लेख

जीवन जीने की कला (लेखक - हरिओम गुप्ता / ईएमएस)

09/10/2019

वर्तमान में प्रत्येक व्यक्ति सिर्फ मैं , मैं अपने को सीमित किए हुए हैं। हमारा मन एवं मस्तिष्क सिर्फ अनुकूलता एवं प्रतिकूलता मैं व्यस्त रहता है, सुबह बिस्तर से उठने से लेकर दिन भर की सारी उर्जा एवं परिश्रम का फोकस हम अपनी उपलब्धियों को पाने हेतु संघर्ष करते रहते हैं। इसी उहापोह में हम अपने मन को शरीर के साथ सोने अथवा नींद का उपक्रम कर संयत होने का प्रयास करते हैं प्रयास प्रयास करते प्रयास करते हैं फिर भी हम पूरी तरह खुश नहीं रह पाते या खुश रहते हैं तो आंशिक क्षणिक रूप से किसी दूसरी की बड़ी खुशी एवं प्रगति को देखकर फिर हम भी उसे पाने में आगे बढ़ जाते हैं.। जीवन जीने के लिए व्यक्ति की न्यूनतम आवश्यकता जो पहले रोटी कपड़ा और मकान तक सीमित थी वह अब भौतिक एवं सांसारिक जगत की आधुनिक चकाचौंध एवं प्रगति के सभी आयामों को पाने के लिए हम निरंतर दिन रात कार्य करने की प्रक्रिया में संलग्न रहते हैं फिर भी सब कुछ पाने पर भी हम संपूर्ण खुश नहीं रह पाते। जब हम संपूर्ण खुश नहीं रह पाते तो हम दूसरों को खुशी भी नहीं दे पाते और ना ही उनकी खुशियों में शामिल हो पाते हैं हम निरंतर आधी - व्याधि एवं उपाधि में घिरे रहते हैं।आधी अर्थात मानसिक चिंता व्याधि अर्थात शारीरिक बीमारी एवं उपाधि अर्थात बौद्धिक विकार अर्थात में ही सब कुछ हूं'।यदि हम सुखमय जीवन की कल्पना करते हैं तो सर्वप्रथम हमको सकारात्मकता का भाव अपने मन में मस्तिष्क में लाना होगा। प्रात उठकर प्रथम कार्य अपने मन मस्तिष्क से सभी नकारात्मक विचारों को बाहर का रास्ता दिखा कर सकारात्मकता की ऊर्जा से परिपूर्ण होना आवश्यक होगा।यदि अपने मन में ऐसा दृढ़ निश्चय करेंगे तो हमारा शरीर भी पूरे समय हमें सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा ।
यदि हमारा मन स्थिर हुआ तो निश्चित ही हम अपने संकल्पों उद्देश्यों को सरलता से प्राप्त कर सकेंगे। मन की स्थिति के अनुरूप ही हमारी वाणी होगी वैसा ही हमारा कर्म होगा और हमारी अच्छी आदत बनेगी. मन में किसी भी संकल्प के चयन से पहले विचार कर निर्णय लेना उपयुक्त होगा.
हमारा मन एवं शरीर गलत कार्यों की ओर जल्दी आकर्षित होता है तथा नकारात्मकता को देखकर उस पर आगे बढ़ने का प्रयास करता है। यही आगे चलकर हमारे दुख का कारण बनता है हमारा जीवन व्यस्त तो है परंतु इसे सरल भी बनाया जा सकता है इसके लिए अच्छे खानपान के साथ-साथ अच्छे विचार एवं सकारात्मक सोच की आवश्यकता होगी तभी हम क्रोध गुस्सा एवं दूसरों की निंदा से बच सकते हैं।जब हमारा मन निर्मल होगा तो कर्म भी उसी के अनुरूप होंगे हमें अपने मन से छल कपट को दूर करने के लिए अपने जीवन में "ज्ञान" के मद का त्याग पूजनीय होने का त्याग उच्च जाति के होने का अभिमान का त्याग धन-संपत्ति के अभिमान का त्याग तथा अन्य से ज्यादा सुंदर शरीर होने के अभिमान का त्याग करने पर ही हमारा जीवन सकारात्मकता से भरा हो कर प्रेम से परिपूर्ण होगा। जब हमारा मन सरल और पवित्र होगा तो वाणी अपने आप पवित्र हो जावेगी और वाणी की पवित्रता शरीर को सुंदर बना देगी उसी शरीर से हमें जीने की सही राह मिलेगी। मानव कल्याण के प्रत्येक कर्म करने से हमें सफलता मिलती है आज का मनुष्य दोहरा जीवन जीने का आदी है वह अकेले में वह सभी कर्म करता है जो अनुचित होकर हानिकारक है।जबकि सार्वजनिक जीवन में सबके सामने वह अपने को सही व उचित बताता है व्यक्ति के विचार और व्यवहार में कोई मेल नहीं होने से वह जो सोचता है वह बोलता नहीं है और जो बोलता है वह करता नहीं है। हम मन वचन और कर्म के कई रूप लेकर बहुरूपिया जैसी जिंदगी जीते हैं. ध्यान रखना होगा कि सरल स्वभाव से जीवन में सफलता जल्दी एवं स्थाई मिलती है। विश्वसनीय वह होता है जिसके हृदय में सरलता हो और मन सत्य के प्रति निष्ठावान हो यदि हमारा मन सरल होगा तो हम लोभ के चंगुल से बच सकेंगे।लालच पाप ही नहीं बुरे कर्म का जनक माना जाता है।
मन को पवित्र रखने के लिए लालच छोड़ना आवश्यक है. मन की पवित्रता से सभी हमें मित्र एवं हितेषी लगने लगते हैं।परिवार के सभी सदस्यों के विचार एक जैसे हो यह आवश्यक नहीं है किसी ना किसी सदस्य का भाव या विचार नकारात्मक हो सकता है तो क्या हम उससे सहमत होकर उसे छोड़ें या फिर उसके अनुरूप होकर वैसे बने यह हमारे ऊपर निर्भर करता है। उसके विचारों में बदलाव लाने की कोशिश से वह सदस्य भी अपने को परिवार में अकेला नहीं पाएगा. लोगों का व्यवहार और प्यार कैसा भी हो परिस्थिति प्रतिकूल होने पर भी हमें अपने व्यवहार को सकारात्मक एवं प्यार तथा स्नेह देने वाला बनाना चाहिए प्रेम आत्मा का स्वाभाविक गुण है अतः सभी के मन को दुखी करने वाली बातों का त्याग कर प्रेम एवं स्नेह रखकर या बांटकर हम अपने जीवन को जीने की महत्वपूर्ण कला के रूप में स्वीकार कर सकते हैं तथा अपने अच्छे मनुष्य होने का प्रमाण भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
09अक्टूबर/ईएमएस