ज़रा हटके

भीषण तूफान से पहले मिल जाएगा अनुमान चक्रवात का पता

10/06/2021

नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत में ताउते और यास तूफान से काफी नुकसान हुआ है। मगर भविष्य में अब इन नुकसानों को कम किया जा सकता है, क्योंकि वैज्ञानिकों के एक समूह ने चक्रवाती तूफानों का जल्द पता लगाने का एक नया तरीका खोज निकाला है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अनुसार, इस तरीके में समुद्र की सतह पर उपग्रह से तूफान का पूर्वानुमान लगाने से पहले पानी में भंवर के शुरुआती लक्षणों का अनुमान लगाया जाता है। दरअसल, अब तक सुदूर संवेदी तकनीकों से इनका समय पूर्व पता लगाया जाता रहा है। हालांकि यह तरीका तभी कारगर होता है जब समुद्र की गर्म सतह पर कम दबाव का क्षेत्र ठीक से विकसित हो जाता है। डीएसटी ने कहा कि चक्रवात के आने से पर्याप्त समय पहले उसका पूर्वानुमान लगने से तैयारियां करने के लिए समय मिल सकता है। वैज्ञानिकों ने मानसून के बाद आए चार भीषण चक्रवाती तूफानों पर यह अध्ययन किया, जिनमें फालिन (2013), वरदा (2013), गज (2018) और मादी (2013) चक्रवात शामिल हैं। मानसून के बाद आए दो तूफानों-मोरा (2017) और आइला (2009) पर भी अध्ययन किया गया। पत्रिका एट्मॉस्फियरिक रिसर्च में हाल ही में यह अध्ययन प्रकाशित किया गया। अध्ययनकर्ता दल ने कहा कि मानसून के मौसम से पहले और बाद में विकसित होने वाले तूफानों के लिए कम से कम चार दिन और पहले सही पूर्वानुमान लगाने में यह नई पद्धति कारगर हो सकती है।
अजीत झा/देवेंद्र/ईएमएस/नई दिल्ली/10/जून /2021