लेख

जितना बजट, उतना ही कर्ज (लेखक- ओमप्रकाश मेहता / ईएमएस)

12/07/2019

मध्यप्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ पिछली शिवराज सरकार की ‘‘ऋणम् धृत्वा, घृतम् पीबेत’’ (कर्जा लो और घी पियो) की विरासत में मिली नीति से काफी परेशान है, यद्यपि उन्होंने अपनी सरकार का पहला बजट तो प्रस्तुत कर दिया, किंतु उन्हें इस बात का बेहद अफसोस रहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति और कर्ज की भारी मात्रा के कारण वे जनकल्याण व विकास की अपनी उम्मीदें पूरी नहीं कर पा रहे है, प्रदेश की जनता के प्रति सद्भावना का ताजा और सबसे अहम् उदाहरण तो यह है कि प्रदेश की विषम आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने अपने नए बजट में जनता के किसी भी वर्ग पर कोई कर का बोझ नहीं डाला और अपने सीमित बजट में ‘‘सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय’’ की ही बात की।
मध्यप्रदेश में पिछले पन्द्रह वर्षों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और इन पन्द्रह वर्षों में लगभग तेरह वर्ष शिवराज सिंह जी ही मुख्यमंत्री रहे, और उनका हर बजट प्रदेश की आर्थिक स्थिति का आईना सिद्ध हुआ, हर साल उन्हें कर्ज लेना पड़ा और वह कर्ज पन्द्रह साल में डेढ़ लाख हजार करोड़ तक पहुंच गया, इसके बाद जब सात माह पूर्व प्रदेश में कमलनाथ जी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी तो उसे पिछली सरकार से विरासत में डेढ़ लाख करोड़ का कर्ज भी मिला, अब कमलनाथ जी के सामने सबसे बड़ी परेशानी किसानों के कर्ज चुकाने का वादा और शिक्षित युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने की थी, जिस पर उन्होंने अपने तरीके से अमल किया। फिलहाल इस सरकार को केवल सात माह अर्थात् करीब दो सौ दिन का समय मिला है, इस बीच सरकार के सामने जनहित व जनकल्याण का बजट प्रस्तुत करने की अहम् जिम्मेदारी आ गई। अतः सरकार को बिना आगा-पीछे सोचे ऐसा बजट प्रस्तुत करने को अघत होना पड़ा जो सरकार के लिए आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला था, फिर भी इस बजट की सबसे अहम् बात तो यह कि बिना कोई नया कर थोपे सरकार ने जनता के हर वर्ग के कल्याण व उनकी मुसीबतें हल करने का विशेष ध्यान रखा, खासकर किसानों व युवाओं का। किसानों का कृषि बजट में जहां 66 फीसदी की वृद्धि कर उसे 46 हजार 559 करोड़ का कर दिया गया वहीं किसानों की कर्ज माफी के लिए आठ हजार करोड़ की राशि सुरक्षित रखी गई। साथ ही प्रदेश में स्थापित होने वाले उद्योगों में प्रदेश के शिक्षित बेरोजगारों से सत्तर फीसदी नौकरियां देने का भी सख्त आदेश पारित कर दिया गया। बजट में ग्रामीण विकास हेतु 17,186 करोड़ स्कूली शिक्षा के लिए 24,499 करोड़ राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु उसकी बजट राशि में 32 फीसदी की वृद्धि। इस प्रकार कुल दो लाख चैदह हजार 85 करोड़ का राज्य का नया बजट प्रस्तुत किया गया। वह भी तब जक केन्द्र की मोदी सरकार ने प्रदेश के हिस्से के 2,700 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान नहीं किया।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौति बिना किसी विशेष आय के प्रदेश के सपनों में रंग भरना है, इसके लिए सरकार ने सामाजिक कुरीतियों से जुड़ी एश-ओ-आराम की वस्तुओं पर अधिभार लगाकर पैसा जुटाने का रास्ता खोजा है, जिसमें सबसे पहले क्रम पर शराब है, इसकी एक्साईज ड्यूटी से 3,500 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है, इसके बाद स्टाॅम्प ड्यूटी के तहत प्राॅपर्टी रजिस्ट्री शुल्क दो फीसदी बढ़ा दिया, इससे बारह सौ करोड़ की अतिरिक्त आय होगी। इसी तरह यात्री वाहनों के प्रति सीट लिए जाने वाले टेक्स में वृद्धि कर उससे तीन हजार करोड़ की आय का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जो अभी तक 2,691 करोड़ था। इसी तरह ईंधन (पेट्रोल-डीजल) माईनिंग (खनिज) आदि के माध्यमों से भी सरकार का आर्थिक बोझ कम करने का प्रयास किया गया। ये सब तो आर्थिक संसाधन खोजे गए पर सरकार ने अपने प्रयासों से प्रदेश के आम गरीब व मध्यम वर्ग के साथ किसान व युवा महिला वर्ग की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। यद्यपि इतने सब प्रयासों के बावजूद एक वर्ष में प्रदेश सरकार पर 28 हजार करोड़ रूपए का कर्ज बढ़ जाने का अनुमान है, किंतु सरकार का भी यह मजबूरीपूर्ण दायित्व है कि वह अपनी असुविधाओं को नजर अंदाज कर प्रदेशवासियों के कल्याण व विकास का विशेष ध्यान रखे, वही कमलनाथ सरकार करने जा रही है, इस सरकार के दिल में उम्मीदें तो अनंत है, किंतु झोली खाली होने से वह असहाय भी है। केन्द्र में अपने दल की सरकार नहीं होना भी राज्य सरकार की सबसे बड़ी चुनौति होती है।
12जुलाई/ईएमएस