लेख

(कविता) देशभक्ति का तराना (लेखक-प्रो.शरद नारायण खरे/ईएमएस)

14/08/2019


देशभक्ति का मधुर तराना,हम सब मिलकर गाएंगे ।
नवल जोश औ' नव उमंग से,लाल किले को धाएंगे ।।
मिटे अनगिनत वीर सिपाही,
तब यह दिन है आया
धवल सवेरा,आशाओं को,
संग ये अपने लाया
चिड़ियों जैसा हम चहकेंगे,फूलों-सा खिल जाएंगे ।
नवल जोश औ' नव उमंग से,लाल किले को धाएंगे ।।
माटी को माना था चंदन,
माथे तिलक लगाया
बलिदानों की गाथा लिखकर
इंकलाब दोहराया
इस जननी की लाज बचाने,हम सब भी मर जाएंगे ।
नवल जोश औ' नव उमंग से,लाल किले को धाएंगे ।।
इतिहासों में दर्ज़ भगतसिंह,
राजगुरू,सुखदेव
आज़ादी के मतवाले सब,
हैं देवों के देव
हम भी सीमाओं पर जाकर,दुश्मन पर चढ़ जाएंगे ।
नवल जोश औ' नव उमंग से,लाल किले को धाएंगे ।।
हम सब बेटे भारत मां के,
हैं मां के सब रक्षक,
जो भी आंख दिखाये उसको,
ना छोड़ें चूल्हे तक
वंदन करके भारत मां का,विजयगान दोहराएंगे ।
नवल जोश औ' नव उमंग से,लाल किले को धाएंगे ।।
14अगस्त/ईएमएस