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खतरनाक है शीर्ष संस्थाओं की साख चौपट होना (लेखक-अजित वर्मा / ईएमएस)

02/12/2018

सीबीआई हो या ईडी, सुप्रीम कोर्ट हो या सीएजी, सीवीसी हो गया रिजर्व बैंक सब पर पहले भी राजनैतिक दबावों की चर्चा होती थी, लेकिन पिछले साढ़े चार सालों में विपक्षियों को आतंकित करके उनसे दुश्मनी भँजाने और उनका फिर भया दोहन करने के लिए उनका उपयोग करने की जितनी चर्चाएं हुई हैं, घटनाएं घटित हुई हैं, उतनी पहले कभी नहीं हुई थीं, और मोदी सरकार पर तो विपक्ष का दो टूक आरोप है कि ‘कमल’ खिलाने के लिए सारी संवैधानिक संस्थाओं को उसने कीचड़ में डुबो दिया है। हालत यह है कि सबकी साख और विश्वसनीयता धूल धूसरित हो गई है। स्थिति यह हो गई है कि राज्य सरकारें जाँच के लिए सीबीआई को दी गई आम सहमति ही वापस ले रही हैं। आशंका यह है कि इस टकराव से देश का संघीय स्वरूप ही खतरे में पड़ जायेगा।
ताज मामला सीबीआई का है जहाँ आपसी लड़ाई में आला अफसर निर्वत्र हुए जा रहे हैं। आपसी संघर्ष के बीच सीबीआई डीआईजी मनीष कुमार सिन्हा ने अपने तबादले के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी है और कहा कि उनका तबादला एक अहम मामले में जांच की दिशा को बदलने के लिए किया गया है। अर्जी में मनीष कुमार ने दावा किया कि जांच के दौरान एक आरोपी ने मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का नाम लिया था। एनएसए डोभाल का नाम आने के बाद इस मामले में नया मोड़ आ गया है। मनीष कुमार से कोर्ट से कहा है कि उनका तबादला सीबीआई से नागपुर करके एक वरिष्ठ अधिकारी राकेश अस्थाना को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है। मनीष कुमार सिन्हा सीबीआई अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ रिश्वत लेने के एक अहम मामले की जांच कर रहे थे।
सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा ने भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित सीवीसी की जांच रिपोर्ट पर अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है।
इस मामले पर पहले 16 नवंबर को सुनवाई हुई थी। तब सीवीसी ने उनके मामले की जांच रिपोर्ट को एक सीलबंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपा था। इस रिपोर्ट की एक कॉपी न्यायालय ने वर्मा को दी थी ताकि वह इसपर अपना पक्ष रख सके।
वर्मा ने उच्चतम न्यायालय में अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप के बाद सरकार के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें ड्यूटी से हटाने और छुट्टी पर भेजा गया था।
न्यायालय ने कहा कि वह सीबीआई के डीएसपी एके बस्सी की याचिका पर बाद में सुनवाई करेंगे। बस्सी को पोर्ट ब्लेयर ट्रांसफर कर दिया था और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार के आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के फैसले पर सवाल उठाए थे।
डीआईजी मनीष कुमार सिन्हा ने सर्वोच्च अदालत को यह भी बताया है कि विशेष निदेशक अस्थाना और नीरव मोदी से जुड़े पीएनबी बैंक घोटाले की जांच बेपटरी करने के लिए उनका ट्रांसफर नागपुर किया गया।
नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और उनसे जुड़े बैंकिंग घोटाले के मामले को लेकर कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर है।
कोर्ट ने कहा था कि सीवीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कुछ ‘बहुत ही प्रतिकूल’ टिप्पणियां की हैं और वह कुछ आरोपों की आगे जांच करना चाहता है, इसके लिऐ उसे और समय चाहिए। पुलिस उपाधीक्षक अश्विनी कुमार गुप्ता भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें, उनके मूल संगठन आईबी में लौटाया जा रहा है क्योंकि वह सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर रहे थे। सीबीआई में मची यह खदबद बताती है कि वहां अन्दरूनी स्तर पर कुछ भी ठीक नहीं है। क्या सीबीआई की साख और विश्वसनीयता चौपट नहीं हो गई है।
02दिसम्बर/ईएमएस