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रेमडेसिविर के लिए हाहाकार

07/04/2021

- महामारी कोरोना का फायदा उठा रहे मुनाफाखोर! 10 गुना दाम पर हो रहा सांसों का सौदा!
-देश में रोजाना 9 से 10 लाख इंजेक्शन की डिमांड
-मप्र, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मांग
-केस घटने पर पांचों कंपनियों ने 5 महीने नहीं किया इंजेक्शन का प्रोडक्शन
-अब 24 घंटे प्रोडक्शन के बावजूद डिमांड पूरी नहीं हो पा रही
-कंपनियों के अनुसार 10 अप्रैल तक नॉर्मल हो सकती है सप्लाई
भोपाल (ईएमएस)। रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मप्र सहित देशभर में हाहाकार मच गया है। अक्टूबर से फरवरी तक में केस घटने पर कंपनियों ने प्रोडक्शन घटाया था। कोरोना फिर घातक हो गया है, ऐसे में अब कंपनियां 24 घंटे प्रोडक्शन के बावजूद डिमांड पूरी नहीं कर पा रही हैं। 25 मार्च के बाद तेजी से डिमांड बढ़ी है। सबसे ज्यादा पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में डिमांड है। 3 अप्रैल से प्रोडक्शन तेज कर दिया गया है। कंपनियों के अनुसार 10 अप्रैल तक सप्लाई नॉर्मल हो सकती है। इस बीच महामारी की दवा रेमडेसिविर की कालाबाजारी करके उससे 10 गुना तक मोटा मुनाफा कमाने के मामले सामने आ रहे हैं।
देश में पांच कंपनियां हेट्रो हेल्थकेयर, हैदराबाद, सिपला लिमिटेड, मुंबई, जुब्लियेंट लाइफ साईंसेज, नोयडा, डा. रेड्डीज, हैदराबाद और जायड्स केडिला, अहमदाबाद रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाती हैं। देश में जैसे ही कोरोना कंट्रोल होने के स्थिति में आया इन कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया। अब एक बाद फिर से संक्रमण बढऩे के बाद कंपनियों ने निर्माण तेज कर दिया है।
-मप्र में हर दिन 30 हजार रेमडेसिविर की जरूरत
मप्र की बात करें तो इंदौर में ही सभी दवा कंपनियों के स्टाकिस्ट और सीएंडएफ हैं। राज्य के अधिकांश जिलों में इंदौर से ही दवा की आपूर्ति होती है। बताया जाता है कि करीब 10 मार्च तक कोरोना संक्रमण नियंत्रण में था तो प्रदेश में रेमडेसिविर के हर दिन मुश्किल से 200-250 इंजेक्शन ही लग रहे थे। मार्च मध्य से जैसे ही कोरोना का संक्रमण बढ़ा, रेमडेसिविर की मांग भी बढऩे लगी। आज प्रदेश में हर दिन 25-30 हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन मरीजों को लग रहे हैं। प्रदेश में कोविड वायरस का सर्वाधिक 24 प्रतिशत भार इंदौर पर है।
-इंजेक्शन की कालाबाजारी
विश्व में कोरोना महामारी आने के बाद सबसे पहले विदेश की एक कंपनी ने रेमडेसिविर बनाया था। विदेश की कम्पनी ने ही बाद में भारत में कुछ कंपनियों से अनुबंध करके इस इंजेक्शन का फार्मूला दिया था। इसके बाद भारत में भी रेमडेसिविर का निर्माण होने लगा। देश में जायड्स-केडिला का रेमडेसिविर सबसे सस्ता 900 रुपए के आस-पास का है। लेकिन अब सारी कंपनियों के इंजेक्शन की कालाबाजारी होने लगी है। कालाबाजारी रोकने के लिए इंदौर के कलेक्टर मनीष सिंह ने आदेश दिया है कि इंजेक्शन को आधार और फोटो आईडी के आधार पर ही दिया जाएगा। पॉजिटिव रिपोर्ट भी दिखानी होगी और डॉक्टर की सिफारिश की पर्ची भी जरूरी होगी। स्टॉकिस्ट का कहा है कि रोजाना सुबह 11 बजे यह बताना होगा कि डिमांड कितनी हुई, सप्लाई कितनी की। ड्रग इंस्पेक्टर मॉनीटरिंग करेंगे कि नियमानुसार ही सप्लाई हो रही है या नहीं।
-पांच से छह हजार की डिमांड इंदौर में
प्रदेश में सबसे ज्यादा डिमांड इंदौर में है। यहां 700 मरीज रोजाना आ रहे हैं। संक्रमण दर भी 16 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मौतें भी हो रही हैं। इंदौर जिले में रोजाना पांच से छह हजार इंजेक्शन की डिमांड है।
एक दिन में 90 हजार प्रॉडक्शन, डिमांड दस गुना
दवा कंपनी के एक होलसेल डिस्ट्रीब्यूटर ने बताया देश में पांच कंपनियों में मिलकर अभी की स्थिति में रोजाना 90 हजार इंजेक्शन ही बना पा रही है। देश में रोजाना नौ से 10 लाख इंजेक्शन की डिमांड पहुंच गई है।
इनका कहना है
कोरोना संक्रमण में तेजी आने के बाद रेमडेसिविर की मांग अचानक बढ़ी है। कंपनियों से हमारी बातचीत चल रही है। स्टाक की उपलब्धता होते ही दवा विक्रेताओं को दवा मिलने लगेगी। उम्मीद है कि 10 अप्रैल के बाद यह संकट दूर हो जाएगा।
-राजीव सिंघल, महासचिव, आल इंडिया आर्गनाइजेशन आफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट
वैक्सीन की शॉर्टेज पूरे देश भर में है। अस्पतालों और डॉक्टरों को निर्देश जारी कर रहे हैं कि वे कोरोना वायरस के इतने डोज लगाएं जिससे संक्रमण दूर हो जाए। दवाई की वाकई जरूरत है। जहां तक इस इंजेक्शन की कीमत का सवाल है तो इस पर निगरानी रखे हुए हैं। यदि शिकायत आती तो हम कार्रवाई करेंगे।
- संजय गोयल, ड्रग कंट्रोलर, मध्यप्रदेश
विनोद कुमार उपाध्याय, 07 अप्रैल, 2021