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छरहरी काया चाहिए तो आयुर्वेद के अनुसार कीजिए खानपान

11/02/2020


सिडनी (ईएमएस)। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में तीन दोष होते हैं-वात, पित्त और कफ। अंतरराष्ट्रीय पोषण विशेषज्ञ ली होम्स ने बताया कि इन तीनों दोष के लिहाज से अलग-अलग तरह का खानपान होना चाहिए। इसके अलावा सर्दी और गर्मी के हिसाब से भी अलग-अलग तरह का खानपान होना चाहिए। ली होम्स ने कहा यदि आप छरहरी काया जाहते हैं तो आपको आयुर्वेद में बताए गए दोष के हिसाब से खानपान का चुनाव करना चाहिए। यह फार्मूला पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं पर भी समान रुप से लागू होता है। ऑस्ट्रेलियाई पोषण विशेषज्ञ होम्स को भारत यात्रा में आयुर्वेद की सौगात मिली। इसके बाद डायटिंग के बारे में उनका नजरिया बदल गया। उन्होंने अपनी किताब 'ईट राइट फॉर यॉर शेप' में आयुर्वेद में बताए गए शरीर के तीन दोष के आधार पर अपना आहार चुनने की सलाह दी है।
वात शरीर वाले छरहरी काया के होते हैं। यह वायु से जुड़ा होता है और इनका शरीर हल्का होता है। इन्हें अचानक थकान लगने लगती है, मगर ऊर्जा भी जबरदस्त होती है। यह जोश से लबरेज होते हैं और गुस्सा भी जल्दी आता है। हालांकि जल्दी माफ भी कर देते हैं। वात शरीर वालों का खानपान गर्म होना चाहिए, जैसे एक कटोरा दलिया, नट्स जैसे बादाम और अखरोट भी इनके आहार में शामिल होना चाहिए। इसके साथ भी प्राकृतिक रूप से मीठे फल जरूर खाने चाहिए। सर्दियों में इन्हें गर्म सूप, दलिया, करी आदि का सेवन अधिक करना चाहिए।
पित्त शरीर वालों का मूल तत्व अग्नि और पानी होता है। इनका शरीर औसत होता है और इनकी खासियत मजबूत पाचन तंत्र, अच्छी भूख और जबरदस्त ऊर्जा होती है। यह बुद्धिमान होते हैं और इन्हें गुस्सा बहुत जल्दी आ जाता है। जलन, अपच और त्वचा पर चकत्ते इनकी बड़ी समस्या होता है। शरीर में अत्यधिक पित्त बनने के कारण इनका शरीर और दिमाग गर्म रहता है। इनके लिए बेहतर है कि ठंडक पहुंचाने वाले खाद्य पदार्थ। सर्दियों में भी इन्हें अधिक गर्म चीजें नहीं खानी चाहिए। इन्हें मीठे फल और सब्जियों के अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां और खीरा खाना चाहिए। होम्स ने इन्हें अधिक नमक, गरम मसाले, खट्ट फल और शराब से दूर रहना चाहिए।
कफ प्रकृति वाले तगड़े शरीर के होते हैं और इनमें जबरदस्त आंतरिक बल होता है। इनका मूल तत्व पानी और धरती है। यह स्वभाव से शांत, विचारमग्न, निष्ठावान, धैर्यवान होते हैं। इनकी एक खास प्रवृत्ति होती है, जब यह तनाव में होते हैं तो यह किसी परिस्थिति से किनारा कर लेते हैं और उसे नजरअंदाज कर देते हैं। जब यह असंतुलित होते हैं, तो इनका वजन बढ़ने लगता है, अवसादग्रस्त हो जाते हैं और एलर्जी होती है। ऐसे लोगों को दुग्ध उत्पादों से थोड़ा दूर रहना चाहिए। सर्दियों में इन्हें हल्का, गर्म और सूखा खाना खाना चाहिए। इन्हें तीखे मसालों में काली मिर्च, सरसों और अदरक का सेवन करना चाहिए।
अनिरुद्ध/ईएमएस 11 फरवरी 2020