लेख

‘जीव जंतुओं का अनोखा संसार’ (लेखक/ईएमएस-योगेश कुमार गोयल)

04/05/2021

(पुस्तक समीक्षा)
घर-परिवार व बच्चों के लिए संग्रहणीय पुस्तक
पुस्तक: जीव-जंतुओं का अनोखा संसार
जीव-जंतु जहां भी हों, सदैव मनुष्य को बहुत आकर्षक लगते हैं। जीव-जंतुओं की दुनिया बड़ी विचित्र भी होती है। जीव-विज्ञानियों के लिए यह दुनिया उनकी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन जाती है। शेर बेशक कितना भी भयानक और खूंखार क्यों न हो, जंगल में विचरण करते हुए उसे देखना बहुत सुखद महसूस होता है। जीव-जंतुओं के बारे में जानना भी उतना ही सुखद और सुकूनदायी होता है और इस सुख एवं सुकून को पुस्तक के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है योगेश कुमार गोयल ने। वरिष्ठ पत्रकार योगेश गोयल एक बहुविध लेखक हैं। प्रकृति, प्रकृति-जन्य तथ्यों/सत्यों एवं जीव-जंतुओं के बारे में उनका ज्ञान अप्रतिम है। उन्होंने इस पक्ष को लेकर बहुत कुछ लिखा है। इस पुस्तक में भी उन्होंने बिल्ली से लेकर शेर तक, चिडि़या से लेकर मोर तक और मछली से लेकर व्हेल तक जीव-जंतुओं की सैंकड़ों किस्मों पर अपनी ज्ञानवर्धक दृष्टि डाली है।
समीक्षित पुस्तक में अनेक अद्भुत, असाधारण, दुर्लभ जीव-जंतुओं के बारे में बेहद दिलचस्प जानकारियां हैं। जैसे पुस्तक में ‘मडस्किपर’ नामक ऐसी मछली की जानकारी है, जो पानी के बाहर भी रह सकती है। दुनिया के कुछ चालाक और खतरनाक जीव-जंतुओं के बारे में दी गई दिलचस्प जानकारियां तो काफी हैरान करने वाली हैं। विचित्र आदतों वाले पक्षी ‘ग्रेबेस’, शर्मीले और डरपोक पक्षी ‘ईस्टर्न व्हिप बर्ड’, रक्त चूसने वाले पिस्सू, चीखने-चिल्लाने वाली बत्तख, टांगों से खून की पिचकारी छोड़ने वाला लेडी बर्ड जैसी जानकारियां ज्ञान बढ़ाती हैं। ‘हमें मादा मच्छर ही क्यों काटती है?’ शीर्षक के तहत लेखक ने काफी ज्ञानवर्द्धक जानकारी दी है। लेखक ने कुछ वैज्ञानिक शोधों के हवाले से यह भी बताने का प्रयास किया है कि जानवरों में भी इंसानों जैसी ही भावनाएं होती हैं। ‘स्माल ब्लू किंगफिशर’ नामक पक्षी किस प्रकार अपने शिकार को पीटकर मार डालता है, यह जानकारी तो होश उड़ा देती है।
लोगों के लिए, खासतौर से बच्चों के लिए यह पुस्तक काफी ज्ञानवर्धक हो सकती है। योगेश कुमार गोयल ने छोटी-छोटी जानकारियां देकर बड़े-बड़े जीव-जंतुओं का सचित्र परिचय दिया है। पुस्तक से यह भी पता चलता है कि सभी जीव-जंतु घातक नहीं होते और अधिकतर मनुष्य के मित्र भी होते हैं। यह भी बताया गया है कि जीव-जंतु अपने शत्रु से बचाव हेतु कभी-कभी मनुष्य से भी बेहतर तरीके से सोचते हैं और उसी प्रकार कार्य भी सम्पन्न करते हैं। उनकी लेखन शैली और अंदाज अच्छा है। भाषा बड़ी सरल और चुटीली है। वैसे भी संग्रह करने के लिए भी यह पुस्तक बेहद उपयोगी एवं मनोरंजन से भरपूर है। निश्चित रूप से बच्चों वाले परिवारों में यह पुस्तक संग्रहणीय होगी।
ईएमएस/04मई2021