लेख

(विचार-मंथन) सरकार की सुनें (लेखक-सिद्धार्थ शंकर / ईएमएस)

26/03/2020


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात 21 दिन के लॉकडाउन का सख्त फैसला सुना दिया। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए यह कितना जरूरी है, यह शायद सभी को नहीं पता। यह बीमारी बाहर से भारत आई है, ऐसे में उनका लौटना खतरे की घंटी जैसा है। इसी वजह से सरकार ने पूरे भारत में लॉकडाउन और कई जगहों पर कफ्र्यू की भी घोषणा कर दी। लॉकडाउन लगाने की मुख्य वजह लोगों की लापरवाही है। पिछले दिनों मोदी ने ट्वीट कर इस पर नाराजगी भी जताई थी और कहा था कि लोग अब भी गंभीर नहीं हैं। अब 21 दिन का लॉकडाउन लगाने के पीछे सरकार की मंशा यही है कि बाहर से आए अगर किसी को कोरोना है भी तो वह उसे फैला न पाए। इस दौरान जिसमें लक्षण आने होंगे 14 जिन में दिख जाएंगे। उनका इलाज भी शुरू हो जाएगा वहीं जो पहले से पॉजेटिव हैं उनका भी इलाज पूरा हो जाएगा। हालांकि, 21 दिनों के बाद लॉकडाउन खत्म हो जाएगा, यह गारंटी के साथ नहीं कहा जा सकता है। 21 दिन की मियाद खत्म होने के बाद देश में वायरस के प्रकोप की समीक्षा आने वाले दिनों का भविष्य तय करेगी। खैर, यह सब सरकार पर छोड़ दीजिए... हमारे-आप के लिए तो बस एक ही काम है, घर पर रहिए और खुद को सुरक्षित कीजिए।
भारत में कोरोना संक्रमण से पीडि़त नए मरीजों का सामने आना बता रहा है कि बचाव के तमाम उपायों के बावजूद देश में यह महामारी फैल रही है। भले बड़े पैमाने पर संक्रमण के मामले सामने न आए हों, लेकिन रोजाना जिस तरह से नए मरीज सामने आ रहे हैं, वह चिंता का विषय है। ज्यादातर राज्यों में स्कूल और कॉलेज, सिनेमाघर, मॉल आदि बंद कर दिए गए हैं। ऐहतियात के तौर पर लोगों को दफ्तर के बजाय घर से काम करने को कहा गया है। सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए कोरोना संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया है। हालात बेकाबू न हों, इसके लिए हर स्तर पर हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। अभी तक कोरोना संक्रमण के जितने मामले सामने आए हैं, उनसे यह साबित हो चुका है कि यह संक्रमण संपर्क के जरिए ही फैल रहा है। ज्यादातर कोरोना पीडि़त वही लोग हैं जो विदेश यात्रा से लौटे हैं और यहां जो उनके संपर्क में आया, उसे यह संक्रमण लगा।
डॉक्टर हाथ धोने, भीड़ वाली जगहों पर मास्क लगाने और खांसी-जुकाम वाले मरीजों से एक मीटर की दूरी बनाए रखने जैसे उपायों पर जोर दे रहे हैं जो इस संक्रमण से बचाव के बुनियादी तरीके हैं। जब ऐसी महामारी फैलती है तो लोग घबरा जाते हैं और अपने स्तर पर ऐसे उपाय करने लगते हैं जो उन्हें संकट में डाल सकते हैं। सबसे जरूरी यह है कि डॉक्टर इससे बचाव के जो तरीके बता रहे हैं, उन्हें नजरअंदाज न किया जाए। यह बात सही है कि यह वायरस मनुष्य से मनुष्य में फैल रहा है, लिहाजा संक्रमित या अनजान लोगों से शारीरिक नजदीकी इसके फैलने में मददगार होती है। लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि भारत जैसे बड़े देश को पूरा का पूरा घरों में बंद करना न तो संभव है, न ही यहां यह इस वायरस से लडऩे का सबसे उपयुक्त तरीका हो सकता है। चीन में यह बीमारी सिर्फ एक शहर वुहान में केंद्रित थी, इसलिए वहां इस शहर और इसके लोगों को आइसोलेशन में डालना कारगर साबित हुआ। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह था कि वुहान के चप्पे-चप्पे पर जबर्दस्त सैनिटाइजेशन कैंपेन चलाया गया और अब यह प्रांत फिर से पटरी पर लौटने के लिए तैयार है। चीन अपने यहां लॉकडाउन खत्म करने की तैयारी कर रहा है। यह तभी संभव हो पाया, जब वहां के लोगों ने सरकार का साथ दिया और उसके निर्देशों को माना।
भारत में अभी मरीजों की संख्या उतनी ज्यादा नहीं है, लेकिन वे बहुत बड़े भूगोल में फैले हुए हैं। ऐसे में आइसोलेशन की रणनीति सोच-समझ कर ही अपनाना ठीक रहेगा। सबको घरों में बंद रहने की हिदायत देना, बाजार बंद करवाना, ट्रेनें न चलाना, सड़कें खाली करवाना बेहद जरूरी था, इसलिए सरकार ने किया। अब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम इस आदेश का शत-प्रतिशत पालन करें और भारत से कोरोना संक्रमण को जल्द से जल्द दूर भगाएं।
26मार्च/ईएमएस