अंतरराष्ट्रीय

चंद दिनों में खत्म हो जाएगा प्लास्टिक का कचरा

20/06/2021

-वैज्ञानिकों ने तैयार किया खास एंजाइम
लंदन (ईएमएस)। वैज्ञानिकों के एक समूह ने एक खास तरह के एंजाइम को बनाया है, जो कुछ दिनों में ही प्लास्टिक के कचरे को खत्म कर सकता है। इन वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक खाने वाले एंजाइमों के एक कॉकटेल को तैयार किया है। यह कॉकटेल कुछ ही दिनों में किसी भी प्लास्टिक को खाकर खत्म कर सकते हैं। अबतक इसी प्रक्रिया को खत्म होने में सैकड़ों साल का लंबा वक्त लगता है।
इस दौरान पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। वैज्ञानिकों की इस खोज को धरती से प्लास्टिक प्रदूषण खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।इस एंजाइम कॉकटेल में पेटेस और एमएचई टेस शामिल हैं। ये एक प्रकार के बैक्टीरिया द्वारा निर्मित होते हैं जो पीईटी प्लास्टिक (प्लास्टिक की बोतल) को खाते हैं। इस एंजाइम को आइडोनेला साकैएंसिस कहा जाता है। इसे बनाने वाले पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जॉन मैकगीहान ने बताया कि अगर हम प्लास्टिक के कचरे में एंजाइम डाल देते हैं तो वे इसे खत्म करना शुरू कर देते हैं। जॉन मैकगीहान ने साल 2018 में गलती से प्लास्टिक खाने वाले एंजाइम को बना लिया था। हालांकि, इन्होंने जिस मूल एंजाइम को विकसित किया था उसकी प्लास्टिक खाने की रफ्तार बहुत धीमी थी। जिसके बाद वैज्ञानिकों के समूह ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए एंजाइम के कॉकटेल पर प्रयोग करना शुरू किया। जिसके बाद जब उन्होंने पेटासे और महेटासे एंजाइम को मिलाया इसकी रफ्तार में तेजी देखने को मिली।वैज्ञानिक ने बताया कि पेटासे प्लास्टिक की सतह पर हमला करता है, जबकि महेटासे इन चीजों को और छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पहले प्रयोगों से पता चला कि उन्होंने वास्तव में एक साथ बेहतर काम किया है, इसलिए हमने उन्हें शारीरिक रूप से जोड़ने का प्रयास करने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि हमारा नया काइमेरिक एंजाइम प्राकृतिक रूप से विकसित अलग एंजाइमों की तुलना में तीन गुना तेज है।मालूम हो कि प्लास्टिक धरती के लिए वरदान और अभिशाप दोनों है। बड़ी मात्रा में उपयोग के कारण प्लास्टिक आज धरती पर प्रदूषण के सबसे बड़े कारकों में एक हो गया है। समुद्र की गहराइयों से लेकर एवरेस्ट की ऊंचाईयों तक प्लास्टिक की मौजूदगी है। इधर-उधर बिखरे प्लास्टिक न केवल जमीन पर बल्कि पानी में भी इको सिस्टम को प्रभावित कर प्रदूषण बढ़ा रहे हैं।
सुदामा/ईएमएस 20 जून 2021