राज्य समाचार

कमलनाथ सरकार की सौगात को भूले कांग्रेसी

22/03/2019


ओबीसी आरक्षण को 14 से बढाकर दिया 27 प्रतिशत
भोपाल (ईएमएस)। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 14 फीसदी आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस लोकसभा चुनाव में इस सौगात को भुना नहीं पा रही है। लाभान्वित होने वाले समाजों के पदाधिकारियों तक ही कांग्रेस के पदाधिकारी या जिम्मेदार नेता नहीं पहुंचे हैं और न ही उनसे इस फैसले के बारे में कोई पत्राचार आदि किया गया है। ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के स्टे से कांग्रेस सरकार के फैसले को ठेस भी पहुंची है, और इसका नकारात्मक प्रचार ज्यादा हुआ है। फैसले को जनता के बीच कम प्रचारित होने के पीछे कांग्रेस में ओबीसी नेतृत्व के रूप में भाजपा जितने बड़े कद्दावर नेताओं का नहीं होना है। जो हैं वे नेता बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं कि उन्होंने एक दर्जन सम्मेलन कर फैसले के बारे में लोगों तक जानकारी पहुंचा दी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सागर के किसान कर्जमाफी सम्मेलन में ओबीसी के 14 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 27 फीसदी करने का एलान किया था। उस समय माना गया कि ओबीसी की आबादी को लाभान्वित करने वाले इस फैसले से कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में फायदा होगा। मगर अब तक इस फैसले को जनता तक पहुंचाने में पार्टी कामयाब नहीं हो सकी है। ओबीसी की 20 फीसदी आबादी वाले यादव समाज को ले लें या करीब आठ प्रतिशत से ज्यादा आबादी वाले स्वर्णकार समाज में इसको लेकर अनभिज्ञता है। आधी आबादी को लगभग दोगुना आरक्षण किए जाने के फैसले का प्रदेश में हल्ला नहीं होना, कांग्रेस के ओबीसी नेताओं की अपने वर्ग में स्वीकार्यता पर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस के पास आज ओबीसी नेतृत्व में सबसे बड़े नामों में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव, राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल, पीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत, मंत्रीगण हुकुमसिंह कराड़ा, जीतू पटवारी, लाखन सिंह यादव, हर्ष यादव, कमलेश्वर पटेल, सुखदेव पांसे, सचिन यादव और विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे जैसे नेता हैं। जबकि ओबीसी नेतृत्व के रूप में भाजपा के पास तीन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, उमा भारती व बाबूलाल गौर, सांसद प्रहलाद पटेल, विधायक भूपेंद्र सिंह जैसे नेता हैं। कांग्रेस के पास ओबीसी के सात मंत्री सहित बड़े नाम वाले नेता होने के बाद भी लाभान्वित समाजों तक सरकार के फैसले की जानकारी नहीं पहुंचना इन नेताओं के संपर्कों पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस की सरकार बनाने में ओबीसी के 27 विधायकों की भूमिका है जो कांग्रेस विधायक दल का करीब 25 फीसदी है। इसी अनुपात को बनाए रखते हुए 28 सदस्यीय मंत्रिमंडल में सात ओबीसी मंत्री बनाए गए। विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भी इस वर्ग की महिलाविधायक को दिया। इस बारे में सर्व स्वर्णकार महा संगठन के डॉ. विश्वनाथ सोनी का कहना है कि ओबीसी आरक्षण बढ़ाए जाने के मुद्दे की कांग्रेस के किसी भी नेता ने अब लाभान्वित समाजों के पदाधिकारियों के साथ बैठक नहीं की। भोपाल में हमारे संगठन की प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक हुई थी, लेकिन इस मुद्दे पर कोई जिज्ञासा नहीं दिखाई और चर्चा भी नहीं की। अखिल भारतवर्षी यादव महासभा के अध्यक्ष राममोहन यादव का कहना है कि ओबीसी आरक्षण का जिन्हें फायदा होना है, उन्हें अब तक कोई जानकारी नहीं है। जानकारी देने अब तक कांग्रेस नेता भी उनके पास नहीं आए हैं। आरक्षण किस तरह लागू होगा, यह लोग तक पहुंचाना चाहिए। लोगों को शंका है कि चुनावी घोषणा साबित न हो। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल का कहना है कि जोन में सम्मेलन लेकर सरकार के ओबीसी आरक्षण के फैसले को बताया जा रहा है। अब तक दमोह, सतना, जबलपुर, इंदौर, मंदसौर, बैतूल में सम्मेलन हो चुके हैं। ओबीसी के लोकसभा क्षेत्र प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं और वर्ग के मंडलम तक गठित हो चुके हैं।
सुदामा नर-वरे/22मार्च2019