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(विचार-मंथन) भारत में राफेल (लेखक-सिद्घार्थ शंकर / ईएमएस)

09/10/2019


हिंदुस्तान को फ्रांंसीसी लड़ाकू विमान 'राफेल' मिल गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राफेल विमान को रिसीव किया। रक्षा मंत्री ने इससे पहले शस्त्र पूजा भी की। राफेल मिलने के साथ ही वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ गई है। पहले राफेल विमान आरबी-01 को एयर मार्शल वीआर चौधरी की अगुवाई में एयरफोर्स ऑफिसर की टीम ने फ्रांस से रिसीव किया। आरबी-01 को एयरफोर्स चीफ एयर मार्शल आरकेएस भदौरिया के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने फ्रांस से राफेल की डील करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। भारत आज उन चार देशों की कतार में शामिल हो गया है, जिनके पास राफेल हैं। भारत से पहले राफेल फ्रांस, मिस्र और कतर के पास था। फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल 4.5वीं पीढ़ी का विमान है जिसमें रडार से बच निकलने की ताकत है। इससे भारतीय वायुसेना में आमूलचूल बदलाव होगा क्योंकि वायुसेना के पास अब तक के विमान मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई या तो तीसरी पीढ़ी या चौथी पीढ़ी के विमान हैं।
फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल 4.5वीं पीढ़ी का विमान है जिसमें रडार से बच निकलने की ताकत है। इससे भारतीय वायुसेना में आमूलचूल बदलाव होगा क्योंकि वायुसेना के पास अब तक के विमान मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई या तो तीसरी पीढ़ी या चौथी पीढ़ी के विमान हैं। इस विमान के भारत आने के बाद न सिर्फ पाक बल्कि चीन भी भारत की तरफ आंख उठाकर नहीं देख पाएगा। 87 साल, देश और विदेश में 12 बड़े युद्धों में अद्भुत पराक्रम। ये जब उठते हैं तो आसमान का सीना चीरकर रख देते हैं। जमीन के करीब से निकल जाएं तो पाताल तक आवाज गूंज जाती है। ये है हमारी भारतीय वायुसेना। 1932 से लेकर पाक के बालाकोट में जाकर एयरस्ट्राइक तक, हर बार हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा उठा है। हर बार देश के लोगों ने वायुसेना और उसके हवाई लड़ाकों का अभिनंदन किया है। बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जब अभिनंदन ने मिग-21 से पाक के अत्याधुनिक एफ-16 फाइटर जेट को मार गिराया, तब एक बार फिर पूरे देश का सिर फख्र से ऊंचा उठ गया।
उस समय बात उठी कि राफेल होता तो पाकिस्तान के एफ-16 की इतनी भी हिम्मत न होती कि वो हमारे आकाश को भेद सके। भेद तो वैसे भी नहीं पाया क्योंकि उसकी कायरता का करारा जवाब अभिनंदन ने बहादुरी से दिया था। भारतीय राफेल फाइटर जेट परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम सेमी-स्टेल्थ लड़ाकू विमान हैं जबकि, इस पाक के एफ-16 लड़ाकू विमानों में यह सुविधा नहीं है, लेकिन भारत किसी मौके पर युद्ध के समय सुखोई-30 एमकेआई और राफेल को एकसाथ आसमान में उतार दे तो पाकिस्तान को छठी का दूध याद आ जाएगा। राफेल के डैनों की लंबाई 10.90 मीटर है। वहीं, एफ-16 के डैनों की लंबाई 9.96 मीटर है। राफेल की लंबाई 15.30 मीटर जबकि एफ-16 की 15.06 है। आकार में राफेल, एफ-16 से थोड़ा बड़ा है। राफेल का कुल वजन 10 टन है। वह 24.5 टन वजन के हथियार लेकर उड़ सकता है, जबकि, पाकिस्तानी एफ-16 का वजन 9.2 टन है। यह सिर्फ 21.7 टन वजन लेकर उडऩे की क्षमता रखता है।
एफ-16 की रेंज 4220 किलोमीटर है, जबकि राफेल की 3700 किलोमीटर है। यानी एक उड़ान में यह इतनी दूरी तक जाकर हमला कर सकता है। ठीक इसी तरह एफ-16 की गति राफेल से ज्यादा है। एफ-16 2414 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है तो राफेल 2230 किमी प्रति घंटा की गति से। सर्विस सीलिंग दोनों की 50 हजार फीट ही है, लेकिन राडार में राफेल पकड़ में नहीं आएगा, क्योंकि यह सेमी-स्टेल्थ है जबकि, एफ-16 के साथ ऐसा नहीं है।
भारतीय राफेल 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट है, जबकि, पाकिस्तान के एफ-16 चौथी जेनरेशन का लड़ाकू विमान है। दोनों के हथियारों की अलग-अलग क्षमता है। कोई किसी से कम नहीं है लेकिन कौन सा फाइटर जेट ज्यादा दमदार है यह निर्भर करता है उसे उड़ाने वाले पायलट पर। इसका ताजा उदाहरण है अभिनंदन ने मिग-21 बाइसन से पाकिस्तानी एफ-16 को मार गिराया था। हालांकि, भारत का कोई भी शस्त्र किसी देश के खिलाफ आज तक नहीं उठा है। भारत ने हमेशा या तो पलटवार किया है या अपना फिर बचाव किया है।
लड़ाकू विमान राफेल आने के बाद भारत दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय भूराजनीति में ताकतवर बनकर उभरेगा। ऐसा रक्षा विशेषज्ञों का मानना है, हालांकि, हवाई क्षेत्र में चीन की ताकत का मुकाबला करने में अभी काफी वक्त लगेगा। गौरतलब है कि सितंबर 2016 को भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमान खरीदने की फाइनल सौदे पर दस्तखत हुए थे। इन विमानों की कीमत 7.87 बिलियन यूरो रखी गई थी। बता दें कि राफेल सौदे पर लोकसभा चुनाव से पहले भारत में खूब सियासत भी देखने को मिली थी।
राफेल दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है जिसका निर्माण दसाल्ट नाम की एक फ्रांसीसी कंपनी ने किया है। इसमें मिटिऑर और स्काल्प मिसाइलें तैनात हैं, जिनकी वजह से ये भारत को हवा से हवा में मार करने की अद्भुत क्षमता देंगी। कह सकते हैं कि ये दोनों मिसाइलें राफेल का यूएसपी हैं। राफेल एक ऐसा लड़ाकू विमान है जिसे हर तरह के मिशन पर भेजा जा सकता है। भारतीय वायुसेना की इस पर काफी वक्त से नजर थी। यह एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसकी फ्यूल कपैसिटी 17 हजार किलोग्राम है। चूंकि राफेल जेट हर तरह के मौसम में एक साथ कई काम करने में सक्षम है, इसलिए इसे मल्टिरोल फाइटर एयरक्राफ्ट के नाम से भी जाना जाता है। इसमें स्काल्प मिसाइल है जो हवा से जमीन पर वार करने में सक्षम है। राफेल की मारक क्षमता 3700 किलोमीटर तक है, जबकि स्काल्प की रेंज 300 किलोमीटर है। विमान में फ्यूल क्षमता- 17,000 किलोग्राम है। यह ऐंटी शिप अटैक से लेकर परमाणु अटैक, क्लोज एयर सपोर्ट और लेजर डायरेक्ट लॉन्ग रेंज मिसाइल अटैक में भी अव्वल है। यह 24,500 किलो तक का वजन ले जाने में सक्षम है और 60 घंटे की अतिरिक्त उड़ान भी भर सकता है। इसकी स्पीड 2,223 किलोमीटर प्रति घंटा है।
09अक्टूबर/ ईएमएस