लेख

बेटियों को आत्मनिर्भर बनाती शिवराज सरकार (लेखक - निलय श्रीवास्तव/ईएमएस)

14/05/2022

मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां बालिकाओं के शैक्षणिक विकास तथा महिलाओं के सम्मान के लिये अनेक योजनाएं तथा कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। इस दिशा में वर्ष 2007 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाडली लक्ष्मी योजना की अभिनव पहल की थी। उनके अथक प्रयासों से इस योजना को क्रियान्वित किया गया। लम्बे अंतराल के बाद इसके सुखद तथा आश्चर्यजनक परिणाम सामने आये हैं। सबसे अहम यह है कि लिंगानुपात में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चाहते हैं कि बेटियां खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। उनके शब्दों में बेटियों के बारे में समाज में पायी जाने वाली नकारात्मक सोच, लड़कों के मुकाबले उनकी कम होती संख्या मुझे हमेशा से कचोटती और झकझोरती रही है। बेटियों के लिये कुछ सकारात्मक करने की तड़प मेरे मन में सदा से रही है। सौभाग्य से प्रदेश की बेटियों के लिए कुछ करने का अवसर मुझे मुख्यमंत्री बनने के बाद मिला। मैंने बिना देरी किए बालिकाओं के सर्वागीण विकास को सुनिश्चित बनाने वाली योजनाएं बनाने का निश्चय किया। मेरे इस निश्चय के परिणामस्वरूप बनी योजनाओं में से एक है लाडली लक्ष्मी योजना। इस योजना से हम समाज का नजरिया बदलने में सफल रहे हैं। मेरा संकल्प है कि प्रदेश की बेटियां सशक्त होकर आगे बढ़ें। आज प्रदेश में बयालिस लाख से अधिक लाडली लक्ष्मी बेटियां हैं। मैं चाहता हूं कि मेरी बेटियां प्रशासनिक अधिकारी, डाक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्राध्यापक बने और हमारे प्रदेश का नाम रोशन करें। लाडली लक्ष्मी योजना को लागू किए डेढ़ दशक से अधिक का समय बीत चुका है। इस योजना का लाभ लेकर हजारों बेसहारा निर्धन कन्याएं स्वावलम्बी बन गयीं। अनेकों शादी कर अपना घर बसा चुकी हैं। लाडली लक्ष्मी योजना को मध्यप्रदेश में सफलता मिलते देख देश के कई राज्य इसका अनुसरण कर रहे हैं। दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, गोवा राज्यों ने लाड़ली लक्ष्मी योजना को लागू किया है।
मध्यप्रदेश में लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ अधिक से अधिक बालिकाओं को मिले इसे ध्येय बनाकर सरकार ने अनेक योजनायें बनाई हैं। प्रदेश में अब हर वर्ष 2 से 12 मई तक लाड़ली लक्ष्मी उत्सव मनाया जाएगा। साथ ही यह भी निर्धारित किया गया कि ऐसी ग्राम पंचायत जहां लाडलियों का सम्मान हो, बाल विवाह न हो, स्कूलों में शत प्रतिशत प्रवेश हो तथा कोई लाड़ली कुपोषित न हो, उस ग्राम पंचायत को मध्यप्रदेश सरकार लाड़ली लक्ष्मी पंचायत का पुरस्कार प्रदान करेगी। विगत 8 मई को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में लाडली लक्ष्मी योजना पर केंद्रित एक गरिमामय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाडली लक्ष्मी योजना-2 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की, अब आईआईटी, आईआईएम सहित अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के लिये लाड़ली लक्ष्मी की पूरी फीस सरकार भरेगी। कालेज में प्रवेश करने पर साढ़े बारह हजार रुपए अलग से दिए जाएंगे। मध्यप्रदेश में 52 जिलों के 313 विकासखंडों के 52,117 गांवों में योजना के तहत अब तक 42 लाख से अधिक बालिकाओं का पंजीयन किया जा चुका है। लाडली लक्ष्मी योजना निधि में 10,654 करोड़ रुपयों की राशि जमा की गई हैं। जरूरतमंद बालिकाओं के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लाडली लक्ष्मी ई-संवाद ऐप का लोकार्पण भी किया गया है। इस ऐप के माध्यम से बालिकाएं सीधे मुख्यमंत्री से बात कर सकती हैं। यह अभिनव प्रयोग मध्यप्रदेश में ही संभव हुआ है।
लाडली लक्ष्मी योजना की सफलता का प्रमाण स्पष्ट है कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में एक हजार बेटों पर 956 बेटियां जन्म ले रही हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ये आंकड़ा बराबरी पर लाने के लिए प्रयासरत हैं। आज जबकि बदलते सामाजिक परिवेश के साथ बेटियों के प्रति लोगों का दृष्टिकोण भी बदल रहा है। यही वजह है कि अनेक क्षेत्र ऐसे हैं जहां बालिकाओं ने अपना वर्चस्व स्थापित किया है। हाल ही में आए कुछ प्रतियोगी परिक्षाओं के परिणाम और अनेक खेल आयोजनों में बेटियों ने अपना परचम लहराया है। ऐसे में यदि उन्हें कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो वे अपने पैरों पर खड़ी होकर दिखला सकती हैं। इस दिशा में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री प्रयासरत भी हैं और प्रोत्साहन भी दे रहे हैं। हम इस बात को दावे के साथ कह सकते हैं कि बतौर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने डेढ़ दशक लंबे कार्यकाल के दौरान बेटियों की दुनिया में मुस्कान बिखेरी है। बेटियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध शिवराज सरकार प्रदेश में ऐसा माहौल तैयार कर रही है जहां बेटियां आसमां से कहेंगी थोड़ा और ऊंचा उठ जाओ।
.../ 14 मई 2022