लेख

(विचार-मंथन) चीन की निकली हेकड़ी (लेखक-सिद्वार्थ शंकर/ईएमएस)

07/10/2019


चीन की मंशा जगजाहिर है। भारत को परेशान करो और मौज करो। इसके लिए वह कभी पाक को उकसाता है तो कभी खुद भी सीमा पर आकर गड़बड़ी फैलाता रहता है। सीमा पर चीन के सैनिकों की हमारे सैनिकों के साथ झड़प की खबरें कई बार आ चुकी हैं। डोकलाम में सीमा विवाद किसे याद नहीं है। चीन कभी हमें 1962 की याद दिलाता है तो कभी अपने हथियारों की नुमाइश कर डराने की कोशिश करता है। भारत की मंशा पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते मधुर बनाने की है। इसीलिए पूववर्ती सरकारों से लेकर मोदी सरकार तक ने काफी जतन किए। खूब आवभगत भी की, मगर चीन की ऐंठन कम नहीं हुई। अब चीन से लगी सीमा पर जब भारत ने अपनी सामरिक ताकत को और बेहतर बनाने का काम किया तो चीन को इसमें भी दिक्कत नजर आने लगी है। बता दें कि भारतीय सेना ने 14 हजार फुट की ऊंचाई पर अरुणाचल प्रदेश में चीन के खिलाफ नई युद्ध रणनीति का अभ्यास कर रही है। अरुणाचल प्रदेश में यह भारतीय सेना का सबसे बड़ा पहाड़ी युद्धाभ्यास है, जिसको हिम विजय नाम दिया गया है।
भारतीय सेना के इस युद्धाभ्यास से चीन की नींद उड़ गई है और उसने इसका विरोध किया है। पूर्वोत्तर राज्य में भारतीय सेना की इस तरह की यह पहली कवायद है। इस युद्धाभ्यास ने चीन को बेचैन कर दिया है। भारतीय सेना का यह युद्धाभ्यास वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से 100 किलोमीटर दूर 14 हजार फुट की ऊंचाई पर हो रहा रहा है। यह युद्धाभ्यास तीन समूहों में किया जा रहा है। प्रत्येक समूह में चार हजार सैनिक शामिल हैं। भारतीय सेना का यह युद्धाभ्यास उस समय किया जा रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक बैठक के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत का दौरा करने वाले हैं। इस युद्धाभ्यास को लेकर चीन का विरोध इसलिए है क्योंकि वह अरुणाचल प्रदेश के एक बड़े हिस्से को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है, लेकिन भारत उसके इस दावे को सिरे से खारिज करता आ रहा है। चीन अपने दावे को लेकर ही सेना के युद्धाभ्यास का विरोध कर रहा है। हालांकि इसके पीछेे की असली वजह यह है कि इस युद्धाभ्यास ने चीन की नींद उड़ा दी है।
इससे पहले भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच डोकलाम में गतिरोध देखने को मिला था। यह सैन्य गतिरोध करीब 72 दिन तक चला था। हालांकि बाद में चीन को मुंह की खानी पड़ी थी और पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा था। भारत और चीन के बीच समय-समय पर दिखने वाली तनातनी आज की नहीं है। 1962 की जंग के बाद से ही चीन की मंशा भारत पर हावी होने की रही है। वहीं भारत इस दौरान अपनी ताकत बढ़ता चला गया। दिखावे के लिए चीन जो भी कहे, मगर उसे यह पता है कि भारत अब 1962 वाला देश नहीं रहा। अगर वह कोई भी हिमाकत करेगा, तो उसे मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। इसीलिए वह इस युद्धाभ्यास को लेकर आपत्ति जता रहा है।
इतना ही नहीं सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने सेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम डोकला बेस तक सड़क का निर्माण किया है। भीम बेस से जोडऩे वाली इस सड़क के बनने से सिक्किम के निकट दोकलम तक पहुंचने में अब 40 मिनट से ज्यादा का वक्त नहीं लगेगा। तारकोल से बनी यह सड़क हर मौसम में काम करेगी और इस पर कितना भी वजन ले जाया जा सकेगा। साल 2017 में डोकलम में सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) आमने-सामने आ गई और यह विवाद 73 दिन तक चलता रहा था। उस समय डोकला बेस तक पहुंचने के लिए सेना को सात घंटे का वक्त लगा था क्योंकि तब यह रास्ता केवल खच्चरों के लिए ही था। बीआरओ की योजना फ्लैग हिल-डोकला मार्ग पर मार्च 2021 तक वाहनों के चलने योग्य सड़क बनाने की है। उन्होंने बताया कि अभी डोकला भारत से त्रि जंक्शन-भीम बेस-दोकला मार्ग के जरिए जुड़ा हुआ है, इसे 2018 में पूरा किया गया था। अब फ्लैग हिल से सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया गया है। इन सड़कों के जरिए सेना के संवेदनशील इलाकों तक पहुंचने में आसानी होगी। 33.80 किलोमीटर लंबे फ्लैग हिल-दोकला सड़क का निर्माण चल रहा है। यह काम पूरा होने के बाद निश्चित तौर पर भारत की ताकत बढ़ेगी और चीन की हेकड़ी कम होगी।
07अक्टूबर/एसएस/ईएमएस