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(इन्दौर) जीवन के दो अनमोल तत्व - वंदन और चंदन -

06/12/2018

:: छत्रीबाग रामद्वारा पर जगदगुरू रामदयाल महाराज के आशीर्वचन - भक्ति सत्संग में उमड़ा भक्तों का सैलाब ::
इन्दौर (ईएमएस)। संसार और समाज में अर्चन कम, अड़चन ज्यादा है। आजकल जहां देखो वहां अड़चन ही अड़चन है। वंदन और चंदन जीवन के अनमोल तत्व हैं। भारतीय संस्कृति ने हमेशा हमें झुकना सिखाया है। चरणों की अर्चना सबसे महत्वपूर्ण होती है। भक्ति अहंकार नहीं, विनम्रता से ही हो सकती है। भगवान का वंदन, पूजन, ध्यान, स्नान, वस्त्रादि एवं चर्चा अर्चना भक्ति के ही विभिन्न स्वरूप हैं। भक्ति से यश, धन, बल और बुद्धि बढ़ते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के आचार्य जगदगुरू स्वामी रामदयाल महाराज ने आज छत्रीबाग रामद्वारा पर चल रहे भक्ति सत्संग की महती धर्मसभा को संबोधित करते हुए उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। संप्रदाय के मूलाचार्य स्वामी रामचरण महाराज के त्रिशताब्दी जन्म महोत्सव के उपलक्ष्य में चल रहे इस सत्संग में प्र्रतिदिन भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। सत्संग का शुभारंभ ट्रस्ट के रामसहाय विजयवर्गीय, गिरधर गोपाल नीमा, रामनिवास मोढ़, लक्ष्मीकुमार मुछाल, सुरेश काकाणी आदि द्वारा आचार्यश्री के स्वागत से हुआ। प्रारंभ में संत रामस्वरूप रामस्नेही बेगूवाले ने वाणीजी का पाठ किया। सत्संग में देश के विभिन्न रामद्वारों से आए संत भी उपस्थित थे। ट्रस्ट के रामसहाय विजयवर्गीय ने बताया कि रामद्वारा पर 9 दिसंबर तक प्रतिदिन प्रातः 7.30 बजे से वाणीजी का पाठ, 8.30 से 9.45 तक आचार्यश्री एवं अन्य संतों के प्रवचन तथा प्रतिदिन सूर्यास्त के समय संध्या आरती का क्रम चलेगा।
आचार्यश्री ने स्वामी रामचरण महाराज का पुण्य स्मरण करते हुए नवधा भक्ति की व्याख्या के दौरान कहा कि दो पैर वाला भी मंदिर, साधु-संत और तीर्थ के दर्शन करते हुए भी बिना प्रणाम किए चला जाए तो दो और चार पैर वाले में क्या अंतर रह जाता है। अर्चना सबको करना चाहिए। अर्चना भक्ति का सबसे सरल साधन है। केवल आरती और दर्शन कर लेने से ही भक्ति पूरी नहीं हो जाती। जीव का धर्म है करूणा और शिव का धर्म है कृपा करना। कृपा और करूणा का समन्वय ही भक्ति की सार्थकता का संकेत है। जैसे गुलाब जामुन को किसी भी दिशा से चखेंगे तो मीठा ही लगेगा, वैसे ही भक्ति का रस माधुर्य भी कभी भी, कहीं भी, कैसे भी व्यक्त करेंगे, मधुर फल की अनुभूति ही मिलेगी।
उमेश/पीएम/6 दिसम्बर 2018

संलग्न चित्र - अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के आचार्य जगदगुरू स्वामी रामदयालजी महाराज भक्तों के सैलाब को संबोधित करते हुए।