लेख

चुनावी मौसम में छापों की बहार (लेखक -अजित वर्मा / ईएमएस)

15/04/2019

चुनावी मौसम में चुनाव प्रचार का अभियान चरम पर है। इसी चुनावी मौसम में आयकर विभाग के छापें की बहार आ गयी है। इन छापों की वजह से सियासी राजनीति भी गरमा गयी है। छापों को लेकर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर भी जारी है। कुछ माह पूर्व बंगाल में आयकर के छापों को लेकर ऐसा माहौल बना था कि बंगाल सरकार और जांच एजेंसियां आमने-सामने आ गये थे।
अभी हाल ही में मध्यप्रदेश भी आयकर के छापों की वजह से चर्चाओं में आ गया। मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों के यहां गोवा, कलकत्ता, इंदौर, भोपाल और दिल्ली में आयकर विभाग ने एक साथ छापों की बड़ी कार्यवाही की। इन छापों से प्रदेश की राजनीति में उफान आ गया है। सीधे तौर पर मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी आमने-सामने आ गये। कमलनाथ ने कहा कि चुनाव में भाजपा को अपनी हार साफ दिख रही है। इसलिये विरोधियों के खिलाफ ऐसे हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दावा करते हैं कि बरामद पैसा भ्रष्टाचार का है। उनका यह भी कहना है कि आयकर छापे की कार्यवाही विभाग के सबूत के आधार पर कर रहा है। पुलिस हस्तक्षेप से पश्चिम बंगाल जैसे हालात बनाने की कोशिश की जा रही है। पिछले 100 दिनों में जो हुआ उसी का परिणाम है। अगर सब कुछ सही है तो किस बात का मुख्यमंत्री को डर सता रहा है।
वहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का आरोप हैं कि आज संवैधानिक संस्थाओं पर हमला बोला जा रहा है। संवैधानिक संस्थाएं भाजपा के अनुषांगिक संगठनों की तरह काम कर रही है। मोदी सरकार विपक्षी दलों को बदनाम करने के लिये प्रवर्तन निदेशालय तथा आयकर विभाग जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि चुनाव के दौरान आयकर की छापेमारी को लेकर चुनाव आयोग की खामोशी क्यें है। क्या आयोग से अनुमति की आयकर विभाग को आवश्यकता है या नहीं। सबसे बड़ा सवाल तो छापों के समय को लेकर है। यह आरोप लग रहा है कि चुनाव के समय ही छापे क्यों।
राजनेताओं पर छापों की फेहरिस्त लंबी है। पहले आंध के मुख्यमंत्री चंद्राबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमार स्वामी, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी, यू पी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी छापों की कार्यवाही के शिकार हो चुके हैं। इसलिये ये आरोप लगना स्वाभाविक है कि राजनैतिक बदले की भावना से छापों की कार्यवाही की जा रही है। अब पूर्व केन्द्रीय वित्तमंत्री पी.िचदंबरम ने भी कहा है कि उनके आवास पर भी आयकर के छापे की कार्यवाही की जा सकती है। चिदंबरम कहते हैं कि आयकर विभाग उनके संसदीय क्षेत्र शिवगंगा और चेन्नई स्थित उनके आवास पर आयकर विभाग छापा मार सकता है। इनका इरादा चुनाव अभियान को कमजोर करना है। चिदंबरम दावा करते हैं कि लोग इस सरकार की ज्यादतियों को देख रहे हैं और वह चुनाव में इसे उचित सबक सिखायेंगे।
15अप्रैल/ईएमएस