लेख

(पुस्तक चर्चा) कृति ... गांव मेरा देस (रचनाकार .... श्री भगवान सिंह / ईएमएस)

01/12/2018

समीक्षक ... विवेक रंजन श्रीवास्तव

कुल दस लेख, पृष्ठ संख्या २५६ मतलब बहुत विस्तार से देशज, आत्मीय अभिव्यक्ति से अपने गांव के परिवेश पर संस्मरणात्मक लेखो का संग्रह है " गाव मेरा देस "। शीर्षक में ही देश की जगह देस शब्द का प्रयोग ही बताता है कि अपने गांव से जुड़े ठेठ मनोभाव अंतरंगता से लेखो में हैं। लेखक श्रीभगवान सिंह गांधीवादी दृष्टि के लिये सम्मानित हो चुके हैं। वर्तमान ग्लोबल विलेज के परिदृश्य में उन्होने अपने गांव के बचपन, शिक्षा, लोकाचार, तीज त्यौहार मेले ठेले, संयुक्त परिवार के संस्कारो, गांवो की स्वचालित परम्परागत व्यवस्थाओ का प्रवाहमान शैली में पठनीय वर्णन किया है। पुस्तक आकर्षण पैदा करती है, व हमें अपने गांव की स्मृति दिलाती है। एक तरह से ये निबंध उनकी अपनी जीवनी हैं, पर शैली ऐसी है कि उससे प्रत्येक पाठक कुछ न कुछ बौद्धिक व मानसिक खुराक ले लेता है।
01दिसम्बर/ईएमएस