लेख

कोरोना बनाम जिंदगी (लेखक- रमेश सर्राफ धमोरा / ईएमएस)

16/07/2020

दुनिया के अधिकांश देश कोरोना महामारी से त्रस्त नजर आ रहें है। भारत में स्थिति लगातार अधिक खराब होती जा रही है। कोरोना पॉजिटिव केस आने की गति तेजी से बढ़ती जा रही है। कोरोना के चलते देश में चार बार किए गए लोडाउन के बाद अब देश में अनलाक 2.0 चल रहा है। जनजीवन को सामान्य बनाने के सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। लाकडाउन के लगायी गयी पाबंदिया हटायी जा रही है। ताकि जन जीवन सामान्य हो सके।
सरकार के हर सम्भव प्रयास के उपरांत भी कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रही है। अन्य देशों की वनिस्पत भारत में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते 5 दिनों में ही एक लाख नए कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए हैं। कोरोना संक्रमण में अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। अमेरिका में कोरोना से 31 लाख 60 हजार से ज्यादा मामले हैं। वहीं ब्राजील में यह आंकड़ा 17 लाख 19 हजार है। अमेरिका में कोरोना महामारी की चपेट में आने से अब तक एक लाख 35 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं ब्राजील में इससे करीबन 68 हजार से ज्यादा लोगों ने जान गवा दी है।
भारत में गत दिनों एक दिन में रिकॉर्ड 25 हजार नए केस दर्ज किए गए हैं। जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। भारत में कोरोना से अब तक करीबन आठ लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं। यहां करीबन 21 हजार से ज्यादा लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। जबकि पांच लाख लोग ठीक हो चुके हैं। इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक देश में टेस्ट किए गए सैंम्पलो की कुल संख्या एक करोड़ दस लाख के करीबन है। जिनमें 9 जुलाई को एक दिन में सबसे अधिक 2 लाख 83 हजार 659 सैंपल टेस्ट किए गए हैं।
दुनिया में कोरोना से संक्रमित लोगों का आंकड़ा एक करोड़ 23 लाख से अधिक हो चुका है। जिनमें 5 लाख 53 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 71 लाख से अधिक लोग स्वस्थ हो चुके हैं। दुनिया के करीब 213 देश अभी तक इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या ब्राजील, भारत, रूस, पेरू, चिली, स्पेन, इंग्लैंड, मैक्सिको, ईरान में है।
भारत में सबसे अधिक कोरोना का संक्रमण महाराष्ट्र, तमिलनाड़ु, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटका, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, राजस्थान में है। इन राज्यों में देश के करीब 90 प्रतिशत कोरोना संक्रमित लोग पाए गए हैं। मगर यहां सबसे अच्छी बात यह है कि भारत में कोरोना पॉजिटिव से रिकवर कर नेगेटिव होने वालों की संख्या अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक है। भारत में करीबन औसतन 62 प्रतिशत कोरोना संक्रमित लोग स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं।
कोरोना के उपचार के लिए देश में इस समय 1169 बायो लेबोरेटरी काम कर रही है। जिनमें से 835 सरकारी क्षेत्र की व 334 निजी क्षेत्र की है। कोरोना की रोकथाम के लिए भारत में अभी भी अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा, जल परिवहन सेवा बंद है। देश में भी एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में जाने के लिए सीमित संख्या में हवाई जहाज एवं रेल गाड़ियां संचालित की जा रही है।
देश में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण इन दिनों लोगों में पहले से अधिक भय व्याप्त हो रहा है। कोरोना से देश का हर नागरिक खुद को डरा हुआ महसूस कर रहा है। इसी कारण बहुत कम संख्या में लोग घरों से बाहर निकाल रहे हैं। रेल गाडियां, हवाई जहाज, बसो में भी बहुत कम लोग यात्रा कर रहे हैं। कोरोना पाजिटिव पाये जाने पर भोपाल में एम्बुलेंस चालक डर कर उस व्यक्ति को अस्पताल के बाहर छोड़कर भाग जाता है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर अस्पताल के बाहर ईलाज के अभाव में कोरोना पोजिटिव मरीज वाजिद अली 59 की मौत हो गयी।
मेरे एक रिश्तेदार को वृद्धावस्था के चलते शुगर, बीपी, निमोनिया की बीमारी के उपचार के लिए जयपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां जांच में उनको कोरोना पाजिटिव पाया गया। इसके बाद उनको एक निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवा दिया गया। इसी दौरान उनके परिवार के अधिकांश लोग कोरोना पोजिटिव पाये गये। जिनको उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। जयपुर के अस्पताल में भर्ती वृद्ध व्यक्ति की मौत होने पर उनके शव की पहचान कर अंतिम संस्कार करने के लिये प्रशासन ने उनके परिवार के किसी सदस्य को इजाजत नहीं दी। वृद्ध व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए कोरोना के डर से कोई रिश्तेदार तैयार नहीं होता है।
लोगों में कोरोना का ऐसा डर बैठ गया है कि ऐसी स्थिति में हर कोई बचकर निकलना चाहता है। नजदीकी व्यक्ति भी कोरोना संक्रमित परिवार के यहां जाने से गुरेज करता है। ऐसे में उस परिवार की स्थिति एक बहिष्कृत परिवार की हो जाती है। जिसका उस परिवार के लोगों के दिलो-दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। कोरोना से मृत व्यक्ति व उनके परिजन जयपुर के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान ही कोरोना संक्रमित हुए थे। जिसका खामियाजा उनके पूरे परिवार को उठाना पड़ा। सरकार कहती है कि अब हमको कोरोना के संग ही जीना पड़ेगा। लेकिन ऐसी स्थिति में भला कोई भी व्यक्ति कोरोना के साथ कैसे जी सकता है। जिस व्यक्ति को भी ऐसी स्थिति से गुजरना पड़ता है। उसकी जिंदगी बहुत खराब हो जाती है। कोरोना के डर से नजदीकी रिश्तेदार भी दूरी बना लेते हैं।
हमारे देश में कई जगह से खबरें आ रही है कि कोरोना वायरस से मरने वाले शख्स के शव को अछूत की तरह व्यवहार किया जा रहा है। जबकि इंडियन काउंसिल आप मेडिकल रिसर्च के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ ट्रेडीशनल मेडिसिन के निदेशक वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर देव प्रसाद चट्टोपाध्याय का कहना है कि शव से संक्रमण फैलने की संभावना नहीं है। उनका कहना है कि मौत के 4 से 6 घंटे में शरीर की कोशिकाएं मृत हो जाती है। कोरोना का संक्रमण छींकने व खासने पर वायरस के ट्रांसमिट होने से होता है। यही वजह है कि संक्रमण फैलने कोई गुंजाइश नहीं है।
उनका कहना हैं कि यदि सावधानी के साथ शव को रखा और हैंडल किया जाए तो मृतक का अंतिम संस्कार विधि विधान से किया जा सकता है। सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाना मरने वाले का अधिकार भी है। कोरोना संक्रमण के खौफ के चलते दुनिया में कई जगह स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा शव को गड्ढे में फेंकने खबरें लगातार सामने आ जा रही है। वहीं भारत में भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जब परिवार के लोग ही शव को छोड़कर भाग गए। यह स्थिति बेहद दुखद और अमानवीय है। सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को निर्देशित किया है कि कोरोना से मरने वालों के शवों का विधि पूर्वक अंतिम संस्कार करवाया जाये।
सरकार कहती है कि हर व्यक्ति दो गज की दूरी बना कर रखे तथा घर से बाहर मुंह पर मास्क लगाकर निकलो। लेकिन देखने में आता है कि लोग लापरवाही के चलते ऐसा नहीं करते हैं। बड़े-बड़े मंत्रियों, राजनेताओं, अधिकारियों द्वारा भी अक्सर कार्यक्रमों में सरकार के दिशा निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया जाता है। जिससे आम लोगों में सरकारी नियम कानून पालना करने की भावना समाप्त हो जाती है।
सरकार को चाहिए कि कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए जांच करवाने में तेजी लाई जाए। साथ ही लोगों को शारीरिक दूरी व मुंह पर मास्क लगाने की कड़ाई से पालना करवाई जाए। जहां कहीं भी कोई राजनेता या सरकारी अधिकारी, कर्मचारी सरकारी गाइडलाइंस का उल्लंघन करता मिले। उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। तभी सरकारी नियमों का सही पालन हो सकेगा।
16जुलाई/ईएमएस