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पुण्य तिथि (११ जनवरी पर विशेष)जय जवान जय किसान का नारा बुलंद करने वाले शास्त्री (लेखक- डॉक्टर अरविन्द जैन / ईएमएस)

10/01/2019

इतिहास में कुछ महान पुरुष होते हैं जो कम समय तक पद पर रहते हुए अनंत समय तक यादों में बसे रहते हैं। कुछ ऐसी यादगार पारी खेल जाते हैं जो समाज और देश को आंदोलित करती रहती हैं। देश जब भीषण अन्न की कमी से जूझ रहा था और अमरीका द्वारा प्रतिबन्ध लगाया गया तब देश के स्वाभिमान के लिए एक दिन का एक समय का उपवास द्वारा अन्न बचायो आंदोलन का सूत्रपात्र किया जिसको पूरे देश ने दलगत राजनीती से ऊपर उठाकर सबने अपनाया और अन्न क्रांति की शुरुआत की जिससे हरित क्रांति नाम दिया गया। जिस समय हम अन्न के लिए दूसरों पर आश्रित थे उस समय स्वावलम्बन कापाठ पढ़ाया जो बहुत सफल और चर्चित रहा।
नेहरू जी के निधन के बाद यह प्रश्न उठा था की नेहरू के बाद कौन ?उस समय बहुत नाम चर्चा में रहे पर कांग्रेस पार्टी ने बहुमत से उनका नाम का प्रस्ताव पारित कर देश का प्रधान मंत्री बनाया, उस समय चीन के युध्य के बाद की स्थिति बहुत दयनीय थी और उसी के कारण पाकिस्तान ने देश पर आक्रमण किया जिसका मुँह तोड़ जबाव दिया गया। जीतने बाद के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच समझौता रशिया के ताशकंद में १० जनवरी १९६६ को समझौता होने के बाद उनकी संदिग्ध अवस्था में मृत्यु हुई जिसका आज तक कोई निर्णय नहीं हो पाया
जय जवान जय किसान का नारा देकर उनके द्वारा जो ऊर्जा दी गयी वह आज भी जीवंत हैं। उनका जन्म २ओक्टोबर १९०४ को बनारस के पास रामनगर में हुआ था। उनके पिता जी श्री शारदा प्रसाद श्रीवास्तव जो शिक्षक थे बाद में वे क्लर्क हुए। आपने बहुत आभाव में अपना जीवन यापन कर शिक्षा प्राप्त कर वर्ष १९२० में महात्मा गाँधी के आंदोलन से जुड़ा कर अनेको बार जेल गए और पार्टी के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहकर नेहरू और गाँधी के विश्वास पात्र रहे। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाग लेकर केंद्र में गृह मंत्री और रेल मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहकर काम किया। एक बार रेल दुर्घटना होने पर घटना की जिम्मेदारी लेकर अपने पद से स्तीफा दिया।
आप सादगी की प्रतिमूर्ति थे तथा उन्होंने कभी भी सत्ता के लाभ को अपना साधन नहीं माना उन्होंने नेहरू जी के साथ रहकर उनके विश्वासपात्र होने से उनको प्रधान मंत्री का पद मिला। उन्होंने सरकरी सुविधायों का कोई दुरूपयोग नहीं किया। तथा वे पक्ष और विपक्ष के बड़े सम्मानीय रहे, उन्होंने कोई भी विवाद को अपने ऊपर छाने नहीं दिया। उनका कद छोटा था पर कद से कई गुना बढ़कर उन्होंने काम किया।
उन्होंने अपने पद का कभी भी दुरूपयोग नहीं किया और उसका उदहारण उन्होंने एप अच्छा को कोई भी पद का लाभ नहीं दिलाया। सादगी और ईमानदारी उनमे कूट कूट कर भरी थी। आज भी जब हम उनकी ५४ वी पुण्य तिथि मना रहे हैं उनकी यादे आज भी पूरे देश में सभी वर्गों के साथ उतनी आत्मीयता से याद करते हैं।
कम समय तक देश के प्रधान मंत्री होते हुए देश को बहुत उंचाईओं तक पहुंचाया और १९६५ के युध्य में उन्होंने विजय प्राप्त कर देश को गौरव प्रदान कराया। उनकी मृत्यु निःसंदेह बहुत दुखद रही पर उनका योगदान अद्वतीय अविस्मरणीय रहा, उनकी पुण्य तिथि पर देश- वसीय उन्हें कोटि कोटि नमन करते हैं। जय जवान जय किसान का नारा दिग्दिगंत रहेगा।
10जनवरी/ईएमएस