राष्ट्रीय

मध्यप्रदेश विधानसभा 2018 विशेष (05 आरएस01एचओ)

05/11/2018

- कांटे की टक्कर के आसार, इस बार आर या पार
(खरगोन विधानसभा चुनाव -2018 )
खरगोन ( ईएमएस)। निमाड़ का प्रमुख जिला खरगोन जिले के अंतर्गत छह विधानसभा सीट आती हैं ये हैं भीकनगॉंव, खरगोन, कसरावद, भगवानपुरा, महेश्वर और बड़वाह। वर्तमान में यहाँ भाजपा और कांग्रेस का बराबर तीन तीन सीटों पर कब्ज़ा है। ताजा हालत के मुताबिक यहाँ कांटे की टक्कर के आसार हैं।
भगवानपुरा विधानसभा
भगवानपुरा विधानसभा सीट पर अब तक 13 बार हुए चुनावों में 8 बार कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार विधायक रहे। शेष कार्यकाल में जनसंघ, जनता पार्टी और भाजपा के उम्मीदवार विधायक रहे। वर्तमान में कांग्रेस के विजयसिंह सोलंकी विधायक हैं।आदिवासी अंचल की इस आरक्षित सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। इस बार मुकाबला रोचक होने के आसार हैं। 2013 में सोलंकी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के गजेंद्र पटेल को 1820 वोटों से पराजित किया था। 2008 में कांग्रेस के केदार डाबर को भाजपा जमुना सिंह सोलंकी ने 15392 वोटों से पराजित किया था। विपक्ष की भूमिका में होने के कारण सोलंकी के क्षेत्र में बड़ी योजनाएं तो आईं परंतु उन योजनाओं को लेकर कांग्रेस और भाजपा श्रेय लेने में आगे रही।विधानसभा क्षेत्र में भगवानपुरा जनपद के अलावा सेगांव जनपद भी महत्व रखती है। दोनों बड़े क्षेत्र होने से यहां राजनीतिक प्रभाव अलग-अलग हैं। यहां भौगोलिक क्षेत्र बड़ा और फलियों में बसाहट होने के कारण हर बार चुनाव प्रचार चुनौतीपूर्ण रहता है। प्रत्याशियों को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए मशक्कत करना पड़ती है। इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए जीत आसान नहीं होगी।
खरगोन विधानसभा
खरगोन विधानसभा क्षेत्र में तीन बार से भाजपा का ही विधायक है। इसमें से दो बार से लगातार बालकृष्ण पाटीदार विधायक हैं। 2003 में वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष बाबूलाल महाजन विधायक रहे। जबकि 1993 और 1998 में कांग्रेस के परसराम डंडीर विधायक रहे। इससे साफ है कि किसी समय कांग्रेस के दबदबे वाली यह प्रतिष्ठित सीट वक्त के साथ भाजपा की झोली में आ गई। 2013 के चुनाव में बालकृष्ण पाटीदार ने कांग्रेस के रवि रमेश को 6825 वोटों से पराजित किया था २००८ में उन्होंने कांग्रेस के रामलाल पाटीदार को 24750 मतों से मात दी थी। कांग्रेस सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे सुभाष यादव के निधन के बाद कांग्रेस का इलाके में दबदबा कम हुआ। उनके बेटे अरुण यादव केंद्रीय मंत्री व प्रदेशाध्यक्ष पद पर रहने के बावजूद भी क्षेत्रीय गुटबाजी को दूर नहीं कर सके। पाटीदार और यादव समाज के साथ ही यहां ब्राह्मण व वैश्य समाज प्रमुख वोट बैंक रहा है।
भीकनगांव विधानसभा
भीकनगांव विधानसभा सीट खरगोन जिले में आती है। खंडवा के नजदीक होने के नाते यह क्षेत्र महाराष्ट्र की सीमा से सटा हुआ है। यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। भीकनगांव विधानसभा सीट 1962 में वजूद में आई और 1977 से एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है। यह आदिवासी बाहुल्य इलाका है। यहां कुल मतदाता 2 लाख 20 हजार 713 हैं।वर्तमान में इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। झूमा सोलंकी यहां की विधायक हैं। इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला होता आया है। भीकनगांव विधानसभा सीट पर लगातार तीन बार बीजेपी ने जीत हासिल की थी। 2013 की जीत से पहले कांग्रेस को इस सीट पर 1993 में जीत मिली थी। इस सीट पर 5 बार कांग्रेस और 5 बार बीजेपी को जीत मिली है।2013 के चुनाव में कांग्रेस के झूमा सोलंकी ने बीजेपी के नंदा ब्राह्मणे को 2300 से ज्यादा वोटों से हराया था। सोलंकी को इस चुनाव में 72060 वोट मिले थे तो वहीं नंदा ब्राह्मणे को 69661 वोट मिले थे। 2008 के चुनाव की बात करें तो इस बार जीत बीजेपी को मिली थी। बीजेपी के धूल सिंह दावर ने कांग्रेस की संगीता पटेल को 14 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। धूल सिंह क 47216 वोट मिले थे तो वहीं संगीता पटेल को 33065 वोट मिले थे।
महेश्वर विधानसभा
खरगोन जिले में आने वाली महेश्वर विधानसभा सीट पर इस बार कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर है। फिलहाल यह सीट बीजेपी के पास है। यहां विधायक हैं राजकुमार मेव। उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सुनील खांडे को हराया था।देवी अहिल्याबाई होल्कर शासनकाल में राजधानी रहा महेश्वर वैसे तो आरक्षित सीट है। यहां जब प्रदेश में कांग्रेस का शासन था तब साधौ परिवार का इस सीट पर दबदबा रहा। डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ के राज्यसभा सदस्य बनने पर हुए उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार राजकुमार मेव विधायक बने। फिर उनकी जीत का सिलसिला जारी रहा।पहले उन्होंने डॉ. साधौ के भाई देवेंद्र साधौ को हराया। फिर 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव के कट्टर समर्थक रहे सुनील खांडे को शिकस्त दी।महेश्वर सीट के जातीय समीकरण की बात की जाए तो विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति बहुल है। पाटीदार, ब्राह्मण, वैश्य समाज भी अपनी पहचान रखते हैं। लेकिन अब तक खड़े हुए बाहरी प्रत्याशियों को लोगों ने मत दिए हैं।
बड़वाह विधानसभा
बड़वाह विधानसभा सीट खरगोन जिले में आती है। यह क्षेत्र नर्मदा किनारे बसा है। बड़वाह शहर मिर्च उत्पादन के लिए मशहूर है। यहां कुल 2 लाख 12 हजार 807 मतदाता हैं। वर्तमान में इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है। हितेंद्र सिंह सोलंकी यहां के विधायक हैं। बीते दो चुनावों से यहां पर बीजेपी को ही जीत मिलती आई है।2013 के चुनाव में बीजेपी के हितेंद्र सिंह सोलंकी ने निर्दलीय उम्मीदवार रहे सचिन बिरला को हराया था। हितेंद्र सिंह सोलंकी को इस चुनाव में 67600 वोट मिले थे तो वहीं सचिन बिरला को 61970 वोट मिले थे। दोनों के बीच जीता-हार का अंतर 5 हजार से ज्यादा वोटों का था।2008 के चुनाव में भी बीजेपी के हितेंद्र सिंह सोलंकी को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस को ताराचंद पटेल को 16 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। हितेंद्र सोलंकी को इस चुनाव में 55448 वोट मिले थे तो वहीं कांग्रेस के ताराचंद को 38974 वोट मिले थे।
कसरावद विधानसभा
खरगोन की कसरावद विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सचिन यादव ने यहां जीत हासिल की थी। उन्हें 79685 वोट मिले थे। वहीं, बीजेपी प्रत्याशी आत्मा राम पटेल दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें 67880 वोट मिले थे।इसके पहले 2008 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के आत्माराम यहां जीते थे। उस वक्त वर्तमान विधायक सचिन यादव के पिता सुभाष यादव इस सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन उनकी हार हुई थी। इसके बाद 2013 में उनके बेटे सचिन यादव ने जीतकर अपने पिता की हार का बदला लिया।बता दें कि 1993, 1998 और 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता सुभाष यादव यहां से लगातार चुनाव जीते थे। हालांकि सुभाष यादव अपनी जिंदगी का आखिरी चुनाव इसी सीट से उस वक्त हारे जब पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर थी।अब बीजेपी एक बार फिर इस सीट पर अपना कब्जा जमाने में लगी है। उधर सचिन भी लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय बने हुए हैं। कांग्रेस खेमे की सीट होने से बीजेपी सत्ता के बल पर इस सीट पर अपना कब्जा जमाने का प्रयास करेगी।कसरावद सीट के जातीय समीकरण की बात की जाए तो यादव समाज का यहां अच्छा ख़ासा दबदबा है। इसके अलावा यहां पाटीदार, राजपूत व पटेल समाज राजनीतिक रूप से दबदबा रखते हैं।
------/31 अक्टूबर 2018