क्षेत्रीय

शहर में अभी से सूखने लगे जल स्त्रोत

11/01/2019

अभी नहीं चेते लोग तो गर्मियों में होगी बड़ी मुशीवत
अशोकनगर (ईएमएस)। शहर में अभी से पानी की किल्लत गहराने लगी है। कई घरों में लगे हैण्डपंप सूखने लगे हैं और जेट रुक-रुक कर पानी उगल रहे हैं। अगर यही स्थिति रही तो ग्रीष्म काल में लोगों को पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसना होगा। दूसरी ओर शहर में धड़ल्ले से बोर किए जा रहे हैं। जिससे पानी रसातल में जा रहा है। भू-जल स्तर गिरने से रोकने के लिए प्रशासन को नलकूप खनन करने के लिए बनाए गए नियमों का पालन कठोरता से करना होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल संकट दस्तक देने लगा है।
शहर की कई कालोनियों में अभी से पानी की किल्लत दिखाई देने लगी है। इस कारण इन कालोनियों के बाशिंदे अधिकांश समय हैण्डपंप एवं सार्वजनिक जल स्त्रोंतों से पानी लाते हुए दिखाई दे रहे हैं। खासकर हैण्डपंपों पर तो दिन भर लोगों की भीड़ पानी के बर्तन लिए दिखाई देती है। जिन कालोनियों में पानी के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है उनमें शंकर कालोनी, नहर कालोनी, कछियाना मोहल्ला सहित शहर के करीब एक दर्जन क्षेत्र शामिल हैं। जिन घरों के जल स्त्रोत अभी से कम पानी देने लगे हैं उनके मुताबिक अभी से घरों में लगे हैंडपंपो एवं जेटपंपों से निकलने वाले पानी की मात्रा में कमी आ गई है। जिसका सीधा मतलब है कि जल स्तर गिर रहा है और अगर शहर में लगातार हो रहे बोर पर रोक नहीं लगी तो आगामी ग्रीष्मकाल में लोगों को पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ेगी। शहर में एक समय बड़ी संख्या में लोग बोर करा रहे हैं। नियमानुसार एक बोर होने के बाद उसके पास में निश्चित दूरी के बाद ही दूसरा बोर हो सकता है लेकिन शहर में इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है और हर कोई अपने घर में बोर कराने में जुटा हुआ है। जिससे धरती की कोख छलनी हो रही है और वाटर लेवल निरंतर गिर रहा है। शहर की आवादी बढऩे के साथ ही पानी की आवश्यकता भी बढ़ रही है। शहर की नई बसाहटों में से अधिकांश में नपा की पेयजल आवर्धन योजना की पाइप लाइन नहीं पहुंची है इस कारण लोग पानी की पूर्ति के लिए अंधाधुंध बोर करा रहे हैं।
पाताल बोर भी नहीं पहुंचा पा रहे लाभ:
जिन वस्तियों में नगरपालिका की पाइप लाइन नहीं पहुंची है वहां पर नगरपालिका द्वारा पाताल बोर कराए गए हैं लेकिन इनका संचालन ठीक ठंग से न होने के कारण पाताल बोर का लाभ जरूरतमंदो तक नहीं पहुंच पा रहा है। नपा ने तालाल बोर कराने के बाद इनकी चाबी आसपास में रहने वाले प्रभावशाली व्यक्तिों के हाथ में सौंप दी है। जिससे ऐसे प्रभावशाली लोग और इनके मिलने जुलने वाले तो आसानी से पानी भर लेते हैं। परन्तु जरूरतमंद और कमजोर वर्ग के लोग पानी के लिए यहां वहां भटकते हैं और पाताल बोर से पानी प्राप्त करना उनके लिए आसमान से तारे तोड़ लाने के समान हो रहा है। जबकि जरूरत यह है कि और अधिक पाताल बोर कराकर उनसे लोगों को पानी उपलब्ध कराया जाए ताकि पानी के लिए लोगों को यहां वहां न भटकना पड़े।
शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल संकट:
जिला मुख्यालय के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी की समस्या बढऩे लगी है। इस बार पर्याप्त वर्षा होने के बाद भी पानी को सहजने के प्रयास पूरे मन से नहीं किए गए। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों के जल स्त्रोत भी सूखने लगे हैं। अधिकांश नदियां अभी से सूख गई हैं। कुआ और तालाबों का जल स्तर भी ज्यादा उम्मीदों भरा नहीं है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी जल संकट अभी से दस्तक देने लगा है। शहर की तरह ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी अधिकांश हैंडपंप खराब पड़े हैं या फिर उनका जल स्तर गिर गया है। जिससे वे पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं दे रहे हैं।
नल-जल योजनाएं पड़ीं बंद:
जिले के ग्रामीण इलाकों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा नल-जल योजना बनाई गई थी, लेकिन पीएचई विभाग की लापरवाही से गांव में ही यह योजना भी दम तोड़ रही है। जिले के अधिकतर ग्रामों में नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं। गांवों में ग्रामीण जलसंकट से जूझ रहे हैं। नलजल योजनाएं बंद होने की वजह से ग्रामीण बूंद-बंूद पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। दूरदराज के गांवों में तो स्थिति और भी खराब है। बंद नल-जल योजनाओं को चालू कराने के लिए कई बार जनप्रतिनिधि मुद्दे उठा चुके हैं लेकिन स्थिति में खास सुधार नहीं आ पाया है। कई सालों से नलजल योजनाएं शो पीस बनी हैं।
ईएमएस/प्रवीण/11/01/2019