क्षेत्रीय

भगवान ने किया जल विहार, विमान देखने उमड़ा शहर

09/09/2019

अशोकनगर (ईएमएस)। जल झूलनी ग्यारस पर शहर सहित जिले भर में डोल ग्यारस पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। सबसे बड़ा आयोजन जिला मुख्यालय पर आयोजित हुआ। यहां विभिन्न मंदिरों से भगवानों को डोले में बैठाकर परपंरागत ढंग से ही विमानों का चल समारोह निकाला गया। डोलों में बैठकर निकले भगवान के दर्शनों के लिए रास्तों में इतनी भीड़ उमड़ी कि पैर रखने तक को जगह नहीं मिली। जल विहार को निकले भगवानो के दर्शन के लिए जिला मुख्यालय सहित आसपास के गांवों से लोग शामिल हुए। दर्शनार्थियों ने भगवानों को केले व अन्य फलों के भोग भी लगाएं।
सोमवार को शहर के प्रमुख मंदिरों से विमानों का निकलना शुरू हुआ। जो दोपहर बाद गांधी पार्क चौराहे से एकत्रित होते हुए सराफा बाजार स्थित बड़े मंदिर में पहुंचे। जहां से सुभाषगंज, इन्द्रा पार्क, हाथी दरवाजा गांधी चौराहे, स्टेशन रोड, फुट ओव्हर ब्रिज, पछाड़ीखेड़ा रोड़ होते हुए तुलसी सरोवर पहुंचे। शोभा यात्रा में करीब तीस विमान शामिल थे। विमनों के आगे शंख झालर, बजाते हुए श्रद्धालु चल रहे थे वहीं भजनों की धुन पर भक्तों ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। उत्सव में श्रद्धालुओं ने शहर के मुख्य मार्गों में विमानों का स्वागत और पूजन-अर्चन का कार्य किया। जलझूलनी ग्यारस पर लोगों ने फूलमालाओं और फल-मिष्ठान से विमानों की पूजा आरती के साथ श्रृद्धालुओं का स्वागत किया। गांधी पार्क चौराहे से विमानों का चल समारोह पछाडीखेडा रोड होते हुए सभी विमान जलविहार स्थल तुलसी सरोवर पहुंचे। जहां जलविहार के साथ धार्मिक आयोजन में उपस्थित बडी संख्या में लोगों ने प्रसाद लिया। इसके बाद देर शाम तक सभी विमान अपने-अपने मंदिरों में पहुंचकर आरती के साथ चल समारोह का विसर्जन कर भजन-कीर्तन कर मंदिरों मेें देर रात तक धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। इस आयोजन में श्री हनुमान मंदिर, तारवाले बालाजी, माता मंदिर, चिंताहरण हनुमानजी, त्रिदेव मंदिर, बांकेबिहारी मंदिर, बजरिया स्थित श्रीहनुमान मंदिर सहित लगभग सभी मंदिरों के विमान विशेष साज-सज्जा के साथ जल बिहार के लिये तुलसी सरोवर पहुंचे। इस मौके पर श्रृद्धालुओं को परेशानी न हो इस मंशा से पुलिस प्रशासन के इंतजाम रहे।

-गणपति बप्पा को दी विदाई:
जल झूलनी एकादशी के अवसर पर गणेश झांकी समितियों द्वारा प्रतिमा विसर्जन भी किया गया। हालांकि अधिकांश समितियां अनन्त चतुर्दशी को विसर्जन करेंगी। लेकिन कई झांकि समितियों द्वारा डोल ग्यारस के अवसर पर ही गणपति बप्पा को विदाई दी गई। इस कारण दोपहर बाद से देर शाम तक तुलसी सरोवर के किनारे गणपति बप्पा मोरिया अगली बरस तू जल्दी आ के जयकारों से गुंजायमान होते रहे।

-जगह-जगह हुआ स्वागत:
डोल ग्यारस पर गांधी पार्क चौराह, राणा शशीन्द्र चौराह, पछाड़ीखेड़ा रोड़ आदि स्थानों विभिन्न सामाजिक एवं स्वयंमसेवी संस्थाओं ने स्टॉल लगाकर डोल देखने आए लोगों को फल, पानी, जूस आदि वितरित किये। डोल ग्यारस के त्योहार पर बड़ी संख्या में गरीब आदिवासी वर्ग शहर में समारोह देखने आता है। ऐसे गरीबों को भोजन कराने के लिए स्वंयसेवी संस्थाओं ने स्टॉल लगाकर भोजन वितरण किया।

-पुलिस ने की कड़ी चौकसी:
त्योहारों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। इस बार पिछले वर्षों की अपेक्षा न केवल पुलिस बल अधिक था बल्कि ड्यटी पर तैनात पुलिस कर्मी और प्रशासनिक अधिकारी भी काफी दौड़-धूप करते नजर आए। इस कारण चल समारोह और विसर्जन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं बनी।
प्रवीण/09/09/2019