लेख

(कहानी) परवाह…… (लेखिका-डा. नाज़परवीन / ईएमएस)

01/08/2020

इस महामारी ने कई ज़िंदगियां बदल कर रख दीं.....। किसी बिन बुलाए मेहमान की तरह घर के एक कोने से दूसरे कोने तक, गार्डन से किचन तक अपने पैर पसारते ही जा रहा है, ये कोरोना। कब जाएगा ये कोरोना? कितना बदल गया है? सब कुछ........
लोगों के तौर-तरीके, दुःख-दर्द में साथ खड़ा हो जाना। बुरे वक्त में एक दूसरे का ख्याल रखना। सब बीते दिनों सा लगने लगा है। अब तो लोग दूर से ही हाथ जोड़कर अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कर लेते हैं.......... आह! कितना बदल गया है न सब.......
सब कुछ और नितिन भी......
नैना किचन में काम करती हुई मन ही मन उलझती जा रही थी, अपने ही प्रश्नों के जाल में। पास ही रखे अपने फोन में ज़गजीत सिंह की गज़लें सुन रही थी, जिनके शब्द नैना के कानों के बाहर से ही अपना रास्ता बदल रहे थे, मानों नैना का शरीर किचन में और आत्मा कहीं दूर.....नितिन के पास उसके अस्पताल में उसके मरीजों की बढ़ती लिस्ट को देखें जा रही हो कि कब कम होगी ये लिस्ट? कब फ्री होगा नितिन? कब नैना से बातें करेगा? कब आखिर कब?
तभी नैना की सासू मां की आवाज आती है। नैना बेटा चाय बन गयी क्या? लाई मां बस दो मिनट.. अपने दुपट्टे से आंसूओं को पूछती हुई नैना किचन से बाहर आ जाती है। मां चाय, और बाबू जी कहां है उनकी चाय भी यहीं रख देती हूं.. कह कर वापस किचन में चली गयी नैना। कुछ काम अधूरे रह गए थे। उन्हें पूरा करने....।
काम खत्म करके नैना ने रोज की तरह दो कप चाय ली और अपने रूम में चली गयी। एक कप अपने लिए और एक नितिन के लिए, जो अपना फर्ज निभा रहा था, मुम्बई के एक हॉस्पिटल में कोरोना वॉरियर के तौर पर तैनात डॉक्टर था, नितिन। नैना को नितिन की हर छोटी बात सताने लगी थी। कैसे वो चाय बनाते समय नैना से कहता-नैना चाय में दूध थोड़ा देर से डालना। कुछ देर बैठों मेरे पास, और नैना गैस धीमीं करके नितिन के पास बैठ जाती कुछ पल.....नितिन भी तो बहाना ढूंढा करता था नैना से बात करने के लिए। लेकिन अब ऐसा नहीं था.....पिछले कुछ दिनों से नितिन ने ठीक से बात भी नहीं की थी नैना से........
नैना जब भी फोन करती अकसर नितिन बिजी होता। नितिन अपने मरीजो की देखरेख में इतना बिजी रहता कि फोन उठाने का भी टाइम नहीं रहता। नैना व्हाट्सएप्प पर मैसेज छोड देती। कैसे हो नितिन? खाना खाया कि नहीं.....नितिन का जवाब कम ही आ पाता वापस। नैना की बेचैनी नितिन की मां समझ लेती थी आखिर बेटी जैसा प्यार करती थीं वो नैना को। नैना और नितिन का प्यारा रिश्ता कोरोना ने बिखेर कर रख दिया था। नैना बीमार नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे मन की अशान्ति उसे बीमार बनाए जा रही थी।
औरतें अकसर जल्दी घबरा जातीं हैं। अपनी सबसे कीमती चीज को खो देने के डर से..........। यूं तो किसी भी मुश्किल से लडने की गज़ब की क्षमता होती है उनमें लेकिन अपने साथी को खोने के ख्याल से ही सहम जाती हैं....। नितिन लापरवाह हो गए हैं, थोड़ा सा तो समय दे ही सकते हैं वो मुझे, ऐसी भी क्या व्यस्तता........अब ये रोज के सवाल थे, जिनके उत्तर नैना तलाश करने में जुटी थी। उसके इन सवालों का नितिन के पास एक ही जवाब था, अभी बिज़ी हूं बाद में बात करते हैं नैना। नैना की बात पूरी भी नहीं हो पाती कि नितिन का फोन कट जाता...।
दिन में कई बार नितिन को फोन लगाते-लगाते थकी नहीं थी नैना, लेकिन अब मन मारने लगी थी अपना। नहीं करूंगी नितिन को फोन यह कहकर दूर रख दिया अपना फोन तभी दो दिन बाद नितिन का फोन आया। हैलो नैना! कैसी हो? बहुत बिज़ी था तुम्हारे फोन का जवाब नहीं दे सका।सॉरी...! यहां कोरोना के बहुत मरीज आ रहे हैं, लेकिन सब संभाल लिया है हमारे स्टाफ ने, बहुत अच्छे डॉक्टर हैं यहां। तुम कैसी हो? नैना.....। नैना का जैसे गुबार फूंट पड़ा हो। मेरी छोड़िए आप बताइये कैसे हैं? मां कितना परेशान थी आपका फोन उठता ही नहीं, और मैं भी, कहते हुए नैना का गला भर आया। नैना रोने लगी....।
मेरी याद भी नहीं आती आपको। बहुत आती है नैना नितिन बोला। फिर एक फोन ही कर दिया कीजिए। आपका बस पांच मिनट का समय चाहिए। बहुत काम है यहां नैना दिन भर....और रात में भी! जब फ्री हो पाता हूं तुम सो जाती होगी यही सोच कर तुम्हारे भेजे सारे मैसेज पढ़ता रहता हूं और कब नींद आ जाती है, पता ही नहीं चलता, नितिन बोला। प्लीज नितिन बस पांच मिनट......रोज। बस पांच मिनट की आपकी कॉल मुझमें ऑक्सीजन का काम करती है, मैं जी उठती हूं...प्लीज। कहते हुए नैना रोने लगी। नितिन खामोशी से नैना को सुने जा रहा था...। बस पांच मिनट नितिन बोला! पांच मिनट से तुम्हारा काम चलता होगा नैना...। मुझे तो तुम्हारा पूरा टाइम चाहिए.......जैसे पहले साथ रहती थी तुम... कहते हुए नितिन खामोश हो गया। नैना के चेहरे में मुस्कुराहट वापस आ गई। नितिन.....आप भी न....कहते हुए नैना हंसने लगी। नैना मेरी पगली.... कोरोना खत्म होते ही तुझे और मां- बाबा को यहीं बुला लूंगा, मुझे परवाह है तुम सब की। फिर देखना समय ही समय होगा पहले की तरह, कहते हुए नितिन मुस्कुरा दिया।
नैना अब खुश थी। अच्छा ठीक है नितिन आप अपना फर्ज निभाइये, मैं अपनी जिम्मेदारी निभाती हूं पहले की तरह। अपना ख्याल रखना नितिन नैना ने बोला, हम जल्द ही कोरोना की जंग जीत लेंगे नैना, जल्दी मिलते हैं कहते हुए नितिन फिर अपने फर्ज को पूरा करने में जुट गया।
01अगस्त/ईएमएस