लेख

(विचार-मंथन) जानलेवा मांझे पर सख्ती (लेखक-सिद्धार्थ शंकर / ईएमएस)

14/01/2020


मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का दौर शुरू होते ही देश में कई जगह जानलेवा मांझे से जुड़ी घटनाएं सामने आने लगी हैं। यूपी के मुरादाबाद और हापुड़ के साथ गुजरात के मुरादनगर में मांझे ने राहगीरों को बुरी तरह घायल कर दिया। उनकी जान जाते-जाते बची। हालांकि, इससे पहले देश में कई लोग मांझे के चलते जान गंवा भी चुके हैं। देखा जाए तो पतंगबाजी दुनियाभर में मशहूर है। कई देशों में अलग अलग तरह के पतंगबाजी महोत्सव मनाए जाते हैं, जो वहां के पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। एक-दूसरे की पतंग काट कर जीत का जो मजा मिलता है वह पतंगबाजों के लिए अद्भुत होता है। पतंग काटने में हवा का रुख और पतंग की कलाबाजी के साथ पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाली डोर यानी मांझा का भी खास महत्व होता है। पतंग में आगे की ओर अलग तरह के मांझे व लोहे के तार तक का प्रयोग होता है। पतंग के साथ लगे मांझे के बाद एक अलग किस्म की डोर लगाई जाती है। पतंग के साथ लगा मांझा ही दूसरी पतंग के मांझे को रगड़ता है और उसे काट देता है। मांझा दूसरी पतंग की डोर को काट सके, इस के लिए मांझे में कांच और लोहे का बुरादा लगाया जाता है। देश में कॉटन के धागे से तैयार डोर बनाई जाती है।
हाल के कुछ सालों में चीन से नायलॉन से तैयार की गई डोर बाजार में आने लगी है। नायलॉन की डोर आसानी से टूटती नहीं है। उस के ऊपर जब लोहे और कांच का बुरादा चढ़ाया जाता है तो यह कॉटन वाले मांझे से उड़ रही पतंग की डोर को आसानी से काट देती है। चाइनीज मांझे से पतंग के साथ उड़ाने वाले के हाथ भी कटने लगे हैं। सब से खतरनाक काम तो तब होता है जब कटी हुई पतंग किसी साइकिल या मोटरसाइकिल सवार के गले, मुंह या हाथ में लिपट जाती है। इससे कई बार गले की नसें तक कट जाती हैं। इस तरह की कई घटनाएं देश में घट चुकी हैं। अभी पिछले साल दिल्ली के तिमारपुर इलाके में 18 साल का युवक बाइक से कुछ सामान लाने निकला था, लेकिन बीच में एक कटी पतंग का धागा उसके गले में उलझ गया। तीखे मांझे से लैस धागे से उसकी गर्दन काफी गहराई तक कट गई और ज्यादा खून बहने से आखिरकार उसे नहीं बचाया जा सका।
खेल खेलना या मनोरंजन किसी का भी हक हो सकता है। लेकिन अगर वह किसी दूसरे और उस खेल से अनजान व्यक्ति के लिए जानलेवा बनता है तो इसे किस आधार पर सही ठहराया जा सकता है? पिछले कुछ सालों के दौरान पतंग के मांझे की वजह से लोगों की जान जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इस मसले पर काफी चिंता भी जताई गई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई, लेकिन आज भी हालत यह है कि इस तरह के जानलेवा धागों की खुले बाजार में बिक्री में कोई कमी नहीं आई है। प्रशासन की ओर से बरती गई इस लापरवाही और आम लोगों की गैरजिम्मेदारी की कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है। देश में चाइनीज मांझे को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने प्रतिबंधित कर रखा है। बावजूद इसके चीन से आए मांझे लोगों की जान का सबब बन रहे हैं। नायलॉन के साथ सिंथैटिक मटेरियल से तैयार दूसरे मांझे खतरनाक होते हैं।
कानून के अनुसार इस तरह के मांझे से केवल पतंग उड़ाना ही गुनाह नहीं, बल्कि इस मांझे को बेचना भी बड़ा अपराध है। ऐनवायरनमैंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 की धारा-5 के अंतर्गत इस के इस्तेमाल पर पांच साल की सजा और एक लाख रुपए तक का जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है। यह निजी फर्म, कंंपनी अथवा सरकारी कर्मचारियों पर भी लागू होता है। भारत में चाइनीज नायलॉन के धागे की खपत शुरू हो गई। अब चाइनीज नायलॉन के धागे पर मांझा तैयार करना सरल हो गया है। कांच और लोहे के बुरादे को जब चावल के मांड के साथ इस पर लगाया जाने लगा तो यह कॉटन के धागे की तरह टूटता नहीं है। जल्दी न टूटने के कारण यह पतंग उड़ाने वालों के लिए भी खास हो गया। इस से अब दूसरी पतंग को काटना आसान हो गया है। इस कारण से चाइनीज नायलॉन से तैयार मांझा पतंगबाजी की पहली पसंद बन गया है।
बहरहाल, पतंग कटने के बाद धागा समेटने या फिर पतंग के साथ काफी निचले स्तर से गुजरता धागा आमतौर पर दिखाई नहीं देता यह अगर एक झटके से व्यक्ति के शरीर से गुजर भर जाए तो गहरा घाव तक हो सकता है। खासतौर पर मोटरसाइकिल की सवारी करने वाले लोगों की नजर चूंकि सड़क पर होती है, इसलिए धागे को देख पाना उनके लिए आमतौर पर मुश्किल होता है और कई बार वे उस जानलेवा धागे की चपेट में आ जाते हैं। यह कहा जाता है कि ये धागे चीन से भारतीय बाजारों में आ रहे हैं। हो सकता है कि यह तथ्य हो। लेकिन इसके अलावा भी पतंग के शौकीन लोग स्थानीय स्तर पर नायलॉन के धागों पर कांच का चूरा, खतरनाक अधेसिव, एल्यूमीनियम ऑक्साइड, जिरकोनिया ऑक्साइड और मैदा जैसी चीजों से तैयार लेप चढ़ा कर उसे मारक बना देते हैं। लेकिन सच यह है कि आज ये धागे कुछ लोगों के लिए पतंग काटने या इसके जरिए मनोरंजन करने का जरिया हैं तो किसी का गला भी कट जा रहा है। अब वक्त है कि खतरनाक मांझे को लेकर संवेदनशीलता बरती जाए और इसे रोकने के लिए कानून का पालन भी सुनिश्चित किया जाए।
14जनवरी/ईएमएस