लेख

क्षणिकाओं के रंग: स्वतंत्रता दिवस के संग (लेखक- प्रो.शरद नारायण खरे / ईएमएस)

14/08/2019


(1)
कर्मचारी ऑफिस में
अत्यंत उत्साह से
झंडा फहराते हैं
यह बात और है कि
साहब सारे आयोजन का
दुगना बिल बनाते हैं।

(2)
वे जन-गण-मन
का गान
पूरी श्रध्दा के साथ
गाते हैं
यह बात और है कि
बीच में ही बहुत से
शब्द भूल
जाते हैं।

(3)
उनके भीतर की
देशभक्ति कुछ
इस तरह से
अँगड़ाई ले रही है
कि सोशल मीडिया पर
वतनपरस्ती की
नित नई पोस्टें
दे रही है।

(4)
शहीदों की चिताओं
पर केवल
मेले हैं
बाक़ी सब
नेताओं के
झमेले हैं।

(5)
आज का लोकतंत्र
कुम्हलाया है
क्योंकि सारा
खाद-पानी
नेताओं ने
ख़ुद के गमलों
में ही डलवाया है।

14अगस्त/ईएमएस