क्षेत्रीय

मीजल्स रूबेला वैक्सीन टीकाकरण अभियान के तहत कार्यशाला सम्पन्न

10/01/2019

अशोकनगर (ईएमएस)। राष्ट्रीय मीजल्स-रूबेला वैक्सीन टीकाकरण अभियान के तहत जिले के 9 माह से 15 वर्ष तक के 2 लाख 53 हजार बच्चों को 15 जनवरी से 15 फरवरी के बीच टीकाकरण किया जायेगा। उक्ताशय की जानकारी खसरा रोग निर्मूलन एवं रूबेला रोग नियंत्रण एवं अभियान के प्रति जनसामान्य को जागरूक किए जाने हेतु गुरूवार को ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित मीडिया कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेआर त्रिवेदिया द्वारा दी गई।
कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. त्रिवेदिया ने बताया कि राष्ट्रीय मीजल्स-रूबेला वैक्सीन टीकाकरण अभियान के प्रति जनजागरूकता लाने में मीडिया की अहम् भूमिका होगी। मीडिया कर्मियों द्वारा इस अभियान का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार कर लोगों को जागरूक करें जिससे 9 माह से लेकर 15 वर्ष तक का कोई भी बच्चा टीकाकरण से बंचित न रह सके। डॉ. फुंकवाल ने बताया कि 15 जनवरी से 15 फरवरी तक चलने वाले इस टीकाकरण अभियान के तहत जिले के 9 माह से लेकर 15 वर्ष तक लगभग 2 लाख 53 हजार 901 बच्चे कवर होंगे। उन्होंने ने बताया कि मीजल्स रूबेला रोग से घबराने की कोई जरूरत नहीं है, 1985 से लेकर अभी तक करोड़ों बच्चों को टीका किया जा चुका है। 123 राष्ट्रों में इसी टीके से मीजल्स एवं रूबेला(एमआर) का सफाया किया जा चुका है। इस अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. एलडीएस फुंकवाल, जिला मलेरिया अधिकारी श्रीमती दीपा गंगेले, सहायक संचालक जनसंपर्क एसएम सिद्दीकी, प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक चैनल के मीडिया कर्मी उपस्थित थे।
रूबेला के लक्षण:
रुबेला के लक्षणों में कम बुखार, मिचली और प्रमुख रूप से गुलाबी या लाल चकत्तों के निशान शामिल हैं, जो लगभग 50-80 प्रतिशत मामलों में उत्पन्न होते हैं। चकत्ते प्राय: चेहरे पर निकलते हैं, नीचे की ओर फैलते हैं और 1-3 दिनों तक रहते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 2-3 दिनों के बाद चकत्ते निकलते हैं। चकत्ते निकलने के 1-5 दिनों तक की सर्वाधिक संक्रामक अवधि होती है। रुबेला विशिष्ट रूप से विकसित हो रहे भ्रूण के लिए खतरनाक होता है। वायरस वायुजनित श्वसन के छींटों द्वारा फैलता है। संक्रमित व्यक्ति रुबेला के चकत्तों के निकलने के एक हफ्ते पहले भी, और इसके पहली बार चकत्ते निकलने के एक हफ्ते बाद तक संक्रामक हो सकते हैं। यह बहुत ही संक्रामक होता है जब चकत्ता पहली बार निकलता है। सीआरएस के साथ जन्मे बच्चे एक वर्ष से अधिक समय तक दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। रुबेला के मामले शीतऋतु के अंत में या बसंत के शुरुआत में अपने चरम पर होते हैं।
ईएमएस/प्रवीण/10/01/2019