क्षेत्रीय

सडक़ पर हो रहा कबाड़ का व्यापार

12/02/2020

जिम्मेदार लापरवाह, राहगीर हो रहे परेशान
अशोकनगर (ईएमएस)। शहर में एक कारोबार ऐसा है, जिसमें बिना लाइसेंस के सालाना लाखों रुपए आमदनी होती है। मजे की बात तो यह है कि इस कारोबार में बेहिसाब कमाई के बाद भी सरकारी तंत्र कोई दखल नहीं देती। जी हां, बात कर रहे हैं शहर में अवैध तरीके से चल रही कबाड़ दुकानों की। बगैर अनुमति के चल रहे इन दुकानों पर सरकारी तंत्र का कोई नियंत्रण नहीं है।
शहर के चन्देरी रोड स्थित स्वामी विवेकानन्द स्कूल के पास कबाड़ का धंधा लंबे समय से हो रहा है। यहां ज्यादातर काम सडक़ पर ही होता है। कबाड़ में बिकी पुरानी गाडिय़ां यहां सडक़ पर ही खड़ी कर खोली या काटी जाती है। कबाड़ी लोहे के बड़े-बड़े उपकरण, पुराने टायर सहित अन्य सामान रोड पटरी से लेकर सडक़ तक रखते हैं। इसकी वजह से आए दिन दुर्घटनाएं भी होती हैं। लेकिन दुकानदारों पर कोई असर नहीं है। ज्यादातर दुकानदार भी रोड पर ही कार्य करते हैं। सडक़ पर इस तरह के कारोबार से समस्या बढ़ती जा रही है। रोड पर अतिक्रमण नपा के कर्मचारियों की मिलीभगत से जारी है। यहां पूरी सडक़ पर कबाड़ कारोबारियों और पुराना सामान बेचने वालों का कब्जा है। इसकी वजह से स्थानीय लोग काफी परेशान रहते हैं। लेकिन व्यापारियों पर इसका जरा भी असर नहीं है।

-सडक़ पर कब्जा:
शहर के भीतरी इलाकों में भी कई कबाड़ दुकानें हैं। इन दुकानों के कबाड़ सामान सडक़ों तक फैले रहते हैं। नालियों के ऊपर भी कबाड़ का ढेर लगा रहता है। कबाड़ दुकानों के सामने सडक़ के बीचों-बीच जंग लगे लोहे की ठोकाई-पिटाई करते रहते हैं। शराब की खाली बोतलें डंप की जाती है। कई बार बोतलें टूटने से कांच के टुकड़े सडक़ पर बिखर जाते हैं, जिसके चलते राह चलते लोगों के पैर जख्मी हो जाते हैं। इस पर नगर पालिका प्रशासन भी ध्यान नहीं देती।

-बिना अनुमति के संचालित हो रही दुकाने
शहर में आधा दर्जन से ज्यादा कबाड़ दुकानें हैं, जो बगैर लाइसेंस के खुलेआम चल रहे हैं। बिना अनुमति के संचालित इन दुकानों में कीमती सामानों को पानी के मोल खरीदकर कारोबारी लाखों रुपए कमा रहे हैं। इन दुकानों में कबाड़ खरीदी-बिक्री का न तो रसीद होती है और न ही कोई रिकार्ड। इनके दलाल शहर से कबाड़ खरीदकर लाते और दुकान में खपा देते हैं। इसके बावजूद इन कबाडिय़ों ने आज पर्यंत लाइसेंस लेना जरूरी नहीं समझा। हैरत की बात है कि इस व्यवसाय में पुलिस और प्रशासन का भी कोई रोकटोक नहीं करती। प्रशासनिक ढिलाई के चलते लोग इस व्यवसाय में सक्रिय नजर आ रहे हैं। लोहे के सामान व घरेलू उपयोग के सामान सहित कई कीमती सामान पानी के मोल कबाड़ी अपने दलालों के माध्यम से खरीद कर लाखों कमा रहे हैं। जबकि सरकारी खजाने में दो कौड़ी भी जमा नहीं कराया जा रहा है।

-बना रहे बाल मजदूर:
कबाड़ का कारोबार करने वाले बाल मजदूरी को भी बढ़ावा दे रहे हैं। शहर में कई ऐसे इलाके हैं, जहां निम्न वर्ग के लोग रहते हैं। ज्यादातर निम्न वर्ग के लोग गली-मोहल्लों में घूमकर कबाड़ जुटाते हैं। उनके मासूम बच्चे भी इस व्यवसाय से जुड़ गए हैं। दिनभर बोरी लेकर सडक़ों और कचरों की खाक छानते रहते हैं। शराब की खाली बोतलें इक_ा कर कबाड़ दुकानों में बेचते हैं। कबाडिय़ों द्वारा इन बच्चों को और बढ़ावा दिया जाता है। ताकि उनका व्यवसाय फल-फूल सके।
प्रवीण/12/02/2020