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कर्नाटक चुनाव आयोग के दूत हैं राहुल द्रविड़, पर इस बार नहीं कर पाएंगे मतदान

15/04/2019

बेंगलुरु (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और मिस्टर भरोसेमंद के नाम से मशहूर राहुल द्रविड़ कर्नाटक चुनाव आयोग के ऐंबैसडर (दूत) हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कर्नाटक में 18 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे लेकिन राहुल के लिए परेशानी वाली बात यह है कि स्वयं इस बार मतदान नहीं कर पाएंगे। राहुल का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था फिर दोबारा शामिल नहीं किया गया। कर्नाटक में सड़कों पर जगह-जगह राहुल के पोस्टर दिख जाएंगे। इन पोस्टरों के माध्यम से राहुल अपील करते हुए दिखते हैं कि 'लोकतंत्र की जीत के लिए मतदान करें', लेकिन इस साल चुनाव में राहुल अपने ही मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। द्रविड़ और उनकी पत्नी विजेता अब इंदिरानगर से आरएमवी एक्सटेंशन के अश्वथनगर में शिफ्ट हो चुके हैं। शिफ्ट होने के बाद उन्होंने इंदिरानगर की मतदाता सूची से अपना नाम हटाने का आवेदन किया था। उस सूची से उनका नाम तो हट गया लेकिन नई जगह की मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए राहुल ने फॉर्म नहीं भरा। डोम्लूर सब डिवीज़न के सहायक निर्वाचन रिटर्निंग अधिकारी बासावराजू मागी ने इस बात की पुष्टि की है कि द्रविड़ के भाई विजय ने राहुल और उनकी पत्नी का नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए फॉर्म जमा किया था। मागी ने कहा, 'नाम हटवाने के बाद राहुल द्रविड़ ने नाम दोबारा शामिल करवाने के लिए फॉर्म 6 नहीं भरा था। अगर उन्होंने फॉर्म 6 भरा होता तो उनका नाम मतदाता सूची में होता।'
माथीकेर सब-डिविजन की असिस्टेंट इलेक्ट्रॉल रिटर्निंग ऑफिसर रूपा ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की स्पेशल ड्राइव के दौरान कुछ ऑफिसर राहुल द्रविड़ के घर भी गए थे लेकिन उन्हें घर में प्रवेश नहीं मिला। उन्हें बताया गया कि राहुल द्रविड़ विदेश में हैं और उन्होंने अपना नाम मतदाता सूची में डालने का कोई संदेश नहीं दिया है। हालांकि बाद में द्रविड़ ने चुनाव अधिकारी बासावराजू मागी से बात की और पूछा कि क्या उनका नाम इंदिरानगर मतदाता सूची में शामिल हो सकता है। मागी ने कहा, 'द्रविड़ स्पेन में थे लेकिन वह किसी भी कीमत पर वोट डालना चाहते थे। दुर्भाग्यवश उनका नाम शांतिनगर की मतदाता सूची से हटा दिया गया था। मैंने उन्हें बताया कि अगर वह चाहते हैं कि उनका नाम शांतिनगर मतदाता सूची में हो तो उन्हें फॉर्म 6 जमा करना होगा और ऐसा 23 अप्रैल के बाद ही हो सकता है जब चुनाव आयोग इसकी अनुमति देगा।'
विपिन/ ईएमएस/ 15 अप्रैल 2019