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रिजर्व बैंक : गवर्नर उर्जित पटेल का घुटने टेकना (लेखक-अजित वर्मा / ईएमएस)

03/12/2018

पिछले दिनों रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड की बैठक 9 घंटे तक चली। आरबीआई बोर्ड बैठक में चार डिप्टी गवर्नर, सरकार के नॉमिनी इकोनॉमिक सेक्रेटरी एस सी गर्ग और फाइनेंशियल सर्विस सेक्रेटरी के अलावा गैर आधिकारिक डायरेक्टर एस गुरुमूर्ति और सतीश मराठे ने भाग लिया।
रिजर्व बैंक के रिजर्व से सरकार को पैसे देने और लिक्विडिटी बढ़ाने पर चर्चा हुई।
कहा जा रहा है कि बैठक में फैसला लिया गया है कि सरकार को आरबीआई रिजर्व से पैसे देने के विषय में विचार करने के लिए कमेटी बनेगी और बाजार में लिक्विडिटी यानी पैसे का फ्लो बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
बोर्ड की अगली मीटिंग 14 दिसंबर को होगी। रिजर्व बैंक द्वारा गठित की जाने वाली कमेटी इस बात पर विचार करेगी कि आरबीआई के सरप्लस को सरकार को कैसे दिया जा सकता है।
अगर इन अखबारों को आधार माने तो इस निष्कर्ष पर सहज ही पहुँचा जा सकता है कि रिजर्व बैंक अपने सरप्लस को सरकार को धन उपलब्ध कराने के लिए तैयार हो गया है और कमेटी को सिर्फ यह तय करना है कि यह धन कैसे दिया जाए। स्पष्टत: यह रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल द्वारा सरकार के सम्मुख घुटने टेकने जैसा ही है। उनके रुख में यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने के बाद ही आया है, क्योंकि इससे पहले वे सरप्लस में से धन देने तैयार नहीं थे। जबकि सरकार द्वारा रिजर्व बैंक को लिखे गए तीन पत्रों के बाद रिजर्व बैंक और केन्द्र सरकार टकराव की मुद्रा में आ गये थे। कहा जा सकता है कि सरकार रिजर्व बैंक के साथ मनमानी करने में कामयाब हो गई है। अब देखना है कि रिजर्व बैंक सरकार कब, कैसे और कितने पैसे देता है और देश की आर्थिक सेहत पर उसका क्या प्रभाव होता है।
03दिसम्बर/ईएमएस