लेख

इंसान और क़ुदरत (लेखक/ईएमएस-प्रो.शरद नारायण खरे)

25/03/2020

क़ुदरत से जुड़कर रहो,होगे सदा निरोग ।
क़ुदरत है कोमल बहुत,हर सुख सकते भोग ।।

शुध्द हवा,हो सादगी,सादा हो व्यवहार ।
मिलती है नव ऊर्जा,हो रोगों की हार ।।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़े,हो क़ुदरत यदि मित्र ।
अंतर्मन में ताज़गी,जीवन बने पवित्र ।।

क़ुदरत रक्षक है सदा,उसके रहो समीप ।
दमके सूरज नित्य ही,जलता जीवन-दीप ।।

जो क़ुदरत से दूर हों,आफ़त लें वे मोल ।
नीर,भोज सब प्रकृतिमय,तो जीवन अनमोल ।।

क्षमताएं तन की बढ़ें,बढ़ जाता आवेग ।
मीत बने क़ुदरत अगर,मिले हर्ष का नेग ।।

हरियाली,उद्यान सब,हैं क़ुदरत के रूप ।
तारे,चंदा,नदी-तट,सुखमय सूरज-धूप। ।

हाथ जोड़ मिलना भला,यही प्राकृतिक भाव ।
हल्दी रोगों से लड़े,रक्खो सतत् स्वभाव ।।

बर्तन तांबे के भले,नित्य करो उपयोग ।
पीतल में भी सार है,बने लाभ का योग ।।

क़ुदरत तो इक संस्था,जो पढ़वाती पाठ।
यदि इसका सम्मान हो,तो जीवन में ठाठ ।।

क़ुदरत से हम दूर थे,इसीलिये यह मार ।
कोरोना ने आ पहुंच,किया देश पर वार ।।

घबरायें ना हम "शरद",मिलकर हो संघर्ष ।
क़ुदरत तब देगी हमें,खुशियां,व्यापक हर्ष ।।
प्रो.शरद नारायण खरे/25 मार्च2020