राष्ट्रीय

मध्यप्रदेश विधानसभा 2018 विशेष (06 आरएस01एचओ)

06/11/2018

रोमांचक रहेगी कमल और पंजे की लड़ाई
(झाबुआ विधानसभा चुनाव - 2018 )
झाबुआ (ईएमएस)। झाबुआ जिले के तहत तीन विधानसभा क्षेत्र आते है ये हैं झाबुआ , पेटलावद और थांदला। फिलहाल दो सीटों झाबुआ और पेटलावद सीट भाजपा के कब्जे में जबकि थांदला में निर्दलीय विधायक है। 2008 में ये तीनो सीट कांग्रेस के पास थी लेकिन भाजपा ने लगातार कोशिशों से कांग्रेस के इस गढ़ पर कब्ज़ा जमा लिया है आदिवासी बाहुल्य इस जिले में इस बार की लड़ाई बेहद ही रोमांचक हो सकती है।जहाँ तक चुनावी आंकड़ेबाजी का सवाल है, 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने भाजपा के दिलीपसिंह भूरिया को 57,780 वोटों से हराया था। भाजपा उम्मीदवार दिलीपसिंह भूरिया को 2,51,255 वोट मिले थे! वहीं, कांतिलाल को 3,08,923 वोट! 2014 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने दिलीपसिंह भूरिया और कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को चुनाव लड़ाया गया। इस चुनाव में दिलीपसिंह भूरिया ने 1 लाख 8447 वोटों से जीत हासिल की। कांग्रेस के कब्जे में रहने वाली यह लोकसभा सीट मोदी लहर में कारण पहली बार भाजपा के पास आई थी।
झाबुआ विधानसभा
झाबुआ सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है और यहां से शांतिलाल बिलवाल मौजूदा विधायक हैं। करीब ढाई लाख वोटरों वाली यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है। यहां बारी-बारी से कांग्रेस और बीजेपी जीत दर्ज करती आईं हैं।पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस की बीच मुख्य मुकाबला था जिसमें बीजेपी के शांतिलाल बिलवाल ने कांग्रेस से निवर्तमान विधायक जेवियर मेडा को शिकस्त दी थी। बीजेपी ने यह चुनाव करीब 16 हजार वोटों के अंतर जीता था। बीएसपी और एनसीपी जैसे दलों को तब 2 फीसद से भी कम वोट हासिल हुए।इस चुनाव में कांग्रेस जेवियर मेडा ने बीजेपी के पवेसिंह पारगी को हराया था। कांग्रेस ने करीब 19 हजार वोटों से बड़ी जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में बीएसपी का प्रदर्शन काफी खराब रहा और उसे सिर्फ 0।7 फीसद वोट हासिल हुए थे।
थांदला विधानसभा
थांदला विधानसभा एक आदिवासी बाहुल्य इलाका है और यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है। यह क्षेत्र गुजरात और राजस्थान की सीमा को छूता है और सीमांत होने की वजह से इलाका पिछड़ गया है। सीट पर करीब 2।10 लाख वोटर हैं जिनमें महिला और पुरुष वोटरों की संख्या करीब-करीब बराबर ही है। इस सीट से फिलहाल निर्दलीय कलसिंह भाबर विधायक हैं।कलसिंह भाबर ने इस बार बीजेपी का साथ छोड़ निर्दलीय चुनाव लड़ा और कांग्रेस के गेंदाल डामोर को करीब 5 हाजर वोटों से शिकस्त दी। बीजेपी इस चुनाव में तीसरे स्थान की पार्टी रही जिसे करीब 16 फीसद वोट हासिल हुए।इस चुनाव में कांग्रेस के वीर सिंह भूरिया ने बीजेपी के कलसिंह भाबर को करीब 8 हजार वोटों से हराया था। समाजवादी पार्टी और बसपा इस चुनाव में ज्यादा वोट पाने में असफल रहीं।
पेटलावद विधानसभा
झाबुआ जिले की पेटलावद सीट पर बीजेपी का कब्जा है और यहां से निर्मला भूरिया विधायक हैं। सवा दो लाख वोटर वाली इस यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीट है। इलाके में शिक्षा, स्वास्थ्य के अलावा पानी की कमी और किसानों को उपज का सही दाम दिलाने जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ा जाना है।2013 के चुनाव में निर्मला भूरिया ने कांग्रेस के बालसिंघ मेढ़ा को 17016 वोटों से शिकस्त दी थी वहीँ 2008 के चुनाव में निर्मला भूरिया ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था तब उन्होंने भाजपा से चुनाव लड़े बालसिंघ को 8554 वोटों से हराया था।
----/06 नवम्बर 2018