लेख

(लघुकथा) शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि (लेखक- प्रो.शरद नारायण खरे / ईएमएस)

06/08/2022

15 अगस्त का अवसर था।नगर के युवाओं ने 'एक शाम शहीदों के नाम' के परिप्रेक्ष्य में कुछ करने का निर्णय लिया।फलस्वरूप एक बैठक आयोजित यह निश्चय करने के लिए की गई कि क्या किया जाए,कौन सा आयोजन उचित होगा।
बैठक में अनिल ने सुझाव दिया कि शहीदों के नाम पर एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाए।मयंक का सुझाव था कि देशभक्ति से भरपूर गीत-संगीत का प्रोग्राम रखा जाए।नीलांशु ने कहा कि क्रांतिकारियों व देशभक्तों पर आधारित फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता बच्चों के लिए रख ली जाए।पर वहां सबको पानी पिला रहे छोटू ने कहा,कि अगर आप लोग गुस्सा न करें,तो मैं कुछ कहूँ।इज़ाज़त पाकर डरते-डरते वह बोला कि,"मैं सोचता हूं कि जो भी रुपया आप लोग इस प्रोग्राम पर खर्च कर रहे हो,अगर वही रुपया बॉर्डर पर अपने इलाके के शहीद हुए सैनिकों के घरवालों को 15 अगस्त की पूर्व शाम जाकर हम दें,और शहीद के माता-पिता का फूल माला से सम्मान करें,तो अधिक अच्छा होगा।धनराशि शहीद हुए घरवालों के बहुत काम आएगी ।"
सबको छोटू की यह बात पसंद आ गई,और सबने यही करने का निर्णय लिया।उसके बात सब तैयारी में भिड़ गए,और 14 अगस्त की शाम को उन युवाओं ने तीन ग्रुप बनाकर अलग-अलग इलाके के तीनों शहीदों के गांव जाकर उनके माता-पिता का सम्मान किया, तथा उनके घरवालों को सम्मान-राशि भेंट की।
सारे इलाके ने इन युवाओं की अच्छी सोच व उनके काम की जी भरकर तारीफ की।सच,में एक शाम शहीदों के नाम हो तो ऐसी।
ईएमएस / 06 अगस्त 22