लेख

(विचार मंथन) संतूर के उस्ताद (लेखक/ईएमएस-सिद्धार्थ शंकर)

11/05/2022

भारतीय संगीतकार और संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का मुंबई में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। वह 84 वर्ष के थे। वह पिछले छह महीने से किडनी संबंधी समस्याओं से पीडि़त थे और डायलिसिस पर थे। पंडित शिव कुमार शर्मा का सिनेमा जगत में अहम योगदान रहा। बॉलीवुड में शिव-हरी नाम से मशहूर शिव कुमार शर्मा और हरि प्रसाद चौरसिया की जोड़ी ने कई सुपरहिट गानों में संगीत दिया था। इसमें से सबसे प्रसिद्ध गाना फिल्म चांदनी का मेरे हाथों में नौ-नौ चूडिय़ां रहा, जो दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी पर फिल्माया गया था। शिव कुमार शर्मा का 15 मई को कॉन्सर्ट होने वाला था। सुरों के सरताज को सुनने के लिए कई लोग बेताब थे। शिव-हरि (शिव कुमार शर्मा और हरि प्रसाद चौरसिया) की जुगलबंदी से अपनी शाम रौनक करने के लिए लाखों लोग इंतजार कर रहे थे। लेकिन अफसोस इवेंट से कुछ दिन पहले ही शिव कुमार शर्मा ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। अपने खास अंदाज से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत को पहचान दिलाई। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में पंडित शिवकुमार शर्मा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके साथ ही उन्होंने मनोरंजन जगत में अपनी प्रतिभा का लोह मनवाया। उन्होंने बांसुरी के दिग्गज पंडित हरि प्रसाद चौरसिया के साथ मिलकर सिलसिला, लम्हे और चांदनी जैसी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया था। पंडित शिवकुमार शर्मा ने सिलसिला फिल्म के थीम सॉन्ग का संगीत भी तैयार किया। 1981 में आई इस फिल्म में अभिनेता अमिताभ बच्चन, अभिनेत्री जया बच्चन और रेखा ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हरिप्रसाद चौरसिया और शिवकुमार शर्मा ने इस फिल्म को बैकग्राउंड स्कोर प्रदान किया। यह फिल्म भले ही असफल रही, मगर इसके गाने काफी हिट हुए। इस फिल्म के ये कहां आ गए हम, देखा एक ख्वाब, रंग बरसे भीगे चुनरवाली गाने आज भी लोग गुनगुनाते हैं। फिल्म सिलसिला के लिए यश चोपड़ा नया संगीतकार ढूंढ रहे थे। उन्होंने शिवहरि को संगीतकार के रूप में चुना। दोनों ने खुद को साबित कर दिखाया। शिवहरि ने सिलसिला फिल्म के गानों के लिए अलग तरह की धुनें बनाईं। इस फिल्म में लता मंगेशकर और किशोर कुमार के अलावा अमिताभ बच्चन से भी गाने गवाए। सिलसिला के लिए बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड मिलने के बाद यह जोड़ी यश चोपड़ा की फिल्मों के लिए संगीत देने लगी। 1985 में आई फासले, 1988 में आई विजय असफल रहीं, लेकिन संगीत हिट रहा। फ्लॉप फिल्मों के दौर से गुजर रहे यश चोपड़ा ने 1989 में ऋषि कपूर, श्रीदेवी और विनोद खन्ना को लेकर चांदनी फिल्म बनाई। फिल्म की रिलीज से पहले ही इस फिल्म के गाने हिट हो गए। शिव हरि के संगीत से फिल्म हिट हुई। इन दोनों के संगीत ने यश चोपड़ा के करियर को फिर पटरी पर पहुंचाया। शिवकुमार शर्मा और हरिप्रसाद चौरसिया ने मिलकर कुल आठ फिल्मों के लिए साथ काम किया। इनमें से सात फिल्में यश चोपड़ा ने निर्देशित कीं। 1993 में आई साहिबां इकलौती ऐसी फिल्म थी, जिसे यश चोपड़ा ने नहीं बनाया था। इन दोनों ने एक साथ कई फिल्मों में संगीत दिया है और अनेक एलबम भी बनाए हैं। शिवहरि की जोड़ी यश चोपड़ा की फिल्मों के संगीतकार के रूप में भी विख्यात रही है। पंडित शिवकुमार शर्मा का जन्म जम्मू में पंडित उमा दत्त शर्मा के घर 13 जनवरी 1938 को हुआ था। उनके पिता ने उन्हें महज पांच वर्ष की आयु से तबला और गायन की शिक्षा देना शुरू कर दिया था। उनके पिता ने संतूर वाद्य पर शोध किया और वह शिवकुमार को भारतीय शास्त्रीय संगीत को संतूर पर बजाते हुए देखना चाहते थे। शिवकुमार शर्मा ने 13 वर्ष की आयु से ही संतूर बजाना शुरू कर दिया। आगे चलकर उन्होंने अपने पिता के सपने को भी पूरा किया। पंडित शिव कुमार शर्मा ने जम्मू कश्मीर में संतूर को एक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट के तौर पर पहचान दिलाई। उनका पहला कार्यक्रम मुंबई में 1955 में किया था। इसके बाद उन्होंने इसे देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में संतूर को मशहूर किया। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में पंडित शिवकुमार शर्मा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
ईएमएस/11मई2022