लेख

दो प्राथमिकताएं: सीमा पर चौकसी और खुफिया तंत्र की मजबूती (लेखक-अजित वर्मा/ईएमएस)

30/11/2018

एक ओर जहाँ जम्मू और काश्मीर में आये दिन आतंकवादी घटनाएं हो रही हैं, आतंकी मारे जा रहे हैं, सैनिक शहीद हो रहे हैं, सीमापार से पाकिस्तानी सेना आये दिन फायरिंग कर रही हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में नक्सली गिरोह वारदातें कर रहे हैं। इस सब के बीच हाल ही पंजाब में अमृतसर के एक धार्मिक डेरे पर हुए ग्रेनेड अटैक ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान एक बार फिर पंजाब में आतंकवाद भड़काने की साजिशें कर रहा है। इस हमले की जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियों ने जांच में पाया है कि इस हमले में जिस ग्रेनेड का नकाबपोश हमलावरों ने इस्तेमाल किया था, वह एचई-36 सीरीज का है। इसतरह के ग्रेनेड पाकिस्तानी फौज इस्तेमाल करती है। यह एक हैंड ग्रेनेड है जो फेंके जाने के बाद धुआं छोड़ता है और इसके बाद जोरदार धमाका होता है।
इस हमले में 3 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हैं। आशंका यह भी है कि इस हमले के पीछे किसी नये आतंकी संगठन का हाथ भी हो सकता है।
कुछ दिन पहले ही पंजाब में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के दाखिल होने की और अल-कायदा कमांडर जाकिर मूसा की गतिविधियों का भी इनपुट मिला था। मूसा के अमृतसर में देख जाने के बाद पंजाब पुलिस ने उसके पोस्टर भी जारी किए थे और नवंबर की शुरुआत में मिली इंटेलिजेंस रिपोर्ट ने कश्मीर घाटी में जाकिर और हिज्बुल के मिलकर हमला करने की योजना से संबंधित इनपुट दिया था। क्योंकि हिज्बुल के आतंकी जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में देखे गए थे।
देश की सीमाओं पर और देश के अन्दर जो कुछ हो रहा है, उसे देखते हुए हम मानते हैं कि देश के सामने दो प्राथमिकताएं हैं। एक तो यह कि सीमा की चौकसी और सुरक्षा इतनी अभेद्य हो कि कोई आतंकी, कोई घुसपैठिया, कोई नशे का तस्कर कश्मीर, पंजाब के रास्ते देश में घुस न पाये और न देश की राजधानी दिल्ली या किन्हीं भी राज्यों के शहरों तक पहुँच न सके। दूसरी यह कि खुफिया तंत्र बेहद सक्षम, कुशल, तकनीकी क्षमताओं से सम्पन्न चुस्त, फुर्तीला, अचूक बनाया जाए। पत्ता भी खड़के तो हमारी खुफिया एजेन्सियों को पहले पता चल जाना चाहिए। देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में,देश के अन्दरूनी संवेदनशील क्षेत्रों में और भारत से जिनके हित या स्वार्थ जुड़े हैं ऐसे अन्य देशों में हमारा खुफिया संजाल व्यापक और चुस्त दुरुस्त होना ही चाहिए।
30नवंबर/ईएमएस