लेख

युवा हृदयाघात की दलहीज पर (प्रज्ञापराध) (लेखक --डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन)

09/10/2019

ईश्वर ने सबको २४ घंटे दिए हैं उसका बंटवारा कैसे करना हैं यानी सदुपयोग दुरुपयोग या संरक्षण करने में .इसी प्रकार रोग की उत्पत्ति में हीन योग अतियोग और मिथ्या योग बहुत महत्व हैं .जिस प्रकार के समाचार आ रहे हैं उससे बहुत चिंता होना लाजिमी हैं .देश का युवा यदि रुग्ण होगा तो देश का भविष्य क्या होगा ?युवा आजकल जोश में होश खो बैठते हैं .अनुभव हीनता का होना और अनुभवी लोगों का त्रिरस्कार करना आज सामान्य बात हैं .
दैनिक दिनचर्या अनियमित होना स्वास्थ्य के साथ पूरा क्रम बिगड़ना ही हानिकारक हैं .सूर्योदय के समय सोना और सूर्य जब सिर पर आने पर उठना.आज कल युवा वर्ग किस दिशा में दौड़ रहा हैं और कितने तनाव झेल रहा हैं उसका मुख्य कारण दिशाहीन भविष्य .जिस कारण वह शिक्षित होने के बाद मनचाही नौकरी न मिलना या व्यवसाय में असफल होना या धरम विहीन होने से समझ विकसित न होना .यदि वे कभी रामायण ,महाभारत गीता आदि धार्मिक ग्रन्थ पढ़े तो उनमे प्रतिकूल परिस्थिति में संघर्ष करने की क्षमता पैदा होती हैं .क्योकि इतिहास सफलता और असफलता से भरा पड़ा हैं .
हर चौथा युवा हृदयाघात से पीड़ित हैं हैं और नित्य ८०० युवाओं की मौतें हो रही हैं उनके मूल में हृदय रोग ,अनियमित जीवनशैली ,मधुमेह ,उच्च रक्तचाप नशा के साथ भविष्य के प्रति हमेशा अनिश्चितता होने से तनाव का होना आम बात हैं .मनुष्य आजकल बहुत अधिक अशांत हैं ,जो जितना अधिक सम्पन्न वह उतना अधिक असंतुष्ट और बेचैन .इसके लिए वह अनाप शनाप पैसा खर्च करता हैं ,होटल, पब ,नाईट क्लब के साथ शेयर बाज़ार के कारण ,उसके उतार चढाव से उनकी हृदय गति असामान्य होने लगती हैं .सहनशीलता का अभाव होना और उतावलापन के कारण कई बार गलत निर्णय लेने से वे अवसाद में आ जाते हैं .
यह बीमारी हमारे द्वारा स्वयं आमंत्रित की जाती हैं और एक बार यदि आप इससे पीड़ित हो गए तो यह मानकर चलिएगा यह ता जिंदगी हमारे साथ रहती हैं और मानवीय स्वाभाव हैं नियमों को तोडना .यानी कुछ समय तक इलाज़ लेने के बाद हम कुछ स्वथ्य महसूस लगने लगते हैं तो हम औषधियां लेना बंद कर देते हैं यह बहुत हानिकारक होता हैं .इससे भविष्य में वे औषधियां आपको कारगार न होकर प्रभ्वहीं हों जाती हैं .इसके लिए यदि आपको आराम लग भी जाए तब भी वे औषधियां चालू रखे ,उनकी मात्रा कम कर दे पर बंद न करे .क्योकि शरीर में जो दवाएं होती हैं उनकी रासायनिक क्रियायें आपके रक्त में और प्रभावित अंगों पर प्रभाब डालती रहती हैं बाद में वे असरकारक नहीं होती .
यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति देश में बनती जा रही हैं और इसके बाद युवा वर्ग की मृत्यु और रुग्णता देश पर आर्थिक बोझ के साथ कुशल कार्य करने वाला देश हित में लाभकारी नहीं हो पाता.अभी जरुरत हैं जागरूकता की .बचाव ही इलाज़ हैं .
जो परहेज़ से नहीं चलते उनका कोई इलाज़ नहीं कर सकता .उनका इलाज़ भगवान् के पास होता हैं .समय से सुधार करना लाभदायक होता हैं .
ईएमएस/डॉक्टर अरविंद प्रेमचंद जैन/09 अक्टूबर2019