लेख

(विचार मंथन) मंदिर अर्थव्यवस्था-आस्था का बाजारीकरण? ( लेखक- सनत जैन/ईएमएस)

22/09/2022

राम मंदिर आंदोलन के बाद से हिंदू धर्म की आस्था और मंदिर का जो बाजारीकरण हुआ है। उसने मंदिर को उद्योग की तरह कमाई का जरिया बना दिया है। अब मंदिरों की कमाई के हिसाब से उनका मान-सम्मान और आस्था भक्तों के बीच बढ़ती है।
भारत में मंदिरों से 3 लाख करोड़ से ज्यादा की आय होती है। 6 मंदिरों में अरबों रुपए की संपदा है। इन 6 मंदिरों में प्रतिवर्ष 24000 करोड़ों रुपए से ज्यादा का दान प्राप्त होता है। राम मंदिर निर्माण के लिए भक्तों ने 5500 करोड रुपए दान कर दिए। जिन मंदिरों की प्रसिद्धि हुई है।उनमें रोजाना करोड़ों रुपए का दान प्राप्त होता है। तिरुपति बालाजी मंदिर इसमें सबसे अव्वल है। पिछले एक दशक में मंदिरों की आय बड़ी तेजी के साथ बढी है।
भारत के मंदिरों में आने वाला दान और मंदिर के खर्च को, मंदिर अर्थव्यवस्था के रूप में एक उद्योग का दर्जा मिलता जा रहा है। जिस तरह देश की इकॉनमी लगातार बढ़ रही है। वैसे ही अब मंदिरों की आय और खर्चे दोनों ही बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। मंदिरों से लोगों को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है।
भारत में इस समय लगभग 9 लाख रजिस्टर्ड मंदिर हैं। 4 लाख मंदिरों में भक्त दिल खोलकर दान करते हैं। मंदिर के जरिए धार्मिक आस्था के साथ साथ राजनीतिक आस्था भी बड़ी तेजी के साथ बढ़ रही है। जिसके कारण राजनीतिक दलों का झुकाव भी अब मंदिरों की ओर हो रहा है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार देश में मंदिर की अर्थव्यवस्था 3.2 लाख करोड़ के पार पहुंच गई है। मंदिरों में दान, फूल, तेल, घी, दीपक, चूड़ी, सिंदूर, मूर्तियां,तस्वीर,पोशाक और पूजा अर्चना की सामग्री से यह उद्योग बड़ी तेजी के साथ फल फूल रहा है। मंदिर उद्योग के सैकड़ों सहायक उद्योग भी तेजी के साथ पनप रहे हैं।
मंदिरों को यदि उद्योग का दर्जा मिल जाता है। तो इसमें लाखों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और करोड़ों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। हिंदू धर्म की आस्था को बढ़ाकर इस उद्योग को मार्केटिंग के जरिए और भी बड़ा बनाने की संभावनाएं बनी हुई हैं। आस्था से किस तरह कमाई की जा सकती है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण मंदिर उद्योग है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में बाबा बैरागियों,कई शंकराचार्य, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर, कथाकारों, पंडितों की कमाई का ब्यौरा अलग है। इनको भी यदि मंदिर की इकोनामी में जोड़ दिया जाए तो यह अर्थ तंत्र में 5 लाख करोड़ रुपए का उद्योग बन जाएगा।
सनत जैन, 22 सितम्बर, 2022 (ईएमएस)