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(विचार-मंथन) पुलिस की नाराजगी आखिर क्यों (लेखक-सिद्धार्थ शंकर / ईएमएस)

08/11/2019

दिल्ली पुलिस के हजारों पुलिसकर्मी मंगलवार को अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन पर थे। भीड़ से अपनी सुरक्षा की मांग के लिए सिर्फ दिल्ली ही नहीं देश भर में कई जगहों पर पहले भी प्रदर्शन हो चुके हैं। अतिरिक्त दबाव और संसाधनों की कमी पुलिस विभाग की बड़ी परेशानी है।
दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के बाहर 2 नवंबर को पुलिस और वकीलों के बीच जो हिंसक झड़प का मुद्दा और भी गरमा गया है। हालांकि, पुलिस मुख्यालय के सामने से पुलिसकर्मियों का धरना खत्म हो गया, मगर यह घटनाक्रम अपने पीछे ढेरों सवाल छोड़ गया। वकीलों के साथ हुई झड़प के बाद पुलिसकर्मी सड़क ब्लॉक करके मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने में जुट गए। करीब 10 घंटे तक पूरा घटनाक्रम चला। इस दौरान देश की राजधानी दिल्ली में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी वर्दी में अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। यूनिफॉर्म में पुलिस हेडक्वॉर्टर के सामने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों के नारे और हाथों में प्लेकार्ड उनकी विवशता को बयान कर रही थी। वर्दी में इंसान और हम पंचिंग बैग नहीं हैं जैसे पोस्टर के साथ पुलिसकर्मी सरकार से अपनी सुरक्षा के लिए गुहार लगा रहे थे। दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के नियंत्रण में आती है। दिल्ली में तीस हजारी कोर्ट में पुलिसकर्मी पर वकीलों ने हमला कर दिया था। हालांकि, दिल्ली से शुरू हुआ प्रदर्शन देश के दूसरे हिस्सों तक भी चला गया। पुलिसकर्मियों पर हमला कोई पहली बार नहीं हुआ है और ऐसे हमले कानून और नियमों को लेकर सम्मान नहीं होने के संकेत के तौर पर देखे जाते हैं। भारत में पुलिस फोर्स पर हमले का सबसे बड़ा खतरा बड़ी अनियंत्रित भीड़ होती है। पुलिसकर्मियों पर हमले का सबसे अधिक डर विभाग में सबसे निचले स्तर पर काम करने वालों पर होता है।
इस वक्त देश में पुलिस विभाग में पर्याप्त संख्या बल की बहुत कमी है। 2017 डाटा के अनुसार, देश में कम से कम 25 लाख पुलिसकर्मियों की जरूरत है, लेकिन सिर्फ 19.41 लाख ही मौजूदा वक्त में कार्यरत है। इस आंकड़े के अनुसार प्रत्येक 1 लाख नागरिकों पर सिर्फ 151 पुलिसकर्मी ही मौजूद हैं। संयुक्त राष्ट्र ने प्रति एक लाख नागरिकों पर 222 पुलिसकर्मियों की तैनाती का सुझाव दिया है। इस आधार पर भारत में पुलिसकर्मियों पर काफी दबाव है और विश्व में नागरिक-पुलिसकर्मी संख्या अनुपात के लिहाज से भारत की स्थित काफी बुरी है।
पुलिस विभाग में पर्याप्त संख्या बल नहीं होने का असर यह है कि पुलिसकर्मी जहां अतिरिक्त दबाव से जूझ रहे हैं, तो विभाग के पास पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध नहीं है। संसाधनों के अभाव और अतिरिक्त दबाव का असर है कि पुलिस विभाग खुद ही काफी लाचार है और इसका असर पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली और जांच पर भी पड़ता है।
अगर सिर्फ संख्याबल की बात की जाए तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 20 लाख वकील हैं जबकि पुलिसकर्मियों की संख्या 19.4 लाख है। आम तौर पर यह मान्य राय है कि पुलिसबल सत्ता के ही नियंत्रण में है। पुलिस विभाग में राजनीतिक दखल भी एक आम समस्या है। आम तौर पर पुलिस विभाग पर राज्य सरकार का नियंत्रण होता है, हालांकि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृहमंत्रालय के नियंत्रण में आती है। पुलिस विभाग में सुधार के लिए कई कमिटियों ने अनगिनत सिफारिशें की हैं, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में ऐसा संभव नहीं हुआ है।
08नवंबर/ईएमएस