होते रहे हैं। बुन्देलखण्ड की भांति कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ किसान सूखे से प्रभावित हैं। सभी किसानों ने, चाहे वे छोटे हैं या बड़े, सामूहिक रूप से देश को खाद्यान्न तथा अन्य फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। इसलिए हमने सोचा कि सभी किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत कवर किया जाए। ”
फिर पांच एकड़ से अधिक वाले किसान बुढापा पेंशन से वंचित क्यों ?
भाजपा द्वारा जारी संकल्प पत्र में भाजपा ने घोषणा की है कि सभी छोटे और सीमांत किसानों को 60 साल के बाद पेंशन की सुविधा देंगे। हम देश में सभी सीमांत और छोटे किसानों के लिए पेंशन की योजना आरंभ करेंगे ताकि 60 वर्ष के बाद भी उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
यदि भाजपा के संकल्प पत्र को ही भाजपा की आगामी योजनाओं का संकेत माना जाये तो भाजपा तो केवल 60 वर्ष से अधिक आयु के केवल सीमांत और छोटे किसानों को ही बुढापा पेंशन देगी।
जब भाजपा के केन्द्रीय मंत्री पियूष गोयल प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना में बड़े किसानों को शामिल करने हेतु तर्क देते हैं कि छोटे या बड़े - सभी किसान अतिवर्षा, सुखा या बाढ़ 0की मार से पीड़ित होते हैं और सभी किसानों ने सामूहिक रूप से देश को खाद्यान्न तथा अन्य फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है, तो फिर किसानों को पेंशन देने में पांच एकड़ की सीमा क्यों लगाई जा रही है ?
क्यों नहीं पांच एकड़ से ऊपर वाले सभी किसानों को भी उनके देश की तरक्की में योगदान को देखते हुए बुढ़ापा पेंशन दी जाए ?
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं देश के उप प्रधानमंत्री दिवंगत चौधरी देवीलाल द्वारा हरियाणा में 1987 में शुरू की गयी 60 वर्ष से अधिक आयु वाले, न केवल किसान अपितु हरियाणा के हर नागरिक को बिना किसी व्यवसाय का भेदभाव किये अभी भी दी जा रही दो हज़ार रुपये प्रति माह सम्मान पेंशन की तर्ज पर देश के हर नागरिक को सम्मान पेंशन क्यों नहीं ?
अब प्रश्न उठता है कि क्या सारे देश में समान सिविल कोड लागु करने की हिमायती भाजपा अपने संकल्प पत्र को सारे देश में समान रूप से लागु करेगी ?
यदि हाँ, तो क्या भाजपा सारे देश में समरूपता लाते हुए केवल पांच एकड़ तक वाले किसानों को ही साठ वर्ष से अधिक आयु होने पर पेंशन देगी ? तो क्या हरियाणा में, जहाँ प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है, और जहाँ सभी किसान, बिना किसी भूमि सीमा रेखा के, बुढापा पेंशन ले रहे हैं, वहां भी केवल छोटे और सीमान्त यानि पांच एकड़ तक के किसानों को ही पेंशन मिलेगी ? तो क्या लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा में पांच एकड़ से अधिक वाले किसानो की बुढ़ापा पेंशन बंद कर दी जायेगी ? क्या भाजपा इतना कठोर कदम उठा पायेगी ? क्या भाजपा पहले से पीड़ित किसानों के आक्रोश को झेल पायेगी ? इन सवालों के उत्तर भाजपा पहले दे चुकी है। वर्ष 2004 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने कर्मचारी यूनियनों के आक्रोश की परवाह किये बिना मिलिटरी कर्मियों को छोड़कर पैरामिलिटरी फोर्सेज समेत सभी केन्द्रीय एवं राज्य कर्मचारियों की पेंशन बंद कर दी थी, जिसका खामियाजा कर्मचारी आज तक भुगत रहे हैं और बार बार पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठाते रहते हैं, परन्तु हाथी की चाल से मस्ती में चल रही भाजपा इसकी कोई परवाह नहीं कर रही है। और चले भी क्यों नहीं ? हमारे देश का वोटर मुद्दों को नहीं देखता, बल्कि जुमलों से प्रभावित होकर वोट देता है या जातिगत व धार्मिक आधार पर निर्णय कर भेडचाल में इ वी एम मशीन का बटन दबाता है, और इसी बटन के साथ ही दबा देता है अपना, देश का और प्रगति का गला। और फिर पांच साल तक मिमियाता रहता है बकरे की तरह अपनी ही कुर्बानी के इंतज़ार में, मात्र उस हरे घास की आस में जो वास्तविक नहीं है, अपितु आभासी है और सपने पाल पाल कर केवल हरी हो चुकी उसकी आँखों को हरी घास दिखाई देती है या दिखाई जाती है।
14अप्रैल/ईएमएस