लेख

अध्यक्ष पद से राहुल गांधी का त्याग एवं कांग्रेस का भविष्य ! (लेखक- डॉ. भरत मिश्र प्राची / ईएमएस)

12/07/2019

आम चुनाव 2019 में कांग्रेस के वर्तमान हालात के लिये कांग्रेस नेतृृत्व पर सवाल भी प्रत्यक्ष /अप्रत्यक्ष रूप से उभरना शुरू हो गया जहां गांधी परिवार इस तरह के विवादों के घेरे में उभरता नजर आने लगा, इस तरह के उभरते हालात से राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ दिया। यदि अध्यक्ष पद छोड़ने का ये कारण प्रुमुख है तो इस दिशा में यह भावी विचार करना जरूरी है कि कांग्रेस जब - जब भी गांधी परिवार से अलग हुई है, मजबूत होने के वजाय कमजोर ही हुई है। इस परिदृृश्य को गांधी परिवार से अलग हुई कांग्रेस के कार्यकाल को आसानी से देखा जा सकता। इस तरह के परिवेश पर मंथन करते हुये राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने के वजाय कांग्रेस के पुराने दिग्गज, विद्वान वैचारिक नेताओं के मार्गदर्शन में नये तेवर अपनाने की जरूरत थी जिसके सहारे वे कांग्रेस को वर्तमान हालात से उबार सकते। पर कांग्रेस हित में अध्यक्ष पद छोड़कर राहुल गांधी का यह निर्णय कांग्रेस का कौन सा भविष्य तय करेगा, यह तो आने वाला कल ही बतायेगा। राहुल गांधी को देश के कांग्रेसजनों ने बड़ी उम्मीद के साथ कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेवारी सौंपी है जिसका शुभारम्भ तेज तेवर एवं प्रखर नेतृत्व के रूप में उभरा अवश्य पर वर्तमान सिपहसालार के कमजोर मार्गदर्शन के चलते विचलित अवश्य हो गया। ऐसे सिपहसालारों की जगह कांग्रेस में दबे हुये वैचारिक लोगों को आगे लाने की आज जरूरत है। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर सवाल उभर सकते है पर वर्तमान में कोई विकल्प नजर नहीं आता। कांग्रेस के पुराने दिग्गज नेताओं के मार्गदर्शन समाहित इस युवा नेता के बदले तेवर में कांग्रेस का भविष्य नजर आ रहा है।
राजनीति में उतार - चढ़ाव तो आते ही रहते है। इतिहास साक्षी है, राजनीति में कभी दो सीट लाने वाले राष्ट्रीय दल भाजपा आज राजनीति के सर्वोच्य शिखर पर पहुंची हुई है जिसने लगातार केन्द्र की सत्ता पर बहुमत के साथ दूसरी बार भी सरकार गठित करने में सफल रही। पूर्व में राजनीतिज्ञ नहीं रहते हुये भी विदेशी होने के आरोप से घिरी श्रीमती सोनियां गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के हाथ में देश की अवाम ने लगातार दो बार केन्द्र की सत्ता की बागडोर संभला दी। आयरन लेडी के नाम से चर्चित सफल राजनीतिज्ञ श्रीमती इंदिरा गांधी को भी आम चुनाव में पराजय स्वीकार करना पड़ा। पर वह हिम्मत नहीं हारी और फिर से देश के आवाम का विश्वास हासिल करने में आपात काल लागू करने जैसी स्थिति के वावयूद भी कई बार प्रियदर्शनी बन देश का सफल नेतृृत्व करती रही। राहुल गांधी भी इसी परिवार से जुड़े है जिनके पिता राजीव गांधी ने भी आम चुनाव में पराजय स्वीकार करने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी एवं अपनी दूसरी पारी में तेज प्रखर नेता के उभरते नजर आये जिनसे देश को बहुत बड़ी उम्मीदें जुड़ चली पर उनके इस उभरते तेजस्वी नेतृृत्व का लाभ षणयंतकारियों के शिकार होने के कारण देशवासियों को नहीं मिल सका। उनके समय अमेरिका को चुनौती देकर इलेक्ट्रानिक क्षेत्र में लिया गया निर्णय आज डिजिटल इंडिया का स्वरूप लेता दिखाई दे रहा है। इस तरह के परिवार से जुड़े राहुल गांधी कैसे अपनी जिम्मेवारी से दूर हट सकते। आम चुनाव में कांग्रेस की वर्तमान स्थिति का जिम्मा अपने पर लेते हुये कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र सौंपकर वे कभी भी अपनी जिम्मेवारी से अलग नहीं हो सकते। आज कांग्रेस की वर्तमान विकट की इस घड़ी के कांग्रेस को मजबूत बनाने के वावयुद कांग्रेस दल राहुल गांधी को मनाने की दिशा में ज्यादा ही सक्रिय नजर आ रहा है। जब कि आम चुनाव में कांग्रेस की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। पर राहुल गांधी के इस राजनीतिक निर्णय से कांग्रेस ओर कमजोर होती जा रही है। वर्तमान समय में कांग्रेस के अन्दर आया राजनीतिक भूचाल कांग्रेस को सतही धरातल पर और कमजोर कर सकता है जहां विपक्ष कांग्रेस के नेतृत्व में संचालित राज्य सरकारों के अस्त - व्यस्त होने का इंतजार बेसब्री से कर रहा है। ऐसे समय में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के धैर्य की परीक्षा का समय है।
आमचुनाव 2019 में देश में जो राजनीतिक भूचाल आया जिसमें विपक्ष के कई मजबूत पांव उखड़ गये। इस तरह के राजनीतिक परिवर्तन के पीछे राजनीतिक क्षेत्र में बही विशेष संवेदनशील हवा का प्रभाव है, जहां सरकार के कार्यो का मुल्यांकन प्रायः गौण रहता है। देश में इस तरह की राजनीतिक हवा समय - समय पर चलती रही है जिससे सत्ता परिवर्तन होता रहा है। इस तरह से प्रभावित राजनीतिक परिवर्तन का दोष किसी के सिर पर तो मढ़ा तो नहीं जा सकता पर नेतृत्व जरूर प्रभावी होता है। इस तरह के हलतव में नेतृृत्व बदलने के वजाय नेतृत्व के कार्यशैली पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इस तरह के संवेदनशील हवा का लाभ पूर्व में कांग्रेस को भी मिल चुका है जहां श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुये आम चुनाव में कांग्रेस की झोली में देश की आवाम ने सर्वाधिक अपना मत डाल दिया। इस तरह के हालात से विपक्ष डगमगया नही बल्कि संघर्षरत रहा। जिसका प्रतिफल रहा कि देश में सत्ता परिवर्तन का दौर जारी रहा। वर्तमान राजनीतिक परिवर्तन से राहुल गांधी को सबक लेते हुये कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने के वजाय अपने नये तेवर एवं नई सोच के साथ इस पद पर रहते हुये कांग्रेस को मजबूत करने की आवश्यकता है। राहुल गांधी को इस विषय पर विचार करना चाहिए कि देश की आमाम किन कारणों से कांग्रेस नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पाई। आज जो विपक्ष में है वे भी कांग्रेस को आगे आना नहीं चाहते। इस तरह के हालात के लिये कांग्रेस के किसी नेतृृत्व को गलत ठहराने एवं इस तरह के हालात में नेतृत्व परिवर्तन किये जाने की कार्यवाही कांग्रेस को और कमजोर कर सकती है।
12जुलाई/ईएमएस