लेख

(विचार-मंथन) मतदाता की दु:खती रग पकड़ आमचुनाव तक जाएगी कांग्रेस? (लेखक- डॉ हिदायत अहमद खान /ईएमएस)

30/11/2018

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जहां मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो चुका है तो वहीं राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होना शेष है। ऐसे में प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने अपने-अपने चुनावी घोषणा-पत्र जारी कर मतदाताओं को रिझाने का भरसक प्रयास किया है। कांग्रेस से पहले भाजपा ने 28 नवंबर को अपना घोषणा पत्र जारी करते हुए प्रदेशवासियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि उनका जीवन बेहतर बनाने के लिए और बेहतर काम किया जाएगा। यहां मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने दावा किया कि पिछले घोषणा पत्र के 95 फीसद वादे पूरे किए जा चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष आरोप लगा रहा है कि प्रदेश में विकास कार्य हुए ही नहीं, फिर सरकार यह दावा कैसे कर सकती है कि वादे पूरे किए जा चुके हैं। आमजन परेशान है, बेरोजगारी बढ़ी है, जिससे युवाओं में भटकाव देखा जा रहा है, किसान त्रस्त हैं और कर्जदार किसानों की हालत तो बद से बदतर हो चली है। ऐसे में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में जहां बेरोजगारों को रोजगार भत्ता देने की बात कही तो वहीं कांग्रेस ने फिर आरोप लगाया कि युवाओं से जो वादा कुछ माह पहले कांग्रेस ने किया उसी की नकल अब भाजपा करती दिखी है। मतलब साफ है कि कांग्रेस जानती है कि इस समय बेरोजगार युवाओं और किसानों व आमजन को क्या चाहिए और किन मुद्दों को आगे रख कर चुनाव लड़ा जाना चाहिए ताकि जीत का फार्मूला कारगर साबित हो सके। अत: भाजपा भी उसी लीक पर चलती दिख रही है, लेकिन विचारणीय यही है कि जब सरकार में रहते हुए भाजपा कुछ नहीं कर पाई तो आगे वह और बेहतर करने की बात कैसे कर सकती है। इसी बात को लेकर कांग्रेस उसे चुनावी मैदान में घेरने का काम कर रही है। जहां तक चुनावी घोषणा पत्र का सवाल है तो कांग्रेस का कहना है कि यदि वह सरकार में आती है तो फिर प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवा को 3500 रुपए प्रतिमाह तक बेरोजगारी भत्ता देगी, वहीं भाजपा कहती है कि 21 साल से ज्यादा उम्र के शिक्षित बेरोजगारों को 5 हजार रुपए प्रतिमाह का बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। मतलब अब होड़ लगी है कि कौन किसे कितना देने जा रहा है। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लेने वाले बेरोजगारों के लिए भी तरह-तरह के वादे किए जा रहे हैं। फ्री आने-जाने से लेकर डिस्काउन्ट वाउचर जारी करने तक की बातें की जा रही हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस समझ चुकी है कि जिस युवा को भ्रमित करके केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में एनडीए सफल रही यदि उसी आधार पर इन राज्यों की नब्ज टटोली जाए तो ज्यादा बेहतर होगा। दरअसल मोदी सरकार आने के बाद से युवाओं के लिए वो रोजगार के अवसर प्रदान नहीं किए जा सके हैं जिनकी बातें बढ़-चढ़कर की गईं थीं। इसी प्रकार किसानों को केंद्र में रखकर भी ये पार्टियां बातें कर रही हैं। कांग्रेस ने तो चुनाव जीतने और सरकार बनने के महज दस दिन में कर्ज माफी की बात करके बड़ा दांव खेला हुआ है। इसी के साथ किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने की भी बात बहुतायत में हुई है। अब देखना यह होगा कि जो बात पहले भाजपा कर रही थी अब वही बात कांग्रेस ने की है और पूरे दावे के साथ कह रही है कि यदि उसकी सरकार बनती है तो ये वादे नहीं बल्कि वचन साबित होने वाले हैं। इस प्रकार कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस ने इन राज्यों में जनता की दु:खती रग को पकड़ने में सफलता हासिल कर ली है। अब यदि इनके माध्यम से कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल हो जाती है तो इसे ही आगे बढ़ाते हुए वह आम चुनाव में भी उतरने की तैयारी कर सकती है। यहां देखने वाली बात यह है कि आखिर मतदाता क्या सोचता है, क्योंकि फैसला तो उसे ही करना है। इस संबंध में नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक के कड़े फैसलों में मोदी सरकार के साथ खड़े होने वाले भाजपा के पक्के समर्थक भी डिगते दिखे हैं। व्यापारी वर्ग में से भी अधिकांश सरकार के फैसलों से दु:खी और नाराज नजर आया है। वहीं किसानों ने तो मानों मन ही बना रखा है कि जिसने उनकी मदद करना तो दूर सिरे से नजरअंदाज किया उसे सबक सिखाना ही सिखाना है। यह इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि कर्ज माफी के मामले में केंद्र का साफ कहना रहा है कि वो इस मामले में किसी भी कीमत पर किसानों की मदद नहीं कर सकती है, राज्य सरकार चाहें तो वो अपने स्तर पर फैसले ले सकती हैं। मतलब किसान से जो वादे किए गए थे वो झूठे साबित हुए, इस कारण किसान लगातार आंदोलन करते देखे गए, लेकिन सुनवाई नहीं होनी थी सो नहीं हुई। इसी प्रकार युवाओं को रोजगार और नौकरी के जो वादे हुए थे उसमें भी कोई परिणाम आता हुआ दिखाई नहीं दिया, बल्कि हुआ यह कि जो प्रतिभाएं विदेशों में रहते हुए अपनी रोजी-रोटी चलाने के साथ ही साथ भारत में रह रहे परिजनों के लिए भी संबल बने हुए थे उनके लिए तरह-तरह की दिक्कतें खड़ी कर दी गईं। ऐसे में किसानों, युवाओं और महिला सुरक्षा को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में जो बड़ा दांव खेला है वह जनता की दु:खती रग की तरह ही है, जिसे यदि सही तरीके से भुनाया गया तो आने वाले समय में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए मुसीबत भी खड़ी हो सकती है।
30नवंबर/ईएमएस