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अयोध्या में पौराणिक महत्व के धार्मिक स्थल जर्जर (लेखक-सनत जैन/ईएमएस)

02/12/2018


मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम आस्था के विषय हैं, वह भगवान भी हैं। माता सीता भगवान शिव और भगवान राम के पिता दशरथ से जुड़े पौराणिक महत्व के धर्मस्थल अयोध्या में जर्जर हो चुके हैं। इनकी सुध लेने के लिए कोई साधु-संत, महंत आगे नही आ रहे हैं। ना ही विश्व हिंदू परिषद को इसकी चिंता है। धर्म स्थली अयोध्या इस कलयुग में जैसा रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने कलयुग का जो वर्णन किया था। वैसी ही स्थिति अब अयोध्या अब देखने को मिल रही हैं।
अयोध्या में 500 से ज्यादा मंदिर जर्जर हो चुके हैं। 182 मंदिरों को तोड़ने के आदेश, अयोध्या की नगर निगम ने साधु सन्यासियों को दिए हैं। नगर निगम प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार, पौराणिक महत्त्व के भगवान राम से जुड़े मंदिरों को सुरक्षित नहीं कर पा रही है। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है। यहां पर 600 साल पुराना चतुर्भुजी मंदिर है। स्कंद पुराण में वर्णित शीश महल का मंदिर है। मान्यता है, कि राजा दशरथ ने सीता माता को मुंह दिखाई में यह भवन दिया था। अब यह मंदिर बुरी तरह जर्जर है। यहां पर कोई दर्शन करने भी नहीं आता। राम के पिता महाराजा दशरथ की यज्ञशाला का मंदिर भी लगभग 500 वर्ष पुराना है। महंत विजय दास के अनुसार राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यहां यज्ञ किया था। अयोध्या में श्री रामनिवास मंदिर भी जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। इस स्थान पर भगवान शिव साधु के वेश में जब भगवान राम का जन्म हुआ था। तब उनके दर्शन करने के लिए भगवान शिव यहां आए थे। यह मंदिर लगभग 250 साल पुराना है। किंतु यह भी काफी जर्जर हो चुका है। भगवान राम की अयोध्या पौराणिक और ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़ी हुई धर्म नगरी है। यहां पर जो मंदिर और पौराणिक महत्व के अवशेष हैं। उन्हें बचाने और संरक्षित करने के लिए यहां की हिंदू संगठन कभी आगे नहीं आए।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जन्म स्थली में मंदिर को लेकर पिछले 30 वर्षों में हिंदू समाज के बीच जन जागृति पैदा करके, इसे एक आंदोलन का स्वरूप दिया गया। जो लोग राम के नारे लगा रहे हैं। राम को आस्था का विषय बता रहे हैं, वही लोग अयोध्या के राम राज और भगवान राम से जुड़े पौराणिक महत्व के स्थलों की अनदेखी कर रहे हैं। अयोध्या के वह साधु संत, जो वास्तव में भगवान राम के प्रति आस्था रखते हुए मर्यादाओं में रहते हुए 24 घंटे भगवान राम की आराधना में लगे हैं। वह अयोध्या के जर्जर मंदिरों की स्थिति को देखकर काफी व्यथित हैं।
भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्मभूमि और राम मंदिर के निर्माण को लेकर सारे देश में आंदोलन चलाया। उसके बाद साधु-संतों अयोध्या और आसपास रहने वाले हिंदुओं के मन में एक विश्वास जगा था, कि भगवान राम की जन्म स्थली अयोध्या का पुनरुद्धार होगा। पिछले 30 वर्षों से राजनीति का केंद्र बने, अयोध्या में देश के बड़े बड़े नेता आए। बड़े-बड़े धर्माचार्य आए। इसके बाद भी भगवान राम की इस अयोध्या नगरी का उद्धार नहीं हो पा रहा है। इसको लेकर साधु संतों में भी अब निराशा का भाव उत्पन्न हो रहा है। रामलला के मंदिर का निर्माण जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी भगवान राम की नगरी अयोध्या में भगवान शिव, राजा दशरथ, मां सीता, हनुमान और उनसे जुड़ी हुई पौराणिक धरोहरों को जिसमें कोई विवाद नहीं है। उन्हें संरक्षित करने में कोई भी कदम ना उठाया जाना, लोगों को उद्वेलित कर रहा है।
अयोध्या नगर निगम द्वारा 182 जर्जर इमारतों को जो मंदिर है। उन्हें तोड़ने के आदेश देना, और उन जर्जर निर्माण (मंदिरों) को नहीं तोड़ा गया, तो नगर निगम प्रशासन द्वारा उन्हें जबरन गिराए जाने की धमकी देने से अयोध्या में रहने वाले साधु संत काफी उद्वेलित हैं। उनका कहना है कि केंद्र में भाजपा की सरकार है। राज्य में भाजपा की सरकार है। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। नगर निगम भी भाजपा की है। इसके बाद भी अयोध्या में मंदिरों की यह जर्जर स्थिति हिंदू समाज के लिए शर्मनाक है। रामलला जहां वर्तमान में विराजमान हैं। यदि वहां भव्य मंदिर का निर्माण हो भी जाएगा, और अयोध्या के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के मंदिर यदि नहीं रहेंगे। तो अयोध्या का यश कैसे बना रहेगा। राम मंदिर को लेकर पिछले तीन दशक में जो राजनीति हुई है। उसको लेकर राम मंदिर निर्माण की जो आशा आम लोगों में बनी थी, वह भी निराशा में बदलती जा रही है। लोगों को विश्वास था कि भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर का निर्माण कराकर अयोध्या के वैभव को फिर से पुनः स्थापित करेगी। किंतु केंद्र एवं राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार, ताकतवर प्रधानमंत्री होने के बाद भी रामलला के मंदिर निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। इसके साथ ही अयोध्या नगरी के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के मंदिर जर्जर हैं। भगवान राम की जन्मभूमि पर मंदिरों की जमीनों पर लोग कब्जे कर रहे हैं, बेच रहे हैं। उसके बाद भी किसी का ध्यान अयोध्या में नहीं है। केवल अपने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए भगवान राम के नाम का उपयोग करने से अब लोगों की आस्था गड़बडाने लगी है। यही कारण है, कि राम मंदिर को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना द्वारा राम मंदिर निर्माण को लेकर जो नई कवायद शुरू की गई है। उस पर आम जनता की अब कोई प्रतिक्रिया दिखाई नहीं पड़ रही है।
02नवंबर/ईएमएस