चुनावी विशेष

बदलते रहते हैं सियासत के समीकरण

09/11/2018

(धार विधानसभा चुनाव - 2018 )
धार (ईएमएस)। धार जिले की सभी सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर तय है। इस जिले के तहत सात विधानसभा सीट आती हैं ये हैं धार , गंधवानी , सरदारपुरा ,बदनावर , धरमपुरी ,कुक्षी और मनावर। फिलहाल यहाँ पांच पर भाजपा और दो सीटों का कब्ज़ा है जबकि 2008 के चुनाव में ठीक इसके उलट कांग्रेस के पास पांच और भाजपा के पास दो सीट थी। कांग्रेस के लिए कुक्षी सीट तो भाजपा के लिए मनावर सीट प्रतिष्ठा का विषय रहेगी। सत्ता के लिए इन सात सीटों की भूमिका इसलिए भी अहम है, क्योंकि दोनों खास दलों के करीब-करीब सभी प्रत्याशी राजनीतिक के अखाड़े में कद्दावर माने जाते हैं।दोनों दलों में से किसी की भी सरकार बने, इन सातों सीटों में से जीतने वाले प्रत्याशियों की खासी अहमियत होगी।
धारविधानसभा :
धार विधानसभा क्षेत्र जिले की राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला होता आया है। लगातार तीन बार से भाजपा ही यहां पर जीत का परचम लहरा रही है। पिछले दो चुनाव भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके विक्रम वर्मा की पत्नी नीना वर्मा व जिला कांग्रेस के अध्यक्ष बालमुकुंद सिंह गौतम की बीच हुए हैं। रोचक बात यह है कि दोनों ही चुनाव जीत-हार के मसले को लेकर कोर्ट में पहुंच चुके हैं। 2008 के चुनाव में एक वोट से नीना वर्मा जीती थीं। विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के एक माह पहले ही नीना वर्मा का निर्वाचन कोर्ट ने शून्य घोषित कर दिया। गौतम को विधायक का दर्जा दिया गया। उन्हें विधानसभा में सदस्य के रूप में शपथ भी दिलाई गई।2013 के चुनाव में नीना वर्मा 11 हजार से अधिक मतों से विजयी हुईं लेकिन इस बार भाजपा के ही नेता सुरेशचंद्र भंडारी ने एक चुनाव याचिका लगा दी। नीना वर्मा का निर्वाचन फिर से शून्य घोषित हो गया। हालांकि उन्हें इस मामले में फिलहाल कोर्ट से स्थगन आदेश मिला हुआ है। वर्तमान में दोनों ही पार्टियों में भितरघात की स्थिति बनी हुई है। इस तरह के हालात में 2018 का चुनावी मुकाबला बेहद रोचक होना तय है। जातीय समीकरण की बात करें तो क्षेत्र में किसी एक जाति के मतदाताओं का वर्चस्व नहीं है। राजपूत, राठौर, माली, मराठा, ब्राह्मण, पाटीदार समाज के साथ-साथ मुस्लिम वर्ग के मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। पीथमपुर में बाहर से आए मतदाताओं का अधिक प्रभाव रहता है।
गंधवानी विधानसभा:
विधानसभा चुनाव 2008 के पहले परिसीमन से गंधवानी नई विधानसभा सीट बनी। इसमें गंधवानी, बाग व तिरला विकासखंड के 45 मतदान केंद्रों को शामिल किया गया। इसके पहले गंधवानी विकासखंड के गांव व गंधवानी नगर मनावर विधानसभा क्षेत्र में आता था। जबकि बाग व टांडा क्षेत्र सरदारपुर विधानभा क्षेत्र तथा तिरला के 45 मतदान केंद्र धार विधानसभा में आते थे। तब कांग्रेस ने प्रदेश की उप मुख्यमंत्री रह चुकीं जमुनादेवी के भतीजे उमंग सिंघार को मैदान में उतारा। पहली बार हुए चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी चयन में बाजी मार गई। जबकि भाजपा परिसीमन के बाद बनी नई परिस्थितियों में प्रत्याशी चयन ठीक से नहीं कर पाई। यही वजह रही कि उमंग सिंघार चुनाव जीत गए।विधानसभा 2013 चुनाव में भाजपा की लहर होने के बावजूद उमंग सिंघार ग्रामीण क्षेत्र में अपनी पैठ के कारण जीत गए। उन्होंने भाजपा के सरदार सिंह मेढ़ा को 12326 वोटों से हराया था। यह कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती है। यहां से कांग्रेस के स्व.शिवभानू सिंह सोलंकी ने 6 बार चुनाव जीत कर 30 साल तक प्रतिनिधित्व किया। उन्हे गंधवानी आदिवासी क्षेत्र का मसिहा माना जाता था।2008 में उमंग सिंघार व भाजपा से सांसद रहते हुए छतरसिंह दरबार आमने-सामने थे लेकिन उमंग ने उन्हें 21019 मतों के अंतर से परास्त कर कांग्रेस को मजबूती से खड़ा किया है।क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता आदिवासी समाज के हैं। उसके बाद अन्य सभी वर्गों के मतदाता हैं, किंतु उनकी संख्या बहुत कम है। जीत आदिवासी समाज के वोटों पर निर्भर करती है।
सरदारपुर विधानसभा :
धार जिले की सरदारपुर विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है। इस क्षेत्र में आदिवासी समाज की आबादी सबसे ज्यादा है और उसके बाद पटेल समुदाय की भी अच्छी तादाद है। वैसे तो यह सीट कांग्रेस का गढ़ है और अबतक 9 बार कांग्रेस ने यह सीट जीती है, लेकिन फिलहाल यहां बीजेपी से वेलसिंह भूरिया विधायक हैं। 2013 में उन्होंने कांग्रेस के प्रताप ग्रेवाल को 529 वोटों से हराया था। बीजेपी ने 2008 चुनाव में यह सीट सिर्फ 529 वोटों से जीती थी। बसपा और एनसीपी क्रमश तीसरे और चौथे पायदान पर रही।साल 2008 के चुनाव में कांग्रेस के प्रताव ग्रेवाल ने बीजेपी से निवर्तमान विधायक मुकाम सिंह निंगवाल को करीब 23 हजार वोटों से पराजित किया था। बाकी छोटे दल इस चुनाव में ज्यादा कुछ कर नहीं पाए थे।क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता आदिवासी समाज के हैं। उसके बाद अन्य सभी वर्गों के मतदाता हैं, किंतु उनकी संख्या बहुत कम है। जीत आदिवासी समाज के वोटों पर निर्भर करती है।
कुक्षी विधानसभा
धार जिले की कुक्षी सीट कांग्रेस का गढ़ है और इस सीट से करीब 40 साल पार्टी का विधायक ही जीतता आया है। यह जीत अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है और यहां 2 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं।आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में इस बार जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) भी चुनाव लड़ने जा रहा है और इसके लिए संगठन की ओर से यहां एक महापंचायत भी बुलाई गई। माना जा रहा है कि इस बार जयस दोनों बड़ी पार्टियां कांग्रेस-बीजेपी के सियासी समीकरण बिगाड़ सकता है।कुक्षी विधानसभा सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। 1952 से 2013 तक 15 बार चुनाव हुए हैं। इसमें एक उपचुनाव भी शामिल है। 12 बार यहां कांग्रेस जीती है। जबकि भाजपा दो बार और एक बार जनसंघ को जीत मिली। 2013 के चुनाव में कांग्रेस के सुरेंद्रसिंह हनी बघेल ने 42 हजार 768 मतों से रिकॉर्ड जीत हासिल की थी। चूंकि यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है इसलिए अन्य जाति फैक्टर का यहां ज्यादा प्रभाव नहीं होता है। कुक्षी और निसरपुर के मतदाता कभी किसी एक दल के साथ नहीं रहे हैं। वहीं 3 मौके ऐसे भी आए, जब डही क्षेत्र के मतदाताओं ने भी कांग्रेस की तरफ से मुंह फेर लिया था। यही वजह रही कि 1962 में जनसंघ, 1990 में भाजपा और 2011 में हुए उपचुनाव में भाजपा जीती थी।
मनावर विधानसभा :
धार जिले की मनावर सीट पर आदिवासी समाज की आबादी सबसे ज्यादा है और इसी वजह से यह सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। करीब 2 लाख वोट वाली इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर रही है, फिलहाल इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है भाजपा की रंजना बघेल यहाँ से विधायक है उन्होंने कांग्रेस के निरंजन डाबर लोनी को 1639 वोटों से हराया था। 2008 के चुनाव में रंजना बघेल ने कांग्रेस के गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी को 2054 मतों से मात दी थी।
धरमपुरी विधानसभा:
नर्मदा नदी के किनारे बसी धार जिले की धरमपुरी विधानसभा की सीमा खरगोन और बड़वानी को छूती है।आदिवासी बाहुल्य धरमपुरी का अपना सुनहरा अतीत है सियासी नक्शे पर भले चमकता हो धरमपुरी लेकिन विकास के नक्शे पर तस्वीर धुंधली नजर आती है।..हालत ये है कि बुनियादी सुविधाओं तक के लिए तरस रहे हैं लोग।..सड़कों की भी हालत खराब है।स्वच्छता की रेस में भी पिछड़ा नजर आता है धरमपुरी।अतिक्रमण से भी लोग परेशान हैं। कहने को तो नर्मदा नदी के किनारे बसा है धरमपुरी लेकिन इसके बाद भी जलसंकट है।एक-एक बूंद पानी के लिए लोग तरसते दिखाई देते हैंप्रदेश के धार जिले की धरमपुरी सीट अनुसूचित जनजाति के सुरक्षित है और यहां करीब 1.90 लाख मतदाता हैं। फिलहाल यह सीट बीजेपी के पास है और यहां से कालूसिंह ठाकुर विधायक हैं।उन्होंने 2013 के चुनाव में कांग्रेस के पाँचीलाल मेड़ा को 7573 वोटों से हराया था जबकि 2008 के चुनाव में पाँचीलाल मेड़ा ने भाजपा के जगदीश मुवेल को 46654 वोटों से परास्त किया था।
बदनावर विधानसभा :
प्रदेश के धार जिले की बदनावर सीट की बात करें तो यहां पर कुल 1.85 लाख मतदाता हैं और इस सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है। यहां से कांग्रेस और बीजेपी बारी-बारी से चुनाव जीतती आई है।अभी यहाँ भंवर शेखावत विधायक है 2013 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के राजवर्धन सिंह दत्तीगाँव को 9812 वोटों से हराया था। 2008 में भाजपा के खेमराज पाटीदार को राजवर्धन दत्तीगांव ने 15142 वोटों से पराजित किया था।
------/08 नवम्बर 2018